Waqf Bill: वक्फ विधेयक पर किसे-किसका समर्थन, लोकसभा-राज्यसभा में कैसे बन-बिगड़ सकती है बात? आंकड़ों से जानें

थर्ड आई न्यूज

नई दिल्ली I लोकसभा में बुधवार (2 अप्रैल) को वक्फ संशोधन विधेयक, 2024 को फिर से पेश कर दिया गया। इस विधेयक के संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) में भेजे जाने के बाद अब इसे नए सिरे से पेश किया गया है। सदन में बहस के बाद इस पर मतदान होगा।

ऐसे में यह जानना अहम है कि संसद में इस वक्त सत्तापक्ष और विपक्ष के पास कितना संख्या बल है? कौन सा राजनीतिक दल किस ओर है? भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए लोकसभा और राज्यसभा में किस तरह इस विधेयक को पास करा सकता है? इसके अलावा विपक्ष के पास इस वक्त दोनों सदनों में कितना समर्थन है? विधेयक के पास होने के बाद क्या होगा? आइये जानते हैं…

संसद में कौन सा दल वक्फ संशोधन विधेयक के पक्ष-विपक्ष में?

पक्ष विपक्ष रुख साफ नहीं
भाजपा कांग्रेस एसकेएम
टीडीपी सपा शिअद
जदयू टीएमसी जेडपीएम
शिवसेना डीएमके
लोजपा (रामविलास) शिवसेना(यूबीटी)
रालोद एनसीपी(एससीपी)
जनसेना पार्टी वाईएसआरसीपी
जेडीएस माकपा
यूपीपीएल राजद
एजीपी झामुमो
अपना दल आईयूएमएल
आजसू आप
हम भाकपा (माले)
एनसीपी नेकां
भाकपा
वीसीके
आजाद समाज पार्टी(कांशीराम)
वीपीपी
एआईएमआईएम
एमडीएमके
बीएपी
आरएसपी
रालोप
केरल कांग्रेस
निर्दलीय

लोकसभा में कितना है वक्फ विधेयक को समर्थन?
543 सदस्यीय लोकसभा में इस वक्त 542 सांसद हैं। पश्चिम बंगाल की बशीरहाट सीट अभी रिक्त है। वक्फ संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए 272 सदस्यों के समर्थन की जरूरत होगी। मौजूदा समय में एनडीए गठबंधन की सरकार है यानी इस गठबंधन के पास 272 से ज्यादा संख्याबल है।

(i). राष्ट्रीय प्रजातांत्रिक गठबंधन (एनडीए)
एनडीए गठबंधन में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है। इस गठबंधन में अकेले भाजपा के 240 सांसद हैं। वक्फ विधेयक पास कराने के लिए भाजपा को 32 सांसदों की जरूरत होगी। कुछ मतभेदों के बावजूद तेलुगुदेशम पार्टी (टीडीपी) ने वक्फ संशोधन विधेयक पर भाजपा के साथ रहने की बात कही। टीडीपी के लोकसभा में 16 सांसद हैं। दूसरी तरफ जदयू के 12 सांसद भी विधेयक के साथ हैं। लोजपा (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने अपने 5 सांसदों के समर्थन की बात कही है।

ऐसे ही एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना, जयंत चौधरी की रालोद, एचडी देवेगौड़ा की जनता दल (सेक्युलर) और पवन कल्याण की जनसेना पार्टी भी वक्फ संशोधन विधेयक को पास कराने के पक्ष में है। इन दलों के अलावा अजित पवार की राकांपा, अनुप्रिया पटेल का अपना दल, जीतनराम मांझी का हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (हम), ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन और पूर्वोत्तर के दल- असम गण परिषद, यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल ने भी एनडीए के साथ ही जाने का एलान किया है।

(ii) विपक्ष
विपक्षी दलों ने वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ साथ आने का फैसला किया है। इनमें सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस है, जिसके 99 सांसद हैं। वहीं, दूसरा सबसे बड़ा दल अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी है, जिसके लोकसभा में 37 सांसद हैं। इसके अलावा ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी, एमके स्टालिन की डीएमके, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी), शरद पवार की राकांपा-एसपी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), राष्ट्रीय जनता दल, आम आदमी पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल), जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) जैसे दलों ने भी लोकसभा में वक्फ विधेयक में संशोधनों के खिलाफ वोट करने का फैसला किया है।

इन पार्टियों के अलावा असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम), वाईएसआरसीपी और आजाद समाज पार्टी ने भी वक्फ संशोधन विधेयक के विरोध का फैसला किया है। इसके अलावा लोकसभा में इस वक्त 7 निर्दलीय सांसद हैं, जिनमें पप्पू यादव, मोहमद हनीफा और विशाल पाटिल वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ हैं। इसके अलावा जोराम पीपल्स मूवमेंट और शिरोमणि अकाली दल ने अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं I

राज्यसभा में क्या है वक्फ विधेयक के समर्थन का गणित?
वक्फ संशोधन विधेयक अगर लोकसभा में पास हो जाता है तो इसे अगली चुनौती राज्यसभा में मिलेगी। राज्यसभा में कुल सांसद 245 हो सकते हैं। हालांकि, मौजूदा समय में सदन में 236 सांसद हैं। वहीं, 9 सीटें खाली हैं। राज्यसभा में कुल 12 सांसद नामित हो सकते हैं, लेकिन इनकी संख्या फिलहाल 6 है। इस लिहाज से राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए 119 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी।

(i) एनडीए :
राज्यसभा में भी आंकड़ों के लिहाज से एनडीए के पास पूर्ण बहुमत है। दरअसल, राज्यसभा में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है और उसके पास कुल 98 सांसद हैं। इसके अलावा लोकसभा की तरह ही जदयू, तेदेपा, राकांपा व अन्य दलों की तरफ से एनडीए को समर्थन मिला हुआ है।

राज्यसभा में जो अन्य दल एनडीए के साथ हैं, उनमें उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) का एक सांसद, पत्तली मक्कल काची, तमिल मनिला कांग्रेस (टीएमसी-एम), नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) के एक-एक सांसद, रामदास आठवले की रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई-ए) का एक सांसद और दो निर्दलीय सांसद हैं।

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(ii). राज्यसभा में विपक्ष के क्या आंकड़े?
दूसरी तरफ राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक के विपक्ष में भी कई पार्टियां जुटी हैं। हालांकि, यह समर्थन विधेयक को रोकने के लिए नाकाफी साबित हो सकता है। राज्यसभा में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है। विपक्ष से इसके राज्यसभा में सबसे ज्यादा 27 सांसद हैं। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), आम आदमी पार्टी (आप) और द्रमुक अगली बड़ी पार्टी हैं।

जो अन्य दल वक्फ संशोधन विधेयक में विपक्ष के साथ हैं, उनमें नवीन पटनायक का बीजू जनता दल (बीजद) शामिल है, जिसके 7 सांसद हैं। इसके अलावा जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआरसीपी, एआईएडीएमके भी विपक्ष के साथ हैं।

राज्यसभा में किस-किसका रुख साफ नहीं
एनडीए और विपक्ष में समर्थन के बीच कुछ दल ऐसे भी हैं, जिन्होंने अब तक विधेयक पर अपना रुख साफ नहीं किया है। इनमें तेलंगाना की पार्टी भारतीय राष्ट्र समिति (बीआरएस)- 4 सीटें, बहुजन समाज पार्टी (बसपा)- 1 सीट और मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ)- 1 सीट शामिल हैं।

दूसरी तरफ राज्यसभा में छह नामित सांसदों का रुख भी फिलहाल साफ नहीं माना जाता। चूंकि इन सांसदों को सरकार की तरफ से नामित किया जाता है, ऐसे में अनुमान है कि नामित सांसद सरकार को समर्थन देंगे। हालांकि, वे इस रुख को बदलने का अधिकार भी रखते हैं।
टीडीपी के बाद जदयू और सरकार के साथ जाने की संभावना क्यों?
सहयोगी जदयू-टीडीपी ने विधेयक के समर्थन के लिए कई शर्तें रखी थीं। जदयू की प्रमुख मांग थी कि सरकार अधिनियम के लागू होने से पहले मुसलमानों के धार्मिक पहचान से जुड़े स्थानों में छेड़छाड़ नहीं करेगी। मतलब अधिनियम लागू होने की पूर्व स्थिति बहाल रखेगी।
टीडीपी ने वक्फ संपत्ति विवाद की जांच के लिए कलेक्टर से ऊपर राज्य सरकार द्वारा नियुक्त वरिष्ठ अधिकारी को अंतिम अधिकार देने, वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण के लिए समय देने, जमीन से जुड़े विवाद के निपटारे के लिए अंतिम फैसले का हक राज्य सरकार को देने की मांग की थी। इसे सरकार ने स्वीकार कर लिया।

किए गए कई परिवर्तन :
सहयोगी दलों की मांग को स्वीकार करने के साथ ही भाजपा ने सियासी संदेश देने के लिए अपनी ओर से भी विधेयक में कई परिवर्तन किए हैं। मसलन भाजपा युवा मोर्चा के प्रमुख तेजस्वी सूर्या के इस सुझाव को स्वीकार कर लिया है कि पांच वर्षों तक इस्लाम धर्म का पालन करने वाला ही वक्फ को अपनी संपत्ति दान कर सकेगा। दान की जाने वाली संपत्ति से जुड़ा कोई विवाद होने पर उसकी जांच के बाद ही अंतिम फैसला होगा। पुराने कानून की धारा 11 में संशोधन का स्वीकार कर लिया गया है, जिसमें कहा गया है कि वक्फ बोर्ड के पदेन सदस्य चाहे वह मुस्लिम हो या गैर मुस्लिम, उसे गैर मुस्लिम सदस्यों की गिनती में शामिल नहीं किया जाएगा। इसका अर्थ यह कि वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की संख्या बढ़ सकती है।

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