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“सच की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है” — जुबिन गर्ग की पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग का भावुक बयान

थर्ड आई न्यूज

गुवाहाटी I सिंगापुर पुलिस द्वारा गायक जुबिन गर्ग की मृत्यु से जुड़े तथ्यों के खुलासे के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आते हुए उनकी पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग ने गुरुवार को एक विस्तृत बयान जारी किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सच के लिए परिवार की लड़ाई पूरी तरह कानूनी, निरंतर और अब भी जारी है।

यह बयान ऐसे समय आया है, जब एक दिन पहले सिंगापुर की कोरोनर कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान यह बताया गया कि 19 सितंबर 2025 को लाजरस आइलैंड के पास तैराकी के दौरान जुबिन गर्ग की डूबने से मृत्यु हो गई थी। सुनवाई में सिंगापुर पुलिस कोस्ट गार्ड के अधिकारी एएसपी डेविड लिम ने कहा था कि समुद्र में उतरने से पहले जुबिन गर्ग ने शराब का सेवन किया था और उन्होंने लाइफ जैकेट पहनने से इनकार कर दिया था।

15 जनवरी को फेसबुक पर जारी अपने लंबे बयान में गरिमा ने कहा कि असम के लोगों और संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष तथ्यों को रखना परिवार ने “पारदर्शिता, गरिमा और सत्य” की भावना के तहत आवश्यक समझा, क्योंकि जुबिन गर्ग की मृत्यु को लेकर जनचिंता और कई अनुत्तरित प्रश्न लगातार बने हुए हैं।

उन्होंने बताया कि अचानक हुई इस दुखद घटना के बाद परिवार गहरे आघात और भावनात्मक स्तब्धता में था, जिस कारण तत्काल कानूनी कदम उठाने की स्थिति में नहीं था। हालांकि, जब नौका (यॉट) से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए और मृत्यु की परिस्थितियों को लेकर गंभीर संदेह उत्पन्न हुए, तब परिवार ने तुरंत प्राथमिकी दर्ज कर औपचारिक जांच की मांग की।

गरिमा ने स्पष्ट किया कि घटना के तुरंत बाद सिंगापुर के अधिकारियों ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की थी और सिंगापुर स्थित भारतीय उच्चायोग ने पोस्टमार्टम सहित सभी कानूनी और चिकित्सीय प्रक्रियाओं के समन्वय में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने यह भी कहा कि जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए परिवार ने जानबूझकर सार्वजनिक बयान देने से परहेज किया।

उन्होंने आगे बताया कि स्वास्थ्य में सुधार के बाद परिवार ने असम सीआईडी में प्राथमिकी दर्ज कराई, जिसके बाद असम सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। जांच के सिलसिले में वरिष्ठ एसआईटी अधिकारी सिंगापुर भी गए। कई महीनों की जांच के बाद असम पुलिस ने 2,500 से अधिक पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया, जिसमें उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर हत्या से संबंधित धाराएं लगाई गईं।

गरिमा के अनुसार, परिवार भारत और सिंगापुर — दोनों देशों के अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में रहा है और बयान, डिजिटल संवाद तथा व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर हर स्तर पर पूरा सहयोग करता रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि न्याय की तलाश में परिवार ने कभी कदम पीछे नहीं खींचे हैं।

14 जनवरी 2026 को सिंगापुर की कोरोनर कोर्ट में हुई सुनवाई का उल्लेख करते हुए गरिमा ने बताया कि परिवार के एक वरिष्ठ सदस्य ने विस्तृत बयान देकर कई अहम सवाल उठाए। इनमें नौका यात्रा की योजना, जुबिन गर्ग की चिकित्सीय स्थिति, सुरक्षा प्रबंध, समुद्र में उतरने की परिस्थितियां, उनके अंतिम शब्द, संकट के संकेत मिलने पर मौजूद लोगों की प्रतिक्रिया, चिकित्सीय सहायता में हुई देरी तथा “कोई आपराधिक साजिश नहीं” के निष्कर्ष का आधार शामिल है।

इन सवालों को अपना अधिकार और जिम्मेदारी बताते हुए गरिमा ने केंद्र सरकार और असम सरकार से अपील की कि वे सिंगापुर में चल रही कार्यवाही पर करीबी नजर रखें, आवश्यक कूटनीतिक और कानूनी हस्तक्षेप सुनिश्चित करें तथा भारत में पहले से दाखिल आरोपपत्र के आधार पर शीघ्र अभियोजन की प्रक्रिया आगे बढ़ाएं।

बयान में कहा गया, “जुबिन सिर्फ हमारे परिवार का हिस्सा नहीं थे। वे असम की आत्मा, उसके संगीत और उसकी भावनाओं का अभिन्न अंग थे। उन्हें चाहने वाले लाखों लोग स्पष्ट और ईमानदार जवाब पाने के हकदार हैं।”

परिवार ने दोहराया कि उसकी मांग केवल इतनी है कि जुबिन गर्ग की मृत्यु से पहले की हर एक घटना की पूर्ण और पारदर्शी जांच हो तथा दोषियों को उचित सजा मिले। साथ ही यह भी कहा गया कि वे कानून के शासन में अटूट विश्वास रखते हुए हर कानूनी रास्ता गरिमा और दृढ़ संकल्प के साथ अपनाते रहेंगे।

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