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Railways: असम में हाथियों की मौत के बाद एक्शन में रेलवे प्रशासन, ट्रैक पर एआई पहरेदार; जानें कैसे करेगा काम?

थर्ड आई न्यूज

नई दिल्ली। असम में राजधानी एक्सप्रेस हादसे के बाद भारतीय रेलवे अलर्ट मोड में आ गया है। ट्रैक पर बार-बार हो रही वन्यजीवों की मौतों को गंभीरता से लेते हुए रेलवे ने सुरक्षा इंतजामों को तकनीक के सहारे मजबूत करने जा रहा है। रेलवे ने तय किया है कि हाथी, शेर और बाघ जैसे बड़े जानवरों की मौजूदगी पहले ही पहचानने के लिए ट्रैक पर एआई आधारित सिस्टम लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य समय रहते ट्रेन को रोकना और जानवरों के साथ-साथ यात्रियों की जान बचाना है।

ट्रेन का इंजन और पांच कोच पटरी से उतरे :
कुछ दिनों पहले असम के होजाई जिले में सैरांग-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस की चपेट में आने से सात हाथियों की जान चली गई। यह हादसा उस वक्त हुआ, जब हाथियों का एक झुंड रेलवे ट्रैक पार कर रहा था। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रेन का इंजन और पांच कोच पटरी से उतर गए। एक हाथी गंभीर रूप से घायल हुआ, जबकि बाकी की मौके पर ही मौत हो गई। हालांकि, ट्रेन में सवार यात्रियों को कोई चोट नहीं आई, लेकिन इस घटना ने रेलवे और वन विभाग दोनों को गहरी चिंता में डाल दिया।

AI डिस्ट्रिब्यूटेड एकॉस्टिक सिस्टम तकनीक पर काम करता है :
रेलवे के अनुसार, ट्रैक पर अब एआई आधारित इंट्रूज़न डिटेक्शन सिस्टम लगाया जा रहा है, जो डिस्ट्रिब्यूटेड एकॉस्टिक सिस्टम तकनीक पर काम करता है। यह सिस्टम ट्रैक के आसपास होने वाली हलचल और कंपन को पकड़कर समय रहते यह संकेत देता है कि कोई बड़ा जानवर नज़दीक आ रहा है।

रेलवे ने इसे देशभर में लागू करने का फैसला किया है :
फिलहाल यह तकनीक नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे के 141 किलोमीटर लंबे हिस्से में लगाई गई है, जहां हाथियों के ट्रेन से टकराने की घटनाएं ज्यादा सामने आई हैं। शुरुआती नतीजे सकारात्मक मिलने के बाद रेलवे ने इसे देशभर में लागू करने का फैसला किया है और इसके लिए 981 किलोमीटर नए ट्रैक पर सिस्टम लगाने के टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं।

वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ यात्रियों की सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी :
इस एआई सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ट्रैक के पास हाथियों या अन्य बड़े जानवरों की गतिविधि सामने आते ही लोको पायलट, स्टेशन मास्टर और कंट्रोल रूम को तुरंत अलर्ट भेज दिया जाता है। ट्रेन चालक को करीब आधा किलोमीटर पहले ही चेतावनी मिल जाती है, जिससे समय रहते गति कम की जा सकती है या ट्रेन रोकी जा सकती है। रेलवे का कहना है कि यह तकनीक वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ यात्रियों की सुरक्षा को भी मजबूत करेगी। असम हादसे के बाद रेलवे ने साफ किया है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

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