स्व. नन्दकिशोर माहेश्वरी के नाम पर डेली मार्केट भवन, लखीमपुर में हर्ष और गौरव का वातावरण
थर्ड आई न्यूज
लखीमपुर से बाबू देव पांडे
लखीमपुर में स्वर्गीय नन्दकिशोर माहेश्वरी के नाम से “नन्दकिशोर माहेश्वरी टाउन डेली मार्केट भवन” के नामकरण से स्थानीय समाज में हर्ष और गौरव का वातावरण है। इस महत्वपूर्ण परियोजना की आधारशिला कल स्थानीय विधायक मानव डेका द्वारा रखी गई।
इस गरिमामय अवसर पर नगर पालिका के कार्यकारी अधिकारी एवं चेयरमैन, जिला उपायुक्त, जिला वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्राणवजीत काकोटी सहित अनेक गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में स्व. माहेश्वरी के सामाजिक और सांस्कृतिक योगदान को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
स्वर्गीय नन्दकिशोर माहेश्वरी एक प्रतिष्ठित पत्रकार, प्रख्यात नाट्यकार, समाजसेवी, साहित्यकार और लेखक थे। उन्होंने लखीमपुर नगर को सांस्कृतिक पहचान देने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। कुलीमाली नामघर, नौका के स्वरूप में निर्मित गणेश मंदिर (पार्क सहित), शिवलिंग के आकार का शिव मंदिर, सरोवर के मध्य स्थित दुर्गा मंदिर तथा गौगामुख मंदिर जैसे अनेक धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थल उनके दूरदर्शी चिंतन और अद्भुत कला-बोध के जीवंत उदाहरण हैं।
विशेष बात यह है कि इन सभी स्थलों की वास्तुशिल्पीय संकल्पना स्वयं स्व. माहेश्वरी ने की थी। इसी कारण ये स्थल आज लखीमपुर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए आकर्षण और दर्शनीय केंद्र बन चुके हैं।
वे एक सक्रिय पत्रकार भी रहे और लखीमपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष पद का दायित्व उन्होंने सफलतापूर्वक निभाया। इसके साथ ही असम प्रेस कॉरेस्पॉन्डेंट यूनियन के लखीमपुर जिला अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सन् 1976 में स्थापित हिंदी विद्यालय (उत्तर लखीमपुर लीलावती बरदलै हिंदी हाई स्कूल) उस समय अत्यंत नाजुक स्थिति में था। स्व. कैलाश पांडेय, देवेंद्र कुमार पांडेय सहित अन्य लोगों के आग्रह पर स्व. माहेश्वरी ने विद्यालय की कार्यकारिणी समिति का नेतृत्व करते हुए सचिव की जिम्मेदारी संभाली। वे विद्यालय को आदर्श शैक्षणिक संस्था के रूप में विकसित करना चाहते थे, किंतु तत्कालीन अध्यक्ष का अपेक्षित सहयोग न मिलने के कारण उनका यह सपना अधूरा रह गया। बाद में वे समिति से अलग हो गए। आज यह विद्यालय अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है। यदि हिंदीभाषी समाज मिलकर इसे पुनः सशक्त बनाए, तो यह स्व. माहेश्वरी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
स्थानीय समाज में उनकी गहरी पैठ थी और उन्हें असम की सांस्कृतिक चेतना के अग्रदूत ज्योतिप्रसाद अग्रवाल की परंपरा में देखा जाता है। समाज की सर्वोच्च संस्था पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी सम्मेलन उनके योगदान को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से अपने द्विवार्षिक प्रांतीय अधिवेशन में “स्व. नन्दकिशोर माहेश्वरी साहित्य पुरस्कार” प्रदान करता आ रहा है, जो साहित्य एवं सांस्कृतिक समन्वय के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले साहित्यकार को दिया जाता है।
आज उनकी पुण्य स्मृति में डेली मार्केट भवन का नाम “नन्दकिशोर माहेश्वरी टाउन डेली मार्केट” रखा जाना और इस नामकरण का प्रस्ताव स्वयं स्थानीय समाज द्वारा दिया जाना, न केवल उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है, बल्कि उनके सामाजिक-सांस्कृतिक अवदानों की स्थायी मान्यता भी है।


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