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गौहाटी हाईकोर्ट को रंगमहल स्थानांतरित करने के प्रस्ताव पर बार एसोसिएशन का तीखा विरोध, किया प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन

थर्ड आई न्यूज

गुवाहाटी I गौहाटी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने सोमवार को असम सरकार द्वारा गौहाटी हाईकोर्ट को उत्तर गुवाहाटी के रंगमहल क्षेत्र में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव पर कड़ा ऐतराज़ जताया। एसोसिएशन का आरोप है कि यह निर्णय बिना किसी परामर्श, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संवाद के लिया गया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि देवजीत लोन सैकिया, जो स्थानांतरण के समर्थन में बयान दे रहे हैं, बार एसोसिएशन के सदस्य नहीं हैं। एसोसिएशन ने कहा, “वे क्या कहते हैं या नहीं कहते, उससे हमारा कोई सरोकार नहीं है। इस विषय में वे किसी कानूनी विशेषज्ञ की तरह नहीं, बल्कि सरकार के प्रवक्ता की तरह व्यवहार कर रहे हैं।”

बार एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि सरकार वकीलों को अंधेरे में रखकर इस योजना को आगे बढ़ा रही है। सरकार द्वारा यह दावा किए जाने पर कि एडवोकेट जनरल ने तीन बार चर्चा के लिए आमंत्रण भेजा था, एसोसिएशन ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। सदस्यों ने कहा, “हमें ऐसा कोई निमंत्रण कभी नहीं मिला।”

मौजूदा हाईकोर्ट परिसर में जगह की कमी के सरकारी तर्क पर प्रतिक्रिया देते हुए एसोसिएशन ने कहा कि वर्तमान भवन में तीन अतिरिक्त मंज़िलें बनाने का प्रावधान मौजूद है। साथ ही, वकीलों ने स्थान की समस्या के समाधान के लिए कई वैकल्पिक सुझाव भी दिए हैं।

एसोसिएशन ने मौजूदा हाईकोर्ट भवन के ऐतिहासिक और विरासत महत्व पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि मंदिरनुमा संरचना वाले इस भवन की ऐतिहासिक पहचान को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया, “यदि यह क्षेत्र वास्तव में अनुपयुक्त है, तो इसके ठीक बगल में 10 मंज़िला इमारतें कैसे बनाई जा रही हैं?”

सरकार के इस दावे पर कि सभी वकीलों ने स्थानांतरण के पक्ष में मतदान किया है, एसोसिएशन ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “क्या सरकार को सत्ता में आने के लिए 100 प्रतिशत वोट मिले थे? उसे मुश्किल से 37 प्रतिशत वोट मिले थे। ऐसे तर्क भ्रामक हैं।” एसोसिएशन ने सार्वजनिक विज्ञापनों में झूठे दावे किए जाने का भी आरोप लगाया।

शिलान्यास समारोह को लेकर एसोसिएशन ने कहा कि यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, “असम भर में सैकड़ों ऐसे शिलान्यास पत्थर पड़े हैं, जिन पर कभी निर्माण नहीं हुआ। यह भी उन्हीं में से एक हो सकता है।” उन्होंने सवाल उठाया कि निर्माण कार्य और विरोध एक साथ कैसे चल सकते हैं—“क्या यह मज़ाक है?”

एसोसिएशन ने कहा कि उनसे कभी यह नहीं पूछा गया कि उन्हें इस पर कोई आपत्ति है या नहीं। “वकील केवल हाईकोर्ट का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि समाज का भी अभिन्न अंग हैं और जनहित में काम करते हैं,” उन्होंने कहा।

बार एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि इस निर्णय में लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी की गई। न तो वकीलों को और न ही बार एसोसिएशन को पहले से सूचित किया गया। “कोई परामर्श नहीं, कोई संवाद नहीं, विचारों का कोई आदान-प्रदान नहीं हुआ,” उन्होंने कहा।

पार्किंग की समस्या को भी स्थानांतरण का कारण बताने को एसोसिएशन ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “पार्किंग की समस्या केवल यहां नहीं, बल्कि गुवाहाटी, कोलकाता और अन्य बड़े शहरों में भी है।”

अपने विरोध को “अनावश्यक” बताए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए एसोसिएशन ने कहा कि उनके खिलाफ झूठी कहानियाँ गढ़ी जा रही हैं, जिससे जनता को गुमराह किया जा रहा है।

बार एसोसिएशन के महासचिव अपूर्ब शर्मा ने कहा कि वकीलों को कभी चर्चा के लिए नहीं बुलाया गया। “हमें केवल तब जानकारी दी गई, जब निर्णय पहले ही ले लिए गए थे और हमसे उन्हें स्वीकार करने की अपेक्षा की गई,” उन्होंने कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर वकीलों का कोई राजनीतिक एजेंडा या निजी स्वार्थ नहीं है।

उन्होंने कहा, “सरकार द्वारा एकतरफा निर्णय थोपे जाने से हम बेहद आहत हैं। यदि हमारी चिंताओं का तार्किक समाधान संवाद के माध्यम से किया जाए, तो हम मुस्कान के साथ रंगमहल जाने को तैयार हैं। हम भी विकास चाहते हैं, लेकिन विकास एकतरफा फैसलों से नहीं हो सकता।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि मौजूदा स्थान पर कहीं कम लागत में समान विकास संभव है और सरकार से अपने दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।

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