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PM Modi Live: ‘दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के करीब भारत’, धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब दे रहे पीएम

थर्ड आई न्यूज

नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी धन्यवाद प्रस्ताव पर धन्यवाद प्रस्ताव पर राज्यसभा को संबोधित कर रहे हैं। विपक्षी की जोरदार नारेबाजी के बीच उन्होंने कहा, धन्यवाद प्रस्ताव पर समर्थन के लिए इस सदन में अपनी भावनाओं को व्यक्त करना मैं अपना सौभाग्य मानता हूं। देश आज तेज प्रगति कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा, मेरी एक प्रार्थना है। आदरणीय खरगे जी की उम्र को देखते हुए, अगर वे बैठकर भी नारे बोलना चाहें तो बोल सकते हैं। पीछे कई सारे युवा नेता हैं। उन्होंने कहा, राष्ट्रपति जी ने देश के मध्यम वर्ग, इस देश के निम्न-मध्यम वर्ग, गरीब, गांव, किसान, महिलाएं, विज्ञान हो, प्रौद्योगिकी हो, बहुत ही विस्तार से भारत के प्रगति का एक स्वर संसद में गूंजा है। देश के नौजवान भारत के सामर्थ्य को कैसे आगे बढ़ा रहे हैं, इसकी भी विस्तार से चर्चा की गई है। राष्ट्रपति जी ने भारत के उज्ज्वल भविष्य के प्रति भी विश्वास व्यक्त किया है। यह हम सबके लिए प्रेरक है।

उन्होंने कहा, पिछली शताब्दी में भारत की आजादी की जंग में दूसरा क्वार्टर बहुत ही निर्णायक बना था। मैं साफ देख रहा हूं कि विकसित भारत के निर्माण की दिशा में यह दूसरा क्वार्टर भी उतना ही सामर्थ्यवान होने वाला है और उतना ही तेजी से आगे बढ़ने वाला है। राष्ट्र का हर व्यक्ति यह महसूस कर रहा है कि एक अहम पड़ाव पर हम पहुंच चुके हैं। न हमें रुकना है, न हमें पीछे मुड़कर देखना है। हम आगे ही आगे देखना है और लक्ष्य को प्राप्त कर के ही हमें सांस लेनी है। उस दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं।

पीएम मोदी ने खरगे की उम्र को लेकर कसा तंज :
प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे की उम्र को लेकर भी तंज कसा। उन्होंने कहा, आदरणीय खरगे जी की उम्र को देखते हुए, अगर वे बैठकर भी नारे बोलना चाहें तो बोल सकते हैं। पीछे कई सारे युवा नेता हैं।

‘युवा होता जा रहा हमारा देश’ :
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने आगे कहा, वर्तमान में हम देखें तो भारत के भाग्य के अनेक संयोग एक साथ हमें नसीब हुए हैं। ये अपने आप में बहुत ही उत्तम संयोग है। सबसे बड़ी बात है कि विश्व के समृद्ध से समृद्ध देश भी बुजुर्ग होते जा रहे हैं। वहां की आबादी उम्र के उस पड़ाव पर पहुंची है, जिन्हें हम बुजुर्ग के रूप में जानते हैं। हमारा देश ऐसा है, जो विकास की नई ऊंचाइयां छू रहा है, वैसे ही देश हमारा युवा होता जा रहा है। युवा आबादी वाला देश बनता जा रहा है।

भारत के प्रति बढ़ा दुनिया का आकर्षण :
उन्होंने कहा, दूसरी तरफ मैं देख रहा हूं जिस प्रकार विश्व का भारत के प्रति आकर्षण बढ़ा है। विश्व भारत के टैलेंट का महत्व समझ रहा है। हमारे पास आज दुनिया का बहुत ही अहम टैलेंट पूल है। युवा टैलेंट पूल है, जिसके पास सपने, संकल्प और सामर्थ्य है। यानी शक्ति का आशीर्वाद हमारे साथ है।

‘दुनिया की चुनौतियों को समाधान दे रहा भारत’ :
प्रधानमंत्री ने कहा, भारत आज विश्व में जो चुनौतियां पैदा हो रही हैं, उनका समाधान देने वाला देश, आशा की किरण देने वाला दे बना हुआ है और हम समाधान दे रहे हैं। आज अहम अर्थव्यवस्थाओं में भारत का ग्रोथ काफी ऊंचा है। ऊंची विकास दर और कम महंगाई एक अनोखी उपलब्धि है।

भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या बोले पीएम मोदी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 2014 में जब हम सत्ता में आए, जब देश आजाद हुआ, तब देश छठी नंबर की अर्थव्यवस्था था। आज हम दुनिया की तीसरे नंबर की अर्थव्यवस्था बनने के करीब हैं।
उन्होंने कहा कि आज भारत हर क्षेत्र में एक आत्मविश्वास के साथ बढ़ रहा है। कोविड के बाद जो स्थितियां पैदा हुईं, आज दुनिया संभल नहीं पा रही है।
उन्होंने आगे कहा कि स्पष्ट समझ आ रहा है कि दुनिया एक नई विश्व व्यवस्था की तरफ बढ़ रही है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद एक विश्व व्यवस्था बनी थी। अब एक नए विश्व व्यवस्था की तरफ देश बढ़ रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि सारी वर्तमान घटनाओं का अराजनीतिक तरीके से विश्लेषण करेंगे तो झुकाव भारत की तरफ होगा। विश्व बंधु के तौर पर आज भारत दुनिया के कई देशों का भरोसेमंद साझेदार बना है। हम कंधे से कंधा मिलाकर विश्व कल्याण की दिशा में बढ़ रहे हैं।

यूरोपीय संघ के साथ एफटीए पर क्या कहा?
उन्होंने कहा, आज पूरा विश्व वैश्विक दक्षिण की चर्चा करता है, लेकिन उस चर्चा के सूत्रधार के रूप में आज भारत वैश्विक मंचों पर वैश्विक दक्षिण की बुलंद आवाज बन गया है। अनेक देशों के साथ आज भारत फ्यूचर रेडी ट्रेड डील कर रहा है। पिछले कुछ ही समय में दुनिया के अहम नौ बड़े ट्रेड डील हुए हैं। उसमें मदर ऑफ ऑल ट्रे़ड डील (एक साथ 27 देशों के साथ) यूरोपीय संघ के साथ हुई।

प्रधानमंत्री ने कहा, जो लोग थक गए, बेचारे चले गए। लेकिन इनको जवाब देना पड़ेगा कि देश की ऐसी हालत कैसे बना रखी थी कि दुनिया का कोई देश हमसे समझौता करने नहीं आना चाहते थे। आपने कोशिश की होगी, लेकिन कोई आपके साथ नहीं आना चाहता था। दुनिया के देश अब भारत के साथ ऐसे ही डील नहीं कर रहे हैं। इसके पीछे एक वजह यह है कि विकसित देश विकासशील देश के साथ डील करता है तो उसे बड़ा बाजार मिलता है। मेरे लिए यह नई बात नहीं है, जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था, तब वाइब्रेंट गुजरात समित करता था। तब इस वाइब्रेंट समिट में राज्य का पार्टनर एक देश- जापान हुआ करता था। यह राज्य के लिए एक गर्व की बात थी।

‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रॉसफॉर्म पर जोर दिया’ :
उन्होंने कहा, हमारी काफी शक्ति उनकी गलतियों को ठीक करने में जा रही है। दुनिया के मन में उनके समय की जो छवि है उसको धोने में मेरी ताकत लगती है। इस काम के लिए हमने फ्यूचर रेडी पॉलिसी पर बल दिया है। देश नीति के आधार पर चल रहा है। विश्व का विश्वास बन रहा है। हमने रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रॉसफॉर्म पर जोर दिया और आज देश रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार हो चुका है।

‘एमएसएमई नेटवर्क पर बन रहा दुनिया का भरोसा’ :
उन्होंने कहा, आज दुनिया हमारे उद्यमियों को समानता के रूप से देखती है। एमएसएमई का बहुत बड़ा नेटवर्क, जितना सामर्थ्यवान होता है वह देश की अर्थव्यवस्था को दिशा देता है। आज हमारे एमएसएमई नेटवर्क पर दुनिया का भरोसा बन रहा है। हम हवाई जहाज नहीं बनाते, लेकिन उसके कई छोटे पुर्जे हमारे देश के एमएसएमई बना रहे हैं। देश के इन्हीं प्रयासों का नतीजा सबके सामने है। बड़े देश भारत के साथ व्यापारिक संबंध बनाने के लिए आतुर हैं। यूरोपीय संघ का ट्रेड डील हो या अमेरिका के साथ हुआ डील। पूरा विश्व खुल कर के इस ट्रेड डील की तारीफ कर रहा है। उसमें यूरोपीय संघ के साथ जब डील हुआ तो विश्व को भरोसा हुआ कि वैश्विक स्तर पर स्थिरता की संभावना बढ़ेगी। अमेरिका के साथ ट्रेड डील से दुनिया को भरोसा हुआ कि जो स्थिरता का भरोसा था, वह गति का भी भरोसा बन गया।

प्रधानमंत्री ने कहा, आज दुनिया हमारे उद्यमियों को समानता के रूप से देखती है। एमएसएमई का बहुत बड़ा नेटवर्क, जितना सामर्थ्यवान होता है वह देश की अर्थव्यवस्था को दिशा देता है। आज हमारे एमएसएमई नेटवर्क पर दुनिया का भरोसा बन रहा है। हम हवाई जहाज नहीं बनाते, लेकिन उसके कई छोटे पुर्जे हमारे देश के एमएसएमई बना रहे हैं। देश के इन्हीं प्रयासों का नतीजा सबके सामने है। बड़े देश भारत के साथ व्यापारिक संबंध बनाने के लिए आतुर हैं। यूरोपीय संघ का ट्रेड डील हो या अमेरिका के साथ हुआ डील। पूरा विश्व खुल कर के इस ट्रेड डील की तारीफ कर रहा है। उसमें यूरोपीय संघ के साथ जब डील हुआ तो विश्व को भरोसा हुआ कि वैश्विक स्तर पर स्थिरता की संभावना बढ़ेगी। अमेरिका के साथ ट्रेड डील से दुनिया को भरोसा हुआ कि जो स्थिरता का भरोसा था, वह गति का भी भरोसा बन गया।

उन्होंने आगे कहा, इसका सबसे बड़ा लाभ देश के नौजवानों को होगा। जिस प्रकार से दुनिया में हमारे युवा पेशेवर, यहां तक कि केयरगिवर्स की मांग बढ़ रही है। कुछ लोग तो यहां विशेष दफ्तर बना रहे हैं ताकि लोगों की खोज कर सकें। इसका मतलब है कि भारत के पेशेवरों के लिए विश्व में अवसर बन रहे हैं। यह संसद का उच्च सदन, राज्यों का प्रतिनिधित्व करता है। जो चर्चा की बारीकियां मैंने देखी हैं, मेरा मन कहता है कि इसका स्तर ऊपर होना था। लेकिन उन्होंने (विपक्ष ने) यह मौका भी गंवा दिया।

‘महिलाओं पर अत्याचार के मुद्दे पर आंखें मूंदकर बैठे हैं लोग’ :
प्रधानमंत्री ने कहा, उनके लिए महिलाओं पर अत्याचार होता है तो होते रहे, सत्ता नीति के अलावा कुछ करना नहीं है। वे हमें यहां उपदेश दे रहे हैं। ऐसे मुद्दों पर आंखें मूंदकर बैठे हुए लोग हैं। एक हमारे माननीय सदस्य यहां बैठे बोल रहे थे। जिनकी सरकार शराब में डूब गई, जिनका शीशमहल हर एक की आंखों में बैठ गए। ऐसे सभी साथियों से मैं कहूंगा कि तुम कितना दुनिया को धोखा दोगे, आईना देख लिया तो अपनी सच्चाई कहां छिपाओगे।

उन्होंने कहा, कांग्रेस हो, टीएमसी हो, डीएमके हो, लेफ्ट हो, ये दशकों से केंद्र में सत्ता में रहे हैं। सत्ता के भागीदार रहे हैं। राज्यों में भी उन्हें सरकार चलाने का अवसर मिला है। लेकिन उनकी पहचान क्या बनी है। आज डील की चर्चा होती है तो गर्व से कहते हैं, तब बोफोर्स डील याद आता था। उन्होंने सिर्फ जेब भरने का काम किया। नागरिकों की जिंदगी में बदलाव उनकी प्राथमिकता नहीं थी।

‘पीएसयू को लेकर मानसिकता बदलने में मिली सफलता’ :
उन्होंने कहा, हमने एनपीए, जिसके पहाड़ हुआ करते थे आज हमने उसे नीचे खड़ा कर दिया। आज एनपीए एक फीसदी से भी नीचे है। यह अपने आप में बैंकों के स्वास्थ्य के लिए उत्तम काम किया है। हमारे पीएसयू के बारे में यह मान्यता बन चुकी थी कि वे बनते ही हैं, बीमार होने के लिए, बंद होने के लिए। हमने पूरी मानसिकता को बदलने में सफलता प्राप्त की है। ये लोग पीएसयू को लेकर कितनी गलत बातें फैलाते रहे। यह अर्बन नक्सल की तरह पीएसयू के बाहर मजदूरों को भड़काने-गुमराह करने का काम करते थे। इन्होंने स्टेट बैंक, एलआईसी, एचएएल को भद्दे तरीके से संभाला। वे अपनी सरकार में इन्हें संभाल नहीं पाते थे। लेकिन हमने पीएसयू के लिए रिफॉर्म्स किए।

उन्होंने कहा, जिन पीएसयू को कांग्रेस के नेता ताले लगवाने वाले थे, उसी पर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकते थे, आज हमारे वही पीएसयू रिकॉर्ड लाभ में हैं। वे अपने प्रदर्शन से मेक इन इंडिया को भी गति दे रहे हैं। वे एक कैटालिस्ट एजेंट के रूप में भूमिका निभा रहे हैं। रिकॉर्ड रोजगार दे रहे हैं। विश्व में अपनी ताकत दिखा रहे हैं। दुनिया के कई देशों की विकास यात्रा में भागीदार बन रहे हैं। आज हमारे पीएसयू को दुनियाभर से कई ऑर्डर मिलने लगे हैं।

किसानों के मुद्दे पर पीएम मोदी ने क्या कहा?
पीएम मोदी ने कहा, कांग्रेस ने विश्वासघात करने के विषय में भी हमारे देश के अन्नदाता को भी नहीं छोड़ा। इस देश में 10 करोड़ किसान ऐसे हैं, जिनके पास दो हेक्टेयर से कम जमीन है। छोटे किसान हैं, उनकी तरफ कभी नहीं देखा गया। न ही उनके दिमाग में छोटे किसान का कोई महत्व था। उन्हें लगता था कि कुछ बड़े लोगों को संभाल लिया तो राजनीति चलती रहेगी। हमारे मन में छोटे किसानों के लिए दर्द था। हम जमीनी हकीकत से परिचित थे। इसलिए हम किसान सम्मान निधि लेकर आए। हमने अब तक 4 लाख करोड़ रुपये छोटे किसानों को दिया है। इससे उन्हें नए सपने देखने का सामर्थ्य मिला है।

उन्होंने कहा, यहां कुछ साथियों ने इंप्लिमेंटेशन की शिकायतों को लेकर काफी भाषण दिए हैं। ये जो इतनी बड़ी बातें करते हैं। मैं एक किस्सा सुनाता हूं- “हमारे देश के एक नेता हिमाचल प्रदेश के दौरे पर थे। और वहां से आने के बाद उन्होंने खुद ने ये घटना कहीं सुनाई। रिकॉर्ड पर उपलब्ध है। उन्होंने कहा- काफी लंबे समय तक मुझे योजना आयोग से संघर्ष करना पड़ा है। क्योंकि वे पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अलग योजनाएं बनाने के लिए तैयार ही नहीं थे। मैं हिमाचल प्रदेश गई थी, जब मैं वापस आई तो मैंने योजना आयोग में कहा कि हमारे कामदारों को जीप की जरूरत नहीं है, बल्कि खच्चरों की आवश्यकता है, ताकि उन पर सामान आदि लादा जा सके। लेकिन मुझे बताया गया कि हम पैसा तो जीप के लिए ही देंगे, क्योंकि खच्चरों के लिए पैसा देने की पॉलिसी नहीं है। उन नेता का कहना था कि जहां वो हिमाचल में गई थीं, वहां सड़क नहीं थी। तो वहां जीप का क्या काम लेकिनन उस वक्त योजना आयोग का जोर था कि या तो जीप या कुछ नहीं। यह भाषण और किसी का नहीं कांग्रेस की तत्कालीन नेता इंदिरा गांधी का भाषण है।”

उन्होंने कहा, कांग्रेस की यही कार्यशैली रही थी। खुद इंदिरा गांधी जी यह जानती थीं लेकिन इस कार्यशैली को बदलने के लिए उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया। वे जिस प्लानिंग कमीशन की धज्जियां उड़ा रही थीं, उसके जन्मदाता उनके खुद के पिताजी थे। 2014 तक सब दुखी थे, सब परेशान थे। लेकिन कोई तैयार नहीं था सुधार को। इसके बाद जब हमें 2014 में मौका मिला तो हमने प्लानिंग कमीशन को खत्म किया और नीति आयोग की स्थापना हुई। नीति आयोग आज काफी तेज काम कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा, छत्तीसगढ़ के बस्तर में तो कुछ गांवों ने पहली बार बस देखी। यह हाल छोड़कर गए हैं। इंप्लीमेंटेशन क्या होता है, यह एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट इसका उदाहरण है। कांग्रेस के हमारे साथियों को यह जो बदलाव आ रहा है, उसमें इंप्लीमेंटेशन नहीं आ रहा है। इनका जीप और खच्चर वाला मॉडल ही ये लोग जानते हैं। ये लोग उसे कैसे इंप्लीमेंट करते हैं। जब मेरा जन्म नहीं हुआ था, तब सरदार पटेल ने नर्मदा नदी पर बांध बांधने की कल्पना की। नेहरू जी ने इसकी नींव रख दी थी। लेकिन इनका इंप्लीमेंटेशन देखिए कि मैंने प्रधानमंत्री बनने के बाद इसका उद्घाटन किया। मुझे मुख्यमंत्री रहते हुए तीन दिन का अनशन करना पड़ा तब सरकार झुकी और सरदार सरोवर का काम आगे बढ़ा और मैंने यहां (पीएम) आकर उसका उद्घाटन किया।

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