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अमेरिका-इस्राइल का ईरान से युद्ध: एक हफ्ते में क्या हुआ, क्या कोई जीत के करीब; कितना लंबा चल सकता है संघर्ष?

थर्ड आई न्यूज

नई दिल्ली I अमेरिका और इस्राइल की तरफ से बीते हफ्ते शनिवार को ईरान पर हमले हुए। इसके जवाब में तेहरान की तरफ से पलटवार किया गया। इस संघर्ष में मानवीय नुकसान के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। इसके कूटनीतिक और रणनीतिक परिणाम भी दिखने लगे हैं।

ऐसे में यह जानना अहम है कि 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में बीते सात दिनों में स्थितियां किस तरह बदली हैं? हर दिन युद्ध में कैसे लगातार नए आयाम जुड़े हैं? अब तक जो संघर्ष हुआ है, उसमें किस पक्ष के पास बढ़त है? अगर यह संघर्ष मौजूदा रफ्तार से ही चलता रहा तो यह कितने दिन तक चल सकता है? आइये जानते हैं…

अमेरिका-इस्राइल के ईरान से संघर्ष के बीते सात दिन
28 फरवरी: पहला दिन
अमेरिका-इस्राइल ने ईरान पर हमला बोला। अमेरिका ने इस अभियान को ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ का नाम दिया। इस्राइल ने अपने ऑपरेशन को ‘रोरिंग लायन’ करार दिया। पहले दिन इसमें 100 से ज्यादा लड़ाकू-सैन्य विमानों और भारी मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। इन हमलों में सरकारी इमारतों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया और एक हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई।

इसी दिन ईरान के मीनाब शहर में एक प्राथमिक विद्यालय पर हुए मिसाइल हमले में 165 बच्चियों की जान चली गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हमला कथित तौर पर अमेरिकी सेना की तरफ से किया गया था। इसके जवाब में ईरान ने इस्राइल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित दुबई के पर्यटन क्षेत्रों को निशाना बनाया। इन जगहों पर बड़ी संख्या में मिसाइलें और ड्रोन दागे गए।

1 मार्च: दूसरा दिन
दूसरे दिन दोनों पक्षों के बीच युद्ध और तेज हो गया। अमेरिका ने दावा किया कि उसने ईरान के नौ नौसैनिक जहाजों को डुबा दिया और ईरान के नौसेना मुख्यालय और अर्धसैनिक बल- इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के मुख्यालय को आंशिक रूप से नष्ट कर दिया।

इसी दिन ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत में एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ड्रोन हमला किया, जिसमें 6 अमेरिकी सैनिक मारे गए। इसके अलावा, इस्राइल के बेत शेमेश शहर पर ईरानी मिसाइल गिरने से 9 लोगों की मौत हो गई।

2 मार्च: तीसरा दिन
लेबनान से हिजबुल्ला ने इस्राइल पर मिसाइलें दागीं, जिसके बाद यह युद्ध लेबनान तक फैल गया। इस्राइल ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर भारी हवाई हमले किए, जिसमें 31 लोग मारे गए।

दूसरी तरफ ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाते हुए सऊदी अरब की रास तनुरा रिफाइनरी पर हमला किया।

इसी बीच, कुवैत में एक कथित फ्रेंडली फायरिंग की एक घटना में अमेरिका के तीन एफ-15 लड़ाकू विमान गिरा दिए गए, हालांकि पायलट सुरक्षित बच गए। कहा गया कि कुवैत की ओर से गलती से इन विमानों को गिराया गया। हालांकि, ईरान ने दावा किया कि अमेरिका के यह लड़ाकू विमान उसके हमलों में तबाह हुए हैं।

3 मार्च: चौथा दिन
अमेरिका ने बंकर नष्ट करने वाले हथियारों से लैस बी-2 बॉम्बर तैनात किए और इस्राइल ने ईरान और हिजबुल्ला के ठिकानों पर हमले जारी रखे। एक बड़े रणनीतिक कदम के तहत, ईरान ने वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को बंद कर दिया। वहीं, ईरानी ड्रोन्स ने सऊदी अरब के रियाद और कुवैत में अमेरिकी दूतावासों को निशाना बनाया, जिससे उन्हें अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। दोहा, दुबई, अबू धाबी, बहरीन और कुवैत में कई ईरानी मिसाइलों को हवा में ही नष्ट किया गया।

4 मार्च: पांचवां दिन
ईरान की तरफ से तुर्किये की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को नाटो के एयर डिफेंस ने नष्ट कर दिया। इसी दिन एक बड़ी घटना में अमेरिकी पनडुब्बी ने हिंद महासागर में एक ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस देना को अपनी सबमरीन से टॉरपीडो मारकर डुबा दिया। यह युद्धपोत भारत में एक नौसैनिक अभ्यास से लौट रहा था और श्रीलंका के गॉल के पास था। इस हमले में 87 ईरानी नाविक मारे गए, जबकि कुछ लोगों को बचा लिया गया, जिनका श्रीलंका में ही इलाज चल रहा है। भारतीय नौसेना ने बाद में बताया कि इस रेस्क्यू ऑपरेशन में उसने भी मदद पहुंचाई।

5 मार्च: छठा दिन
युद्ध में पहली बार हवाई संघर्ष देखा गया, जिसमें इस्राइली एफ-35 लड़ाकू विमान ने तेहरान के ऊपर एक ईरानी सुखोई-35 विमान को मार गिराने का दावा किया। युद्धपोत के डूबने का बदला लेने के लिए ईरान ने फारस की खाड़ी में एक अमेरिकी तेल टैंकर पर हमला किया।

इसके अलावा अजरबैजान के नखचिवान एयरपोर्ट पर एक ड्रोन हमला हुआ, जिसमें 4 लोग घायल हुए, हालांकि ईरान ने इस हमले से खुद को अलग कर लिया।

6 मार्च: सातवां दिन
पूरे पश्चिम एशिया में मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रहे। इस्राइल ने ईरान और लेबनान में बड़े पैमाने पर हमलों की एक और लहर शुरू करने की घोषणा की। इसके जवाब में, ईरान ने तेल अवीव के बीचो-बीच ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इससे साफ हो गया कि कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है।

बीते एक हफ्ते के युद्ध के क्या रहे हैं नतीजे, मौजूदा स्थिति क्या?
एक हफ्ते के संघर्ष में ईरान में अब तक कम से कम 1,332 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा लेबनान में 200 से ज्यादा, इस्राइल में 11 और 6 अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के अनुमान के मुताबिक, इस हिंसा के कारण पूरे पश्चिम एशिया में लगभग 3,30,000 लोग विस्थापित हो चुके हैं।
युद्ध के कारण इस्राइल समेत पश्चिम एशिया के 14 देश प्रभावित हुए हैं और यहां ईरानी हमलों में जान-माल का भी नुकसान हुआ है।

दुनियाभर की विमानन कंपनियां 11,000 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर चुकी हैं। इसके चलते अलग-अलग देशों के लोग जहां-तहां फंस गए हैं।

इसके अलावा यूरोप से लेकर एशिया तक कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। फिलहाल यह 10% से ज्यादा उछाल के साथ 91 डॉलर के करीब है।

तो क्या इस संघर्ष में कोई विजेता है?
इस संघर्ष में अभी तक कोई स्पष्ट विजेता नहीं है और युद्ध लगातार बढ़ता जा रहा है।
एक तरफ इस्राइल का दावा है कि उसने ईरान के 80% हवाई रक्षा प्रणालियों को नष्ट करके ईरान के हवाई क्षेत्र पर लगभग पूरी हवाई श्रेष्ठता हासिल कर ली है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में 90% और ड्रोन हमलों में 83% की कमी आई है।

दूसरी ओर, ईरान ने अपने सुप्रीम लीडर खामेनेई और अधिकतर राजनीतिक नेतृत्व को खोने के बावजूद जंग जारी रखी है। ईरान की रणनीति शाहेद-136 जैसे कम लागत वाले ड्रोन्स और मिसाइलों का उपयोग करके इस्राइली एयर डिफेंस नेटवर्क को भारी संख्या से भेदने का रहा है। इसके अलावा वह पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इस्राइल की सेनाओं को कई मोर्चों पर उलझाने में जुटा है। इससे अमेरिका और इस्राइल के लिए युद्ध का खर्च लगातार बढ़ा है और यह संघर्ष लंबी अवधि तक खिंचता दिख रहा है।

आठवें दिन कैसी है संघर्ष की स्थिति?
लगातार हमले और बमबारी: अमेरिका ने 28 फरवरी से अब तक ईरान के 3,000 से अधिक ठिकानों पर हमला किया है और 43 ईरानी युद्धपोतों को नष्ट करने का दावा किया है। शनिवार को इस्राइल ने तेहरान और लेबनान में बमबारी की एक नई बड़ी लहर शुरू की। इसके जवाब में ईरान ने इस्राइल की राजधानी तेल अवीव पर लगातार ड्रोन और मिसाइल हमले जारी रखे हैं।

युद्ध का भू-राजनीतिक विस्तार: यह संघर्ष अब मध्य पूर्व और उसके आसपास के लगभग 14 देशों को प्रभावित कर रहा है। लेबनान की बेका घाटी में हिजबुल्ला के लड़ाके इस्राइली सैनिकों से सीधे संघर्ष कर रहे हैं। इसके अलावा इराक, सऊदी अरब, कतर और कुवैत जैसे देशों में भी मिसाइल और ड्रोन हमले देखे गए हैं।

राजनयिक स्थिति: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग की है और कहा है कि इसके बिना कोई समझौता नहीं होगा। वहीं, ईरान के उप विदेश मंत्री ने चेतावनी दी है कि जो यूरोपीय देश इस्राइल और अमेरिका का साथ देंगे, वे ईरान के वैध लक्ष्य बन जाएंगे। अमेरिका का दावा है कि रूस इस संघर्ष में ईरान को अमेरिकी सैन्य ठिकानों की खुफिया जानकारी प्रदान कर रहा है।

युद्ध में कितना खर्च हो रहा है?
सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) के अनुमान के मुताबिक, अमेरिका के ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के पहले 100 घंटों में ही लगभग 3.7 अरब डॉलर का खर्च हो चुका है। इसका मतलब है कि इस सैन्य अभियान पर प्रतिदिन लगभग 89.1 करोड़ डॉलर का भारी खर्च आ रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस खर्च के लिए पहले से कोई बजट तय नहीं किया गया था।

हथियारों और मिसाइलों की लगातार मांग को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि रक्षा निर्माता हथियारों के उत्पादन को चार गुना करेंगे। प्रत्यक्ष सैन्य खर्च के अलावा युद्ध का वैश्विक आर्थिक प्रभाव भी बहुत बड़ा है।

दूसरी तरफ होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से कच्चे तेल की कीमतों में 10% से अधिक का उछाल आया है और प्राकृतिक गैस की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं। भारत ने स्थितियों को देखते हुए रूस से तेल की खरीद दोबारा बढ़ाई है। हालांकि, पश्चिम एशिया से मिलने वाली गैस की कमी की आशंका को देखते हुए एलपीजी सिलेंडर की कीमतें बढ़ाई गई हैं और दो सिलेंडर मिलने का दायरा भी 15 दिन से बढ़ाकर 21 दिन न्यूनतम कर दिया गया है।

दूसरी तरफ इस्राइल में भी युद्ध के खर्चों को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैंं।

यह संघर्ष कितने दिन चल सकता है?
युद्ध कब तक चलेगा, इसे लेकर अमेरिका के अंदर से ही अलग-अलग और जटिल संकेत मिल रहे हैं। दूसरी तरफ ईरान का साफ कहना है कि वह दूसरे पक्ष की ओर से कार्रवाई रुकते ही संघर्ष को रोक देगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले हमलों के बाद शुरुआत में दावा किया था कि युद्ध दो-तीन दिनों में खत्म हो सकता है। हालांकि, एक दिन बाद ही उन्होंने अपना अनुमान बदलते हुए कहा कि यह संघर्ष चार हफ्ते तक खिंच सकता है।

व्हाइट हाउस का आधिकारिक अनुमान है कि यह सैन्य अभियान चार से छह सप्ताह तक चल सकता है।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने युद्ध खत्म होने की कोई भी समयसीमा बताने से इनकार कर दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस युद्ध की कोई निश्चित समयसीमा नहीं हो सकती है।

हालांकि, पेंटागन की एक आंतरिक रिपोर्ट में कहा गया है कि संघर्ष सितंबर तक जारी रह सकता है। हालांकि, इस युद्ध के स्पष्ट लक्ष्यों और नतीजों की गणना को लेकर सरकार के बयान बदलते रहे हैं।

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