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दहेज कानून में सुधार की मांग: SC में दायर हुई याचिका, झूठे मामलों से पुरुषों को बचाने के लिए दिए ये सुझाव

थर्ड आई न्यूज

नई दिल्ली l सुप्रीम कोर्ट में दहेज कानून में सुधार को लेकर एक याचिका दायर की गई है। इसमें मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाए। यह कमेटी दहेज कानून में सुधार से जुड़े सुझाव पेश करेगी। साथ ही, विवाह के समय दिए गए उपहार और नकदी का रिकॉर्ड मैरिज रजिस्ट्रेशन के दौरान रखने की भी सिफारिश की गई है। यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल तिवारी द्वारा दायर की गई है।

मैरिज रजिस्ट्रेशन में हो उपहारों का रिकॉर्ड :
याचिका में सुझाव दिया गया है कि शादी के समय जो भी धनराशि या उपहार दिए जाते हैं, उनका एक शपथ पत्र बनाकर मैरिज रजिस्ट्रेशन में दर्ज किया जाए। यह कदम दहेज के नाम पर झूठे मामलों को रोकने और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से सुझाया गया है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जजों, विधिवेत्ताओं और वकीलों की एक विशेषज्ञ समिति गठित करने की भी मांग की गई है।

अतुल सुभाष केस बना केंद्र बिंदु :
यह याचिका बेंगलुरु में AI इंजीनियर अतुल सुभाष की आत्महत्या के बाद चर्चा में आई है। अतुल ने 9 दिसंबर को सुसाइड कर लिया था। सुसाइड से पहले उन्होंने 80 मिनट का एक वीडियो बनाया और 24 पन्नों का सुसाइड नोट छोड़ा। इसमें उन्होंने अपनी पत्नी निकिता सिंघानिया और उसके परिवार पर झूठे केसों के जरिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया।

इंजीनियर अतुल सुभाष ने की थी खुदकुशी :
अतुल ने सुसाइड वीडियो बनाते समय एक टीशर्ट पहनी थी, जिस पर लिखा था, “Justice is Due” यानी “इंसाफ बाकी है”। सुसाइड नोट में अतुल ने घरेलू हिंसा और दहेज प्रताड़ना जैसे झूठे केसों का उल्लेख किया। साथ ही, एआई इंजीनियर ने जौनपुर फैमिली कोर्ट की जज रीता कौशिक पर सेटलमेंट के लिए 5 लाख रुपए की रिश्वत मांगने का भी आरोप लगाया।

बेंगलुरु पुलिस ने दर्ज किया केस :
अतुल सुभाष की आत्महत्या के मामले में बेंगलुरु पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 108 और धारा 3(5) के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बन गया है।

दहेज कानून में बदलाव की सिफारिशें :
विशाल तिवारी की याचिका में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसलों का भी हवाला दिया गया है। इसमें पति और उसके परिवार को झूठे मामलों से बचाने के लिए दिए गए निर्देशों को लागू करने की मांग की गई है। यह याचिका दहेज कानून के दुरुपयोग को रोकने और पारदर्शी व्यवस्था लाने की कोशिशों का हिस्सा है।

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