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तिनसुकिया हमले के बाद CNEISS की चेतावनी—पूर्वोत्तर में बढ़ सकते हैं उग्रवादी हमले

थर्ड आई न्यूज

गुवाहाटी/तिनसुकिया: Centre for North East India Security Studies (CNEISS) ने असम के टिनसुकिया जिले में ULFA (Independent) द्वारा हाल ही में किए गए हमले के बाद पूर्वोत्तर क्षेत्र में उग्रवादी गतिविधियों के और तेज होने की आशंका जताई है। संगठन ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की सलाह दी है।

जारी प्रेस बयान में कहा गया है कि 22 मार्च की सुबह टिनसुकिया के जगुन क्षेत्र में असम पुलिस के कमांडो कैंप पर हुए हमले, जिसमें चार जवान घायल हुए, आगामी विधानसभा चुनावों से पहले ULFA (I) की रणनीति में बदलाव का संकेत देता है।

CNEISS ने यह भी दावा किया कि Parbatya Chattagram Jana Samhati Samiti, Arakan Rohingya Salvation Army और Rohingya Solidarity Organisation जैसे संगठनों के साथ संभावित गठजोड़ क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है, यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

रिपोर्ट के अनुसार, इस कथित गठजोड़ पर दिसंबर 2025 में कॉक्स बाजार में हुई एक बैठक में चर्चा हुई थी, जिसे बांग्लादेश की Directorate General of Forces Intelligence और पाकिस्तान की इन्टर-सर्विसेस इंटेलिजेंस (ISI) द्वारा सहयोग मिलने की बात कही गई है।

संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि PCJSS ने मिजोरम और त्रिपुरा सहित पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में अपने कई ठिकाने बना लिए हैं और सीमा पार नेटवर्क के जरिए आधुनिक हथियारों की आपूर्ति भी प्राप्त कर रहा है।

इसके अलावा, रिपोर्ट में पहले से मौजूद खुफिया सूचनाओं का हवाला देते हुए कहा गया है कि भारत-म्यांमार-बांग्लादेश सीमा के जरिए हथियारों की तस्करी और समन्वित उग्रवादी गतिविधियों के माध्यम से क्षेत्र को अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है।

गौरतलब है कि गौहाटी हाई कोर्ट ने एक पूर्व हथियार बरामदगी मामले में PCJSS को एक आतंकवादी संगठन बताया था।

यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब असम और आसपास के राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही सतर्क हैं।

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