उमर ख़ालिद और शरजील इमाम को जमानत न देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हिमंत विश्व शर्मा ने किया स्वागत
थर्ड आई न्यूज
गुवाहाटी I असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने सोमवार, 5 जनवरी को गैरकानूनी गतिविधियाँ (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज एक मामले में उमर ख़ालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएँ खारिज किए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने इस निर्णय को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) विरोधी प्रदर्शनों के दौरान उनकी कथित भूमिका से जोड़ते हुए उचित ठहराया।
मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि शीर्ष अदालत का फैसला पूरी तरह न्यायसंगत है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान लगाए गए नारे असहमति की सीमा से आगे बढ़कर देश की एकता को चुनौती देने वाले थे। शर्मा ने यह भी दावा किया कि आरोपियों में से एक ने उत्तर-पूर्व को देश से अलग करने का आह्वान तक किया था।
“सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। मैं इस फैसले का स्वागत करता हूँ,” शर्मा ने कहा। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि सीएए विरोध के दौरान ‘आजादी’ जैसे नारे लगाए गए और ऐसे बयान दिए गए, जो उनके अनुसार भारत की क्षेत्रीय अखंडता पर सवाल खड़े करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इस फैसले को राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की दिशा में आवश्यक कदम बताया। उन्होंने कहा, “माननीय सुप्रीम कोर्ट ने ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ के एक सदस्य की जमानत याचिका खारिज की है, जिसने उत्तर-पूर्व को भारत से अलग करने की धमकी दी थी। देश हमेशा एकजुट, अविभाज्य और अडिग रहेगा।”
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सीएए विरोधी प्रदर्शनों से जुड़े कथित षड्यंत्र और गैरकानूनी गतिविधियों के मामलों में चल रही न्यायिक प्रक्रिया के बीच आया है, जिस पर देशभर में राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं।


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