दूसरे चरण के चुनाव की खास बातें: 3.68 करोड़ वोटर, मतदान खत्म होने का चार अलग वक्त, 1302 उम्मीदवार मैदान में

थर्ड आई न्यूज

पटना I बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान आज हो रहा है। इस चरण में 20 जिलों की 122 सीटों के मतदाता वोट डालेंगे। इसके साथ ही कुल 1,302 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो जाएगी। इससे पहले हुए पहले चरण के चुनाव में 1314 उम्मीदवारों की किस्मत 6 नवंबर को ईवीएम में कैद हो चुकी है। आइये जानते हैं कि दूसरे चरण के चुनाव में क्या-क्या खास है…

वोटिंग की टाइमिंग :
दूसरे चरण की 122 सीटों पर तीन अलग-अलग समय तक वोट डाले जा रहे है।। इमामगंज (SC) विधानसभा सीट के 07 केंद्रों पर सुबह सात बजे से शाम तीन बजे तक वोट डाले जाएंगे। 354 केंद्र ऐसे हैं, जहां वोटिंग का समय सुबह सात बजे से शुरू होकर शाम चार बजे तक जारी रहेगा। बाकि अन्य बूथों पर शाम छह बजे तक मतदान होगा।

वहीं, 18 सीटें ऐसे ही जहां कुछ केंद्रों मतदान सुबह सात बजे शुरू हो गया और शाम चार बजे खत्म होगा। इसके बाकि केंद्रों पर छह बजे तक मतदान कर सकते हैं। बोधगया (SC) विधानसभा सीट के 215-414 मतदान केंद्रों पर वोटिंग सुबह सात बजे से शुरू होकर शाम चार बजे तक चलेगी। वहीं 109-214 मतदान केंद्रों पर वोटिंग सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक चलेगी। बाकि सभी केंद्रों पर वोटिंग सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक चलेगी। इन 20 सीटों के अलावा बाकी 102 सीटों पर मतदान का समय सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक रहेगा।

कुल 1302 उम्मीदवार चुनाव मैदान में :
दूसरे चरण के चुनाव में कुल 1302 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें 1167 पुरुष उम्मीदवार और 134 महिलाएं और एक अन्य उम्मीदवार है। इस चरण में 101 सामान्य और 19 अनुसूचित जाति और दो अनुसूचित जनजाति के लिए के लिए आरक्षित सीटों पर मतदान जारी है।

सबसे ज्यादा उम्मीदवार, 22-22, तीन विधानसभा सीटों गया जिले में गया टाउन, रोहतास में सासाराम सीट और कैमूर जिले में चैनपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। दूसरी ओर, सबसे कम उम्मीदवार, पांच-पांच, तीन सीटों सुपौल जिले में त्रिवेणीगंज, पूर्वी चंपारण जिले में लौरिया और सुगौली से चुनाव लड़ रहे हैं।

कुल कितने मतदाता वोट करेंगे :
दूसरे चरण में 3.68 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 1.94 करोड़ से ज्यादा पुरुष, 1,74 करोंड़ से ज्यादा महिलाएं और 967 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं।

मतदान के लिए कुल कितने बूथ होंगे :
दूसरे चरण के मतदान के लिए कुल 45,371 बूथों पर मतदान किया जा रहा है। 20 जिलों की 122 सीटों पर मतदाताओं के संख्या के हिसाब से बूथ बनाए गए हैं। एक मतदान केंद्र पर 818 मतदाताओं की संख्या होगी।

पीने के पानी से लेकर शौचालय तक की सुविधा :
आयोग ने बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को निर्देश जारी किए हैं कि वे सुनिश्चित करें कि प्रत्येक मतदान केंद्र भूतल/सड़क प्रवेश स्तर पर हो और मतदान केंद्र भवन तक जाने वाली अच्छी स्थिति में सुलभ सड़क हो और उसमें सुनिश्चित न्यूनतम सुविधाएं जैसे पेयजल, प्रतीक्षालय, जल सुविधा युक्त शौचालय, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, दिव्यांग मतदाताओं के लिए उचित ढलान वाला रैंप और एक मानक मतदान कक्ष, उचित साइनेज उपलब्ध हों।

दिव्यांग व्यक्तियों और बुजुर्गों के लुए खास सुविधा :
बिहार में, सभी पोलिंग स्टेशन ग्राउंड फ्लोर/रोड एंट्री लेवल पर हैं और दिव्यांग वोटर्स और व्हीलचेयर वाले बुजुर्ग की सुविधा के लिए सही ढलान वाले रैंप दिए गए हैं। पोलिंग स्टेशनों पर दिव्यांग और बुजुर्ग वोटर्स के लिए विशेष सुविधाएं होंगी। निर्देश दिया गया है कि इन्हे पोलिंग बूथ में एंट्री के लिए प्राथमिकता दी जाए। हर पोलिंग स्टेशन पर दिव्यांग और बुजुर्ग वोटर्स के लिए उचित परिवहन सुविधा होनी चाहिए।

वोटिंग के दिन। दिव्यांग वोटर ECINET के दिव्यांग (सक्षम) मॉड्यूल पर रजिस्टर करके व्हीलचेयर सुविधा के लिए आग्रह कर सकते हैं। पोलिंग स्टेशन पर, आंखों से कम देखने वाले लोग अपने साथ एक साथी को ले जा सकते हैं ताकि वह उनकी तरफ से वोट डाल सके। इसके अलावा, सभी पोलिंग स्टेशनों पर ब्रेल में डमी बैलेट शीट उपलब्ध होंगी। कोई भी आंखों से कम देखने वाला वोटर इस शीट का इस्तेमाल कर सकता है और इस शीट का कंटेंट पढ़ने के बाद, बिना किसी साथी की मदद के EVM के बैलेट यूनिट पर ब्रेल सुविधा का इस्तेमाल करके अपना वोट खुद डाल सकता है।

पोलिंग स्टेशन पर मोबाइल फोन जमा करने की सुविधा :
वोटर्स के लिए पोलिंग स्टेशन के प्रवेश के बाहर मोबाइल फोन जमा करने की सुविधा दी जाएगी। पोलिंग स्टेशन से 100 मीटर के दायरे में मोबाइल फोन को स्विच ऑफ मोड में ही रखने की इजाजत होगी। वोटर को पोलिंग स्टेशन में घुसने से पहले अपना मोबाइल फोन तय वॉलंटियर को देना होगा, जो वोटर को नंबर वाला टोकन देगा। वोट डालने के बाद, वोटर टोकन वापस करेगा और अपना मोबाइल फोन ले लेगा। फोन को पोलिंग स्टेशन के 100 मीटर के दायरे में ऑन नहीं किया जाएगा। यह सुविधा कुछ पोलिंग स्टेशनों पर मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति, संवेदनशीलता, वॉलंटियर की गैर-मौजूदगी या किसी अन्य कारण से उपलब्ध नहीं हो सकती है।

महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों द्वारा मैनेज किए जाने वाले पोलिंग स्टेशन :
जेंडर इक्वालिटी और चुनावी प्रक्रिया में महिलाओं की ज्यादा बेहतर भागीदारी के लिए कमीशन ने यह भी निर्देश दिया है कि, जहां तक हो सके, बिहार राज्य के हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक पोलिंग स्टेशन पूरी तरह से महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों द्वारा मैनेज किया जाएगा। ऐसे महिला-मैनेज्ड पोलिंग स्टेशनों में, पुलिस और सुरक्षा कर्मियों सहित सभी चुनाव कर्मचारी महिलाएं होंगी। हर जिले में कम से कम एक पोलिंग स्टेशन उस जिले के उपलब्ध सबसे कम उम्र के योग्य कर्मचारियों वाली पोलिंग टीमों द्वारा मैनेज किया जाएगा।

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