नॉर्थ गुवाहाटी स्थानांतरण के विरोध में गुवाहाटी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन का भूख हड़ताल आंदोलन
थर्ड आई न्यूज
गुवाहाटी I गुवाहाटी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (GHCBA) ने हाईकोर्ट की प्रधान पीठ को नॉर्थ गुवाहाटी स्थानांतरित करने के सरकारी प्रस्ताव के विरोध में 8 जनवरी से तीन दिवसीय भूख हड़ताल शुरू की है। यह आंदोलन रंगमहल क्षेत्र में प्रस्तावित न्यायिक टाउनशिप के खिलाफ वकीलों के बढ़ते असंतोष का प्रतीक है।
भूख हड़ताल प्रतिदिन छह घंटे के लिए आयोजित की जा रही है, जो सुबह 10 बजे से उज़ान बाज़ार स्थित पुराने हाईकोर्ट भवन के सामने शुरू हुई। यह निर्णय बार एसोसिएशन की हाल ही में हुई एक आपातकालीन असाधारण आम बैठक में पारित प्रस्ताव के बाद लिया गया। आंदोलन का नेतृत्व GHCBA के अध्यक्ष के. एन. चौधरी कर रहे हैं।
राज्य सरकार ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी तट पर स्थित रंगमहल में लगभग 129 बीघा (करीब 42.5 एकड़) क्षेत्र में एक न्यायिक टाउनशिप के तहत नया हाईकोर्ट परिसर बनाने की योजना पर काम कर रही है। इस परियोजना का 11 जनवरी को भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा शिलान्यास प्रस्तावित है, लेकिन बार एसोसिएशन ने इस कार्यक्रम के बहिष्कार का फैसला किया है।
एक बयान में GHCBA ने भूख हड़ताल को अपने विरोध का “शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीका” बताया। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि उसकी सामान्य सभा ने विचार-विमर्श के बाद एक बार फिर हाईकोर्ट की प्रधान पीठ को केंद्रीय गुवाहाटी से हटाने के विरोध में अपना पुराना रुख दोहराया है। यह रुख पहले पारित प्रस्तावों और अधिवक्ताओं के बीच कराए गए जनमत संग्रह में भी सामने आ चुका है।
बार एसोसिएशन ने सभी अधिवक्ताओं से सामूहिक निर्णय का सम्मान करते हुए शिलान्यास कार्यक्रम में भाग न लेने की अपील की है। भूख हड़ताल 10 जनवरी और 12 जनवरी को भी जारी रहेगी।
गौरतलब है कि असम कैबिनेट ने पिछले वर्ष नवंबर में न्यायिक टाउनशिप के पहले चरण के निर्माण के लिए 479 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी। सरकार का तर्क है कि यह स्थानांतरण ब्रह्मपुत्र रिवरफ्रंट विकास योजना का हिस्सा है, जिसके लिए उज़ान बाज़ार स्थित हाईकोर्ट की भूमि की आवश्यकता है।
वर्तमान में गुवाहाटी हाईकोर्ट एक ऐतिहासिक भवन और कुछ वर्ष पूर्व निर्मित आधुनिक बहुमंज़िला परिसर से संचालित होता है। महात्मा गांधी रोड के दोनों ओर स्थित ये दोनों इमारतें एस्केलेटर युक्त भूमिगत सुरंग से जुड़ी हुई हैं।
GHCBA का कहना है कि हाईकोर्ट को स्थानांतरित करने से वादकारियों और अधिवक्ताओं को भारी असुविधा होगी। एसोसिएशन ने सभी हितधारकों और आम जनता के हित में परियोजना को तत्काल रोकने की मांग की है।


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