असम की ड्राफ्ट मतदाता सूची में ‘गंभीर अनियमितताओं’ का कांग्रेस का आरोप, अंतिम प्रकाशन रोकने की मांग; मुख्यमंत्री ने खारिज किए दावे
थर्ड आई न्यूज
गुवाहाटी I असम विधानसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस विधायक देबब्रत सैकिया ने 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले विशेष पुनरीक्षण (SR) के बाद प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में “गंभीर अनियमितताओं” का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि सभी विसंगतियों की जांच और समाधान होने तक मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन रोका जाए।
अपने पत्र में सैकिया ने मीडिया रिपोर्टों और जमीनी स्तर से मिले फीडबैक का हवाला देते हुए अनधिकृत और “अज्ञात” मतदाता प्रविष्टियों पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना उचित सत्यापन के गैर-असमिया भाषी व्यक्तियों के नाम सूची में जोड़े गए हैं और कुछ मामलों में घर के सदस्यों की जानकारी के बिना ही मतदाता दर्ज कर दिए गए।
कांग्रेस नेता ने ठोस उदाहरण देते हुए कहा कि गुवाहाटी के तैयबुल्ला रोड पर मकान संख्या 44 और 15 में परिवार की जानकारी के बिना चार गैर-असमिया व्यक्तियों का नाम जोड़ा गया। इसके अलावा, नाज़िरा विधानसभा क्षेत्र में गैर-मौजूद ‘हाउसहोल्ड नंबर 00’ के खिलाफ भी मतदाता प्रविष्टियां पाई गईं। सैकिया के मुताबिक, ऐसी प्रक्रियागत चूकें अक्सर नजरअंदाज हो जाती हैं, जिससे “अज्ञात” मतदाताओं को मतदान का अवसर मिल सकता है और इससे मतदाता सूची की सत्यता व विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
सैकिया ने चेतावनी देते हुए कहा कि ये कथित उल्लंघन लोकतांत्रिक मूल्यों, असम के लोगों के संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत के लिए गंभीर खतरा हैं। उन्होंने इस मुद्दे को कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा निर्वाचन आयोग में लगाए गए वोट हेरफेर के आरोपों से भी जोड़ा और इसे व्यापक प्रणालीगत समस्या करार दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न कारणों से ड्राफ्ट सूची से 10 लाख से अधिक नाम हटाए जाने की खबरें हैं, लेकिन नई विसंगतियों के सामने आने से पूरे पुनरीक्षण अभ्यास की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। सैकिया ने असम समझौते की धारा 6 और संवैधानिक सुरक्षा बनाए रखने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया।
चुनाव आयोग से अपील करते हुए सैकिया ने सभी रिपोर्टेड विसंगतियों की त्वरित और पारदर्शी जांच कराने, निष्कर्ष सार्वजनिक करने तथा अनधिकृत प्रविष्टियों को हटाने तक अंतिम सूची के प्रकाशन पर रोक लगाने की मांग की। साथ ही, भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने के लिए एक समान एड्रेसिंग सिस्टम और कड़े सत्यापन प्रोटोकॉल लागू करने का आग्रह किया।
विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि आपत्तियां दर्ज कराने और सुधार के लिए निर्धारित प्रक्रियाएं मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि वास्तविक चिंताओं के लिए फॉर्म 6, 7 और 8 के माध्यम से नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन का अनुरोध किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा, “मीडिया में शोर मचाने के बजाय विपक्ष को तय प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए।”
निर्वाचन आयोग के अनुसार, असम में मतदाताओं की संख्या में 1.35 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। 30 दिसंबर को प्रकाशित एकीकृत ड्राफ्ट मतदाता सूची में कुल 2,52,01,624 मतदाता हैं। पिछले वर्ष 27 दिसंबर से 6 जनवरी के बीच 7,86,841 नाम जोड़े गए और 4,47,196 नाम हटाए गए। SR प्रक्रिया के दौरान 4,78,992 मृत मतदाता, 5,23,680 स्थानांतरित मतदाता और 53,619 बहु-प्रविष्टियों के मामले चिह्नित किए गए।
आयोग ने स्पष्ट किया कि इन नामों को अभी हटाया नहीं गया है और दावे-आपत्तियों की अवधि (27 दिसंबर से 22 जनवरी) के दौरान औपचारिक आवेदन मिलने के बाद ही कार्रवाई होगी। विशेष अभियान तिथियां 3–4 जनवरी और 10–11 जनवरी तय की गई हैं, जबकि अंतिम मतदाता सूची 10 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी।


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