कार्बी आंगलोंग में हिंसा के साये में फीका पड़ा क्रिसमस, चर्चों को सादे आयोजन की सलाह
थर्ड आई न्यूज
गुवाहाटी I असम के कार्बी आंगलोंग जिले में हालिया हिंसा के चलते इस वर्ष क्रिसमस का उत्सव फीका पड़ गया है। पश्चिम कार्बी आंगलोंग में हुई हिंसक घटनाओं के बाद पहाड़ी जिले और असम के कुछ हिस्सों में भय व अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
मौजूदा हालात को देखते हुए यूनाइटेड क्रिश्चियन फोरम (UCF), कार्बी आंगलोंग ने चर्चों को क्रिसमस समारोह सादगी से मनाने और रात के समय किसी भी तरह की गतिविधियों से बचने की सलाह दी है। चर्चों से अनुरोध किया गया है कि वे न तो रात्रिकालीन कैरल कार्यक्रम आयोजित करें और न ही चर्च परिसर के बाहर कोई उत्सव मनाएं, क्योंकि सार्वजनिक आयोजनों पर निषेधाज्ञा अभी भी लागू है।
यह अशांति मंगलवार को उस समय भड़क उठी, जब वीजीआर (Village Grazing Reserve) और पीजीआर (Professional Grazing Reserve) क्षेत्रों से गैर-जनजातीय लोगों की बेदखली की मांग को लेकर कार्बी जनजातीय संगठनों के प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। इस दौरान दो लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने उस जिले में त्योहार की खुशियों पर गहरा असर डाला है, जहां ईसाई आबादी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यूसीएफ असम के प्रवक्ता एलन ब्रूक्स ने कहा कि हालात ने समूचे त्योहार के माहौल को प्रभावित किया है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं, जिसके कारण ईसाई समुदाय ने इस बार बड़े आयोजनों के बजाय सावधानी को प्राथमिकता दी है।
यूसीएफ कार्बी आंगलोंग द्वारा जारी अपील में चर्चों से हिंसा के बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत लागू निषेधाज्ञा का सख्ती से पालन करने को कहा गया है। जिले में 300 से अधिक चर्च हैं, और सभी से अनुरोध किया गया है कि वे केवल दिन के समय कार्यक्रम आयोजित करें तथा रात में घर-घर जाने या यात्रा करने से बचें।
सलाह में लोगों से किसी भी तरह के भड़काऊ बयान न देने और शांति व सौहार्द के लिए प्रार्थना करने की अपील भी की गई है। यूसीएफ ने कहा कि क्रिसमस का असली संदेश आत्मचिंतन, मेल-मिलाप और रिश्तों को मजबूत करने का है, न कि बड़े जमावड़े या दिखावटी उत्सव का।
एक अलग सार्वजनिक संदेश में यूसीएफ ने पश्चिम कार्बी आंगलोंग और पूरे कार्बी आंगलोंग के निवासियों से आगे किसी भी तरह की हिंसा और तनाव से दूर रहने की अपील की। संगठन ने कहा कि किसी भी प्रकार का विरोध शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए, ताकि सार्वजनिक सुरक्षा और सामुदायिक सौहार्द बना रहे।


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