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भारत ने तेजी से खोद डाली पाकिस्तान की ‘जड़’…लगा दिए बड़े-बड़े बुलडोजर

थर्ड आई न्यूज

नई दिल्ली: भारत ने सिंधु जल संधि रोकने के बाद जम्मू-कश्मीर में चेनाब नदी पर बने 4 बड़े हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने का काम शुरू कर दिया है। ये नदी पाकिस्तान भी जाती है, जिससे पाकिस्तान की टेंशन बढ़नी तय है। पाकल दुल, किरू, क्वॉर और रैटल परियोजनाओं को तय समयसीमा में तेजी से पूरा किया जा रहा है। दरअसल, हाल ही में केंद्र सरकार ने ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने यहां का दौरा कर इन परियोजनाओं को तय समय में पूरा करने की सख्त हिदायत दी है।

चेनाब नदी पर भारत की जलविद्युत परियोजनाएं :
प्रोजेक्ट टुडे पर छपी खबर में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि पाकल दुल और किरू परियोजनाओं को दिसंबर, 2028 तक पूरा किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, क्वॉर प्रोजेक्ट को मार्च, 2028 तक पूरा करने को कहा गया है। रैटल डैम प्रोजेक्ट को भी तेजी से पूरा करने के निर्देश हैं। सोशल मीडिया पर यूजर्स कह रहे हैं-पाकिस्तान बनेगा रेगिस्तान।

पाकल दुल प्रोजेक्ट क्या है, इसे समझते हैं :
पाकिस्तान की ओर बहने वाली चेनाब नदी पर बनने वाला पाकल दुल भारत का पहला स्टोरेज प्रोजेक्ट है। इसके बनने के बाद से 1,000 मेगावॉट बिजली पैदा की जा सकेगी। यह 167 मीटर ऊंचा है। इससे नदी के पानी के बहाव को नियंत्रित किया जा सकेगा।

किरू और क्वॉर प्रोजेक्ट्स से भारत की पकड़ मजबूत :
किरू और क्वॉर प्रोजेक्ट्स दोनों ही रन ऑफ द रिवर बांध हैं। वहीं, रैटल 850 मेगावॉट प्रोजेक्ट है, जो 133 मीटर ऊंचा डैम है। इन बांधों से भारत चेनाब नदी के पानी पर मजबूत पकड़ बना सकता है।

पाकल दुल बनने से जल प्रवाह नियंत्रित कर सकेगा भारत :
पाकल दुल पर बनने वाला बांध भारत का सबसे ऊंचा बांध बन जाएगा। इसके चालू होने से भारत बिना किसी संधि का उल्लंघन किए चेनाब के जल प्रवाह को नियंत्रित कर सकेगा।

पाकिस्तान को क्यों हो सकती है टेंशन :
एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की ज्यादातर खेती भारत से आने वाली सिंधु नदी प्रणाली की नदियों पर निर्भर है। सिंधु बेसिन से पाकिस्तान की 90 प्रतिशत से अधिक कृषि और अधिकांश वॉटर इन्फ्रास्ट्रक्चर भारत से होकर आने वाली नदियों पर निर्भर है।

भारत के इस कदम का मकसद क्या है :
इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत के तेजी से चेनाब पर बन रही इन परियोजनाओं को पूरा करने का मकसद मुख्य रूप से 4 हैं।
*ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना
*नदी के जल में अपने उचित हिस्से का अधिकतम उपयोग करना
*पाकिस्तान द्वारा भारत से निकलने वाले जल से लंबे समय से चले आ रहे अनुचित फायदे को रोकना है।
*क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना

सिंधु जल संधि स्थगित करने के पीछे रणनीतिक मायने :
भारत की ओर से 1960 के सिंधु जल संधि को स्थगित करने के निर्णय ने जम्मू-कश्मीर में जलविद्युत विकास को नई गति प्रदान की है। हालांकि, भारत हमेशा से यह कहता रहा है कि उसकी परियोजनाएं संधि के प्रावधानों का पूरी तरह से अनुपालन करती हैं। संधि ने पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब के जल का उपयोग करने की भारत की क्षमता को काफी हद तक सीमित कर दिया था। भले ही ये नदियां भारतीय क्षेत्र से निकलती हों। अब इस दिशा में भारत ने बड़ा कदम उठा लिया है और उसे जल्द से जल्द पूरा करने के लिए कमर कस ली है।

भारत पर क्या आरोप लगा रहा है पाकिस्तान :
पाकिस्तान का आरोप है कि भारत सिंधु जल संधि को हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। पाकिस्तान के कई नेता इस पर आपत्ति जता चुके हैं। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सीनियर नेता शेरी रहमान ने इसे पाकिस्तान के मान्यता प्राप्त जल अधिकारों का उल्लंघन करार दिया है। पाकिस्तान का आरोप है कि सिंधु जल संधि को एकतरफा निलंबित नहीं किया जा सकता है।

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