West Asia Crisis: रिफाइनरियों में एलपीजी उत्पादन 40% बढ़ा, सरकार ने लोगों से की अफवाहों से बचने की अपील
थर्ड आई न्यूज
नई दिल्ली I पश्चिम एशिया में जारी हालिया तनाव और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत सरकार ने घरेलू ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए रणनीतिक कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक अंतरमंत्रालयी प्रेसवार्ता में साफ किया देश में कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। आपूर्ति को सुचारू रखने के लिए रिफाइनरियों से घरेलू एलपीजी के उत्पादन में लगभग 40% की भारी वृद्धि की गई है।
मंत्रालय ने अफवाहों से बचने की सलाह देते हुए आश्वस्त किया है कि किसी भी खुदरा आउटलेट या डिस्ट्रीब्यूटरशिप पर गैस की कोई कमी नहीं है और घरेलू पीएनजी और परिवहन सीएनजी उपभोक्ताओं को 100% आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। वहीं, जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने कहा कि होर्मुज में फिलहाल 22 जहाज और 600 से अधिक नाविक विभिन्न जहाजों पर फंसे हैं। वे सभी फिलहाल सुरक्षित हैं।
घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता और पीएनजी की ओर झुकाव :
वर्तमान परिस्थितियों में घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं की आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। शुरुआत में व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की बिक्री में जो कटौती की गई थी, उसे अब आंशिक रूप से बहाल कर दिया गया है। ऊर्जा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए, प्रमुख शहरों और शहरी क्षेत्रों में व्यावसायिक एलपीजी उपभोक्ताओं से पीएनजी में स्विच करने का आग्रह किया गया है। सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों ने पीएनजी कनेक्शन के लिए कई प्रोत्साहन भी पेश किए हैं और उपभोक्ता ईमेल, पोर्टल या कॉल सेंटर के जरिए आवेदन कर सकते हैं।
राज्यों को नीतिगत निर्देश और अतिरिक्त आवंटन :
पीएनजी के बुनियादी ढांचे को तेजी से विकसित करने के लिए केंद्र सरकार ने 16 मार्च 2026 को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र लिखकर कई सख्त निर्देश दिए हैं:
लंबित सीजीडी पाइपलाइन आवेदनों के लिए ‘डीम्ड अनुमति’ जारी करना और नई स्वीकृतियां 24 घंटे के भीतर देना।
राज्य या स्थानीय अधिकारियों द्वारा लगाए गए सड़क बहाली और अनुमति शुल्क को माफ करना।
काम के घंटों और मौसम संबंधी प्रतिबंधों में ढील देना तथा समन्वय के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करना।
इसके अलावा, एलपीजी से पीएनजी में दीर्घकालिक परिवर्तन को सुनिश्चित करने के लिए 18 मार्च 2026 को राज्यों को व्यावसायिक एलपीजी का 10% अतिरिक्त आवंटन देने की पेशकश की गई है। यह प्रोत्साहन विभिन्न चरणों में मिलेगा: सीजीडी आवेदनों की मंजूरी के लिए राज्य/जिला समितियों के गठन पर 1%, डीम्ड अनुमतियों के आदेश पर 2%, ‘डिग एंड रिस्टोर स्कीम’ शुरू करने पर 3% और वार्षिक लीज शुल्क कम करने पर 4% अतिरिक्त आवंटन दिया जाएगा।
वैकल्पिक ईंधन और आपूर्ति शृंखला प्रबंधन :
एलपीजी की बढ़ती मांग के दबाव को कम करने के लिए कोयला और केरोसिन जैसे वैकल्पिक ईंधन विकल्पों को सक्रिय कर दिया गया है। बिहार, गुजरात, केरल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों ने केरोसिन आवंटित करने के आदेश जारी कर दिए हैं। इसके अलावा, गैर-घरेलू एलपीजी की आंशिक आपूर्ति सभी राज्यों में उपलब्ध कराई जा रही है; जिसके लिए दिल्ली, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान सहित 14 से अधिक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने आवंटन आदेश जारी किए हैं। गैस के डायवर्जन और कालाबाजारी को रोकने के लिए ‘डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड’ को सख्ती से लागू किया जा रहा है, जिसका उपयोग 15 मार्च 2026 के 72% से बढ़कर 17 मार्च तक 81% हो गया है।
निगरानी और शिकायत निवारण तंत्र :
बाजार में अनुशासन बनाए रखने के लिए तेल विपणन कंपनियों ने 17 मार्च 2026 को 2300 से अधिक औचक निरीक्षण किए हैं। तेलंगाना, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान में कई छापे भी मारे गए हैं। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए 30 राज्यों ने स्टेट कंट्रोल रूम और 22 राज्यों ने जिला कंट्रोल रूम स्थापित कर लिए हैं।
उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए एक मजबूत शिकायत निवारण तंत्र भी तैयार किया गया है। इसमें टोल-फ्री हेल्पलाइन (1800 2333 555), सीपीजीआरएएमएस, ओएमसी वेबसाइट्स, और सोशल मीडिया (व्हाट्सएप, ट्विटर) शामिल हैं। एलपीजी दुर्घटनाओं या लीकेज के लिए समर्पित हेल्पलाइन ‘1906’ भी सक्रिय है।


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