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गुवाहाटी सेंट्रल सीट पर AJP प्रत्याशी कुंकी चौधरी के खिलाफ FIR, चुनाव नियमों के उल्लंघन के आरोप

थर्ड आई न्यूज

गुवाहाटी। Assam Assembly Elections 2026 के दौरान गुवाहाटी सेंट्रल विधानसभा क्षेत्र में कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर असम जातीय परिषद (AJP) की प्रत्याशी कुंकी चौधरी और उनकी सोशल मीडिया टीम के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

यह प्राथमिकी पान बाजार पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई है। शिकायत के अनुसार, यह मामला 9 अप्रैल 2026 को मतदान के दिन हुई कथित घटनाओं से जुड़ा है, जिसमें उम्मीदवार और उनके सहयोगियों द्वारा चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं।

शिकायत में आरोप है कि चुनाव से पहले लागू 48 घंटे की “साइलेंस पीरियड” अवधि के दौरान भी संबंधित व्यक्ति क्षेत्र में मौजूद था। इसके अतिरिक्त, यह भी आरोप लगाया गया है कि कुंकी चौधरी कुछ लोगों के साथ एक मतदान केंद्र में प्रवेश कर मतदाताओं से बातचीत करती देखी गईं, जिससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, प्रत्याशी से जुड़े कुछ वाहन प्रतिबंधित क्षेत्र में पाए गए। साथ ही, उनके निजी सुरक्षा कर्मियों की बिना अनुमति मतदान केंद्र परिसर में मौजूदगी का भी आरोप है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि साइलेंस पीरियड के दौरान मतदाताओं से संपर्क किया गया, जो चुनाव नियमों का उल्लंघन माना जाता है। इन आरोपों के समर्थन में डिजिटल और वीडियो साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए हैं।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और सभी तथ्यों व साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

प्रत्याशी का पक्ष:
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कुंकी चौधरी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि उनके और उनकी टीम के खिलाफ FIR दर्ज की गई है तथा उनके कुछ सहयोगियों को रात में हिरासत में लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि वह पुलिस स्टेशन में अपना बयान दर्ज कराने पहुंचीं और कानूनी प्रक्रिया के तहत महिला का बयान निर्धारित नियमों के अनुसार दर्ज किया जाना आवश्यक होता है।

चौधरी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनका चुनाव प्रचार पूरी तरह से चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप रहा है। उन्होंने इस कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया और कहा कि उनकी पार्टी को मिल रहे जनसमर्थन के कारण ऐसा किया गया है।

भारतीय चुनाव प्रणाली में “साइलेंस पीरियड” मतदान से 48 घंटे पहले लागू होता है, जिसमें किसी भी प्रकार का प्रचार-प्रसार, मतदाताओं से संपर्क या प्रभाव डालने की कोशिश प्रतिबंधित होती है।

ऐसे मामलों में जांच के बाद यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित उम्मीदवार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ चुनाव आयोग द्वारा भी दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।

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