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जुबीन गर्ग मृत्यु मामले में कोलकाता के वकील नियुक्त, विशेष अदालत व विशेष अभियोजकों की मांग तेज

थर्ड आई न्यूज

गुवाहाटी I गुवाहाटी लॉयर्स एसोसिएशन के महासचिव अपूर्व कुमार शर्मा ने 3 जनवरी को कहा कि एसोसिएशन जुबीन गर्ग मृत्यु मामले पर करीबी नजर बनाए हुए है और मामले की गंभीरता को देखते हुए असम सरकार से विशेष अदालत के गठन तथा विशेष लोक अभियोजकों (एसपीपी) की टीम नियुक्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आरोपपत्र का आकार अत्यंत विशाल होने के कारण यह मांग आवश्यक हो गई है।

अदालती कार्यवाही के बाद मीडिया से बातचीत में शर्मा ने बताया कि 3 जनवरी को आरोप तय करने पर विचार के लिए तारीख निर्धारित थी। इस दौरान आरोपी अमृतप्रभा के मामले में आरोपों की सुनवाई और जमानत याचिका पर विचार किया गया।

एक अन्य आरोपी सिद्धार्थ शर्मा के मामले में कोलकाता से नियुक्त एक निजी वकील ने वर्चुअल माध्यम से पेश होकर आरोप तय करने की सुनवाई के लिए समय मांगा। उन्होंने आरोपपत्र के काफी बड़ा होने का हवाला दिया। इसी तरह आरोपी श्यामकानु महंता की ओर से भी कोलकाता स्थित अधिवक्ता ने समय की मांग की और बताया कि उन्हें उपलब्ध कराए गए पेन ड्राइव में कुछ दस्तावेज़ अनुपलब्ध हैं। अदालत ने दोनों मामलों में समय प्रदान कर दिया।

शर्मा ने बताया कि अन्य आरोपियों—शेखर ज्योति गोस्वामी, संदीपन गर्ग, नंदेश्वर बोरा और परेश बैश्य—की ओर से भी अधिवक्ता पेश हुए, जिनमें से कुछ का प्रतिनिधित्व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के वकील कर रहे हैं। उनकी ओर से जमानत याचिकाएं दायर की गईं, जिनका सरकारी अधिवक्ता और लोक अभियोजक ने विरोध करते हुए लिखित जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।

उन्होंने यह भी बताया कि कोलकाता सहित अन्य स्थानों से वर्चुअल उपस्थिति की अनुमति और अन्य राहतों की मांग को लेकर कई अर्जियां दाखिल की गई हैं, जिनका अभियोजन पक्ष ने विरोध किया। मामले की अगली सुनवाई 17 जनवरी 2026 को तय की गई है, जब आरोपी अपने-अपने जेलों से वर्चुअल रूप से पेश होंगे।

मामले की व्यापकता को रेखांकित करते हुए शर्मा ने कहा कि आरोपपत्र लगभग 12,000 पन्नों का है और एक ही लोक अभियोजक पर कई अदालतों का भार डालना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा, “एक लोक अभियोजक के लिए इतने बड़े रिकॉर्ड का अध्ययन करना और जमानत व अन्य याचिकाओं का प्रभावी ढंग से विरोध करना लगभग असंभव है।”

गुवाहाटी लॉयर्स एसोसिएशन ने मांग की है कि इस मामले की दिन-प्रतिदिन सुनवाई के लिए एक विशेष प्रथम श्रेणी अदालत गठित की जाए और कम से कम दस विशेष लोक अभियोजकों की टीम तैनात की जाए। शर्मा ने कहा, “तभी सच्चाई सही अर्थों में सामने आएगी और जुबीन गर्ग को न्याय मिल सकेगा।”

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