alt="Header Advertisement" class="header-ad-image">     

“रोई रोई बिनाले” का विशेष प्रदर्शन — जुबिन दा की स्मृतियों से सराबोर हुआ फैंसी बाजार का केल्विन गोल्ड थियेटर

गुवाहाटी । पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी सम्मेलन (पूप्रामास) के सौजन्य से तथा असमिया सिनेमा के पुरोधा और वरिष्ठ समाजसेवी शंकरलाल गोयनका के आतिथ्य में, स्वर्गीय सुप्रसिद्ध कलाकार जुबिन गर्ग (जुबिन दा) की अंतिम फिल्म “रोई रोई बिनाले” का विशेष एवं भावनात्मक प्रदर्शन केल्विन गोल्ड थियेटर, श्रद्धांजलि कॉम्प्लेक्स, फैंसी बाजार में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत जुबिन दा की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलन और पुष्पांजलि अर्पण से हुई। इस अवसर पर शंकरलाल गोयनका, वरिष्ठ अभिनेता हिराम्ब चौधरी, समाजसेवी जयप्रकाश गोयनका, पार्षद प्रमोद स्वामी, पश्चिम गुवाहाटी बिहु सम्मेलनी के अध्यक्ष करेन्द्र नाथ कलिता, वरिष्ठ पत्रकार दीपक शर्मा, साहित्यकार किशोर कुमार जैन, सम्मेलन के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बसंत सुराणा, निवर्तमान राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मधुसूदन सिसकारिया, पूर्व प्रांतीय महामंत्री प्रमोद तिवाड़ी , राजकुमार तिवाड़ी , सलाहकार माणक चंद नाहटा, प्रांतीय अध्यक्ष कैलाश काबरा, महामंत्री रमेश कुमार चांडक, संगठन मंत्री मनोज जैन (काला), जनसंपर्क अधिकारी विवेक सांगानेरिया तथा विभिन्न शाखाओं के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

वक्ताओं ने स्व. जुबिन दा को श्रद्धांजलि देते हुए कहा —

कैलाश काबरा ने कहा, “जुबिन गर्ग एक ऐसी कलात्मक आत्मा थे जिन्होंने यह सिखाया कि इंसान की कोई जाति नहीं होती — हमें अहंकार छोड़कर मानवता और सेवा के मार्ग पर चलना चाहिए।”

शंकरलाल गोयनका ने भावुक होकर कहा, “हमने एक सच्चे, निष्ठावान और आदर्शवादी कलाकार को खो दिया है — वे वास्तव में भगवान जैसे थे।”

वरिष्ठ अभिनेता हिराम्ब चौधरी ने कहा, “तीस वर्षों के फिल्मी अनुभव में ‘रोई रोई बिनाले’ जैसी संवेदनशील कृति विरले ही देखने को मिलती है।”

साहित्यकार किशोर कुमार जैन ने कहा, “जुबिन गर्ग की कविताएं और गीत असमिया संस्कृति के अमर प्रतीक हैं — वे शब्दों से नहीं, भावनाओं से गाते थे।”

पत्रकार दीपक शर्मा ने कहा, “जुबिन गर्ग केवल एक गायक नहीं थे, वे समाज के लिए प्रेरणा बने एक संवेदनशील व्यक्तित्व थे।”

दर्शकों ने फिल्म देखने के बाद भावनात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि “फिल्म के हर दृश्य में जुबिन दा की आत्मा जैसे सजीव प्रतीत हुई — यह अनुभव हृदय को छू गया।”
फिल्म की कहानी, निर्देशन, संवाद, गीत-संगीत और उत्कृष्ट सिनेमेटोग्राफी ने उपस्थित सभी दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया।

कार्यक्रम के अंत में दर्शकों ने एक स्वर में कहा —

“यह फिल्म हर व्यक्ति को अवश्य देखनी चाहिए — यही जुबिन दा को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”

अंत में सभी उपस्थित लोगों ने पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी सम्मेलन (पूप्रामास) के इस भावनात्मक एवं प्रेरणादायक आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया, जिसने जुबिन दा की स्मृतियों को पुनः जीवंत कर दिया।

यह प्रेस विज्ञप्ति जन-साधारण की जानकारी हेतु प्रांतीय महामंत्री रमेश कुमार चांडक द्वारा जारी की गई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *