“कांग्रेस की निष्क्रियता से रेजाउल हीरो बन गया”: गौरव गोगोई पर सीएम हिमंत विश्व शर्मा का तंज
थर्ड आई न्यूज
गुवाहाटी I असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बुधवार, 14 जनवरी को लोकसभा सांसद एवं असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) के अध्यक्ष गौरव गोगोई पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पूर्व अल्पसंख्यक नेता रेजाउल करीम सरकार से जुड़े विवाद को संभालने में कांग्रेस नेतृत्व ने नैतिक कमजोरी और राजनीतिक अवसरवादिता दिखाई।
रेजाउल करीम सरकार के विवादास्पद बयानों और उसके बाद कांग्रेस से उनके बाहर होने पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री शर्मा ने आरोप लगाया कि गौरव गोगोई आवश्यक राजनीतिक साहस का परिचय देने में विफल रहे और समय पर कड़ा अनुशासनात्मक कदम नहीं उठा सके। मुख्यमंत्री के अनुसार, सामाजिक सौहार्द और जनसांख्यिकीय संतुलन को खतरे में डालने वाले बयानों के लिए सरकार को तत्काल पार्टी से बहिष्कृत या निष्कासित किया जाना चाहिए था।
कांग्रेस की भूमिका पर कटाक्ष करते हुए शर्मा ने कहा कि पार्टी की निष्क्रियता ने सरकार की राजनीतिक छवि को और ऊंचा कर दिया। उन्होंने कहा, “गौरव गोगोई में रेजाउल करीम को निकालने का साहस नहीं था। अब खुद इस्तीफा देकर रेजाउल हीरो बन गया है।” मुख्यमंत्री ने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस के कई नेता राजनीतिक रूप से उनके लिए काम कर रहे हैं और यदि कोई उनके नेतृत्व के साथ आना चाहे तो उन्हें “खुशी” होगी।
यह विवाद 11 जनवरी से जुड़ा है, जब ऑल असम माइनॉरिटीज स्टूडेंट्स यूनियन (AAMSU) के पूर्व अध्यक्ष रेजाउल करीम सरकार ने गुवाहाटी के मानबेंद्र शर्मा कॉम्प्लेक्स में आयोजित एक कार्यक्रम में औपचारिक रूप से कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की थी। इस दौरान APCC अध्यक्ष गौरव गोगोई भी मौजूद थे और इसे 2026 के असम विधानसभा चुनावों से पहले अल्पसंख्यक युवाओं को साधने की कांग्रेस की रणनीति के रूप में पेश किया गया था।
हालांकि, इस राजनीतिक कदम के साथ जुड़ा संदेश जल्द ही विवादों में घिर गया। शामिल होने के कार्यक्रम के दौरान सरकार ने “बोर असम” या “ग्रेटर असम” की अवधारणा के तहत कई जिलों को एक-दूसरे में बदलने की बात कही। उन्होंने कहा था, “हम शिवसागर को धुबरी जैसा बनाएंगे, धुबरी को शिवसागर बनाएंगे, बराक को शिवसागर जैसा और तिनसुकिया को धुबरी में बदल देंगे।” इन बयानों को आलोचकों ने असम की जनसांख्यिकीय और सांस्कृतिक पहचान को बदलने की कोशिश के रूप में देखा।
इन टिप्पणियों के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। मुख्यमंत्री शर्मा ने आरोप लगाया कि गौरव गोगोई भाषण के दौरान मूकदर्शक बने रहे और चेतावनी दी कि इस तरह के बयान खतरनाक सोच को बढ़ावा देते हैं, जो बांग्लादेशी मूल के प्रवासियों को स्वदेशी बहुल क्षेत्रों में बसाने का संकेत देते हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई इस तरह की टिप्पणी उनकी मौजूदगी में करता, तो उसे तुरंत बाहर कर दिया जाता।
विपक्षी दलों और क्षेत्रीय संगठनों ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। रायजर दल के प्रमुख और शिवसागर विधायक अखिल गोगोई ने सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की किसी भी कोशिश का कड़ा विरोध करने की चेतावनी दी। लखीमपुर और आमगुरी सहित राज्य के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए, जहां बीर लचित सेना और असमिया युवा मंच जैसे संगठनों ने प्रदर्शन कर सरकार का पुतला जलाया और कड़ी राजनीतिक जवाबदेही की मांग की।
लगातार बढ़ते दबाव और जनाक्रोश के बीच अंततः रेजाउल करीम सरकार ने कांग्रेस से किनारा कर लिया, जिससे जिस राजनीतिक रणनीतिक कदम के रूप में उनकी एंट्री को देखा जा रहा था, उसका समय से पहले ही अंत हो गया। यह पूरा प्रकरण अब 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखे राजनीतिक टकराव का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।


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