alt="Header Advertisement" class="header-ad-image">     

“अपनालोके मुक पीस फालोर परा बाह दी थाके” : मीरा बोरठाकुर ने खोली भूपेन बोरा की पोल, बताया – अश्लील इशारे करते हुए क्या कहा था

थर्ड आई न्यूज

गुवाहाटी: वरिष्ठ कांग्रेस नेता मीरा बोरठाकुर ने बुधवार को असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा के बीजेपी में शामिल होने के फैसले पर तीखा हमला बोला। उन्होंने बोरा पर राजनीतिक विश्वासघात, अवसरवाद और पाखंड का आरोप लगाते हुए कहा कि यह कदम निजी राजनीतिक लाभ के लिए उठाया गया है।

मीरा बोरठाकुर ने सोशल मीडिया पर बोरा के इस कदम को “ड्रामा” करार देते हुए कहा कि लाखों पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनके पीछे खड़े होकर उनका साथ दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने निजी स्वार्थ के लिए पार्टी छोड़ दी। उन्होंने कहा, “मैंने बहुत राजनीतिक ड्रामा देखे हैं, लेकिन भूपेन बोरा का यह कदम बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, हालांकि हमारे लिए चौंकाने वाला नहीं।”

यात्रा विवाद फिर चर्चा में :
बोरठाकुर ने कांग्रेस की एक यात्रा के दौरान हुए पुराने विवाद को भी दोहराया, जिसमें जोरहाट के सांसद गौरव गोगोई के नेतृत्व में निकाली गई यात्रा के दौरान कथित तौर पर बोरा द्वारा आपत्तिजनक इशारा किए जाने का आरोप लगा था।

उन्होंने आरोप लगाया कि यात्रा के दौरान प्रचार वाहन के भीतर बोरा ने अभद्र व्यवहार किया और कहा था कि “अपनालोके मुक पीस फालोर परा बाह दी थाके” I इस घटना को असम की महिलाओं का अपमान बताते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी और CID जांच के आदेश दिए गए थे। बोरठाकुर ने कहा कि पुलिस और एसपी उनके घर तक पूछताछ के लिए पहुंचे थे और बोरा व देबब्रत सैकिया के घर भी गए थे।

उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री ने खुद आपको चरित्रहीन कहा था। अगर किसी ने मुझे ऐसा कहा होता तो मैं कभी बर्दाश्त नहीं करती। यही फर्क है आप और मुझमें।”

राजनीतिक ‘निवेश’ का आरोप :
मीरा बोरठाकुर ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी लंबे समय से भूपेन बोरा में राजनीतिक ‘निवेश’ कर रही थी। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने खुद देखा था कि मुख्यमंत्री ने बोरा में काफी निवेश किया है।

उन्होंने दावा किया कि बीजेपी में शामिल होने के बाद बोरा के घर को फूलों और सजावट से सजाया गया था और ऐसा लग रहा था जैसे किसी निवेश पर रिटर्न मिल गया हो।

कठिन समय में पार्टी छोड़ने का आरोप :
बोरठाकुर ने बोरा के फैसले को पार्टी के कठिन दौर में पीठ दिखाने वाला बताया। उन्होंने कहा, “जब कोई पार्टी मुश्किल दौर से गुजर रही हो, तब नेताओं को मजबूती से साथ खड़ा होना चाहिए। मैं 17 साल बीजेपी में रही, मतभेद होने के बावजूद तुरंत पार्टी नहीं छोड़ी। अंततः 2021 में CAA आंदोलन के बाद सोच-समझकर कांग्रेस में आई।”

उन्होंने कहा कि चाहे कांग्रेस सत्ता में आए या न आए, वह पार्टी नहीं छोड़ेंगी। लेकिन बोरा का रातों-रात कांग्रेस से बीजेपी की ओर जाना राजनीतिक अस्थिरता और अवसरवाद को दर्शाता है।

बोरठाकुर ने कहा, “आप हमारे साथ यात्रा में थे और एक ही रात में फूलों से सजे घर में मुख्यमंत्री का स्वागत करने लगे। यह पूरी तरह से राजनीतिक दोहरापन है।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *