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T20 WC: ‘बेइज्जती करवाना अगर खेल होता, तो पाकिस्तान उसमें चैंपियन होता!’ बहिष्कार ड्रामे पर PAK की उड़ी खिल्ली

थर्ड आई न्यूज

नई दिल्ली I टी20 विश्वकप 2026 में पाकिस्तान के ड्रामे पर अब सोशल मीडिया पर उनकी जमकर खिल्ली उड़ रही है। फैंस मीम्स बनाकर पाकिस्तान की धज्जियां उड़ा रहे हैं। दरअसल, सोमवार को पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ मैच के बहिष्कार के फैसले पर यू-टर्न ले लिया। पाकिस्तानी सरकार ने सोमवार देर रात यह एलान किया कि उनकी क्रिकेट टीम अब 15 फरवरी को भारत के खिलाफ कोलंबो में होने वाले मैच में मैदान पर उतरेगी। इसी के साथ नौ दिन से चले आ रहे पाकिस्तान के ड्रामे पर विराम लग गया।

सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ :
इसके तुरंत बाद सोशल मीडिया पर फैंस ने पाकिस्तान की बेइज्जती करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सबने एक सुर में यही कहा, ‘शुरू में ही कहा था ऐसा होगा। पाकिस्तान यू-टर्न लेगा।’ कुछ फैंस ने यहां तक कह दिया कि पाकिस्तान की भारत से दिक्कत इतनी ज्यादा है कि कोई थेरेपिस्ट भी इसे ठीक नहीं कर सकता।

एक मीटिंग और पाकिस्तान का यू-टर्न :
दरअसल, जब एक फरवरी को पाकिस्तान ने बड़े जोश के साथ भारत के खिलाफ मैच नहीं खेलने की धमकी दी थी, तभी ज्यादातर लोगों ने कह दिया था, इन्हें आखिर में खेलना ही पड़ेगा। आठ फरवरी तक पाकिस्तान ने बड़े जोश और गर्व के साथ इस फैसले का ढिंढोरा पीटा। फिर उनकी आईसीसी के उपाध्यक्ष और स्वतंत्र निदेशक इमरान ख्वाजा के साथ मीटिंग हुई, जिसमें बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम भी मौजूद रहे। इस मीटिंग के बाद बांग्लादेश ने ही पाकिस्तान से मैच के बहिष्कार की मांग वापस लेने की मांग कर दी। जिस बांग्लादेश के दम पर पाकिस्तान इतना कूद रहा था, उसके ऐसा कहते ही पाकिस्तान बैकफुट पर आ गया।

नकवी और शहबाज रहे ट्रोल्स के निशाने पर :
यहीं से मीम का दौर शुरू हुआ और देर रात तक पाकिस्तान सरकार का ऑफिशियल स्टेटमेंट भी आ गया। एक से लेकर आठ फरवरी तक, पाकिस्तानी फैंस से लेकर वहां के कई पूर्व क्रिकेटरों ने पीसीबी के भारत के खिलाफ न खेलने के फैसले की सराहना की थी, लेकिन पाकिस्तान सरकार ने जैसे ही यू-टर्न लिया, अब तक किसी का बयान नहीं आया है। इसने पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड से लेकर मोहसिन नकवी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और वहां के पूर्व क्रिकेटरों का भी मजाक बना दिया है।

पाकिस्तान की क्षमता पर सवाल :
मीम्स में ज्यादातर हमले पीसीबी चेयरमैन मोहसिन नकवी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पर ही केंद्रित रहे। फैंस ने पाकिस्तान के फैसले लेने की क्षमता पर सवाल खड़े किए और उसका मजाक उड़ाया।

बहिष्कार का एलान, फिर एक हफ्ते तक खूब शोर और फिर यू-टर्न…इस स्क्रिप्ट ने पाकिस्तान को कटघरे में खड़ा कर दिया। यही स्क्रिप्ट वह पिछले कई महीनों से लगभग हर टूर्नामेंट में लिखते आ रहे हैं। एशिया कप में भी उन्होंने ऐसा ही किया था। रेफरी एंडी पायक्रॉफ्ट से विवाद के बाद पाकिस्तान ने यूएई के खिलाफ मैच का बहिष्कार करने की धमकी दी थी और फिर खेलने पहुंच गए थे।

एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, ‘इतना सारा शोर और हुआ कुछ नहीं। आखिरकार भारत पाकिस्तान मैच पर फैसला हो ही गया। यह ड्रामा पीसीबी ने इसलिए तैयार किया ताकी भारत पाकिस्तान मैच का हाइप बन सके।’

दूसरे यूजर ने लिखा, ‘पाकिस्तान को झुकने और बहिष्कार से पीछे हटने के लिए दबाव बनाया गया। जय शाह के सामने पाकिस्तान की एक न चली। मैंने पाकिस्तान और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से बड़ा मजाक आज तक नहीं देखा।’
तीसरे यूजर ने लिखा, ‘अगर बात-बात पर बेइज्जती करवाना कोई खेल होता, तो पाकिस्तान उसमें जरूर चैंपियन बनता।’

सच्चाई क्या थी?
असली सच्चाई यही है कि पाकिस्तान को भारत के खिलाफ मैच की जरूरत किसी और बोर्ड या काउंसिल से ज्यादा है। पैसे, राजनीति, दर्शक, सब कुछ इससे जुड़ा था।
अगर टीम नहीं उतरती तो ब्रॉडकास्टर्स छूट मांगते, स्पॉन्सर नाराज होते और फैंस सबसे पहले सवाल पूछते। इसलिए वापसी तय थी।

बस समय का इंतजार था और आखिरकार…ठीक वैसा ही हुआ जैसा पहले दिन से कहा जा रहा था। पाकिस्तान खेलेगा।

बयान अब यह है कि बातचीत हुई, न्याय मिला, सिद्धांत बचा लिया गया। तकनीकी रूप से यह सब सही लग सकता है, लेकिन दुनिया ने देखा कि असली धमकी कब खत्म हुई, जब हिसाब लगाया गया।

छवि पर असर :
इस पूरे प्रकरण ने एक बात फिर सामने रख दी, ऊंची आवाज में सिद्धांत की बात करना आसान है, लेकिन जब गणित सामने आता है तो फैसले बदलते देर नहीं लगती। आईसीसी ने राहत की सांस ली, बांग्लादेश जुर्माने से बच गया, पर टूर्नामेंट से बाहर हो गया, और पाकिस्तान वहीं पहुंचा जहां उसे होना ही था…मैदान पर।

अब आगे क्या?
15 फरवरी को जब टीमें उतरेंगी तो स्टेडियम भरा होगा, टीवी रेटिंग आसमान छुएगी। लोग चौके-छक्के याद रखेंगे, यह हफ्ते भर का ड्रामा नहीं, लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी दर्ज हो चुकी है।

वो कहावत है न, ‘कोयला होय न ऊजलौ, सौ मन साबुन लाय।’ यानी फितरत बदलना आसान नहीं होता। इसलिए अगर भविष्य में फिर कभी पाकिस्तान की ऐसी कोई नई धमकी, नया बहिष्कार या नया अल्टीमेटम सुनाई दे, तो दुनिया शायद उतनी हैरान नहीं होगी।

लोग पहले ही मानकर चलेंगे कि यह स्क्रिप्ट का हिस्सा है, अंत में पाकिस्तान का यू-टर्न तय है। सबसे बड़ा नुकसान यही है। जब बार-बार पलटना आदत बन जाए, तो शब्दों की साख खत्म हो जाती है।

अगली बार चाहे पाकिस्तान का बयान कितना भी ऊंचा क्यों न हो, प्रतिक्रिया यही होगी, रुको, कुछ दिन में फैसला बदल जाएगा।

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