बंगाल फतह में राजस्थान का कनेक्शन: बूथ से लेकर पीएम की सभाओं तक, जीत के ‘आर्किटेक्ट’ बने राजस्थान के ये नेता

थर्ड आई न्यूज

जयपुर I पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत में राजस्थान के नेताओं ने अहम भूमिका निभाई। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल को इस जीत का आर्किटेक्ट माना जा रहा है, वहीं अजमेर के लाल भूपेंद्र यादव ने चुनावी रणनीति और बूथ मैनेजमेंट संभाला, जबकि अरुण चतुर्वेदी, सीपी जोशी और भजनलाल शर्मा सहित कई नेताओं ने सभाओं, प्रचार और संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाईं।

पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत के पीछे राजस्थान के नेताओं की रणनीतिक भूमिका अब चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। चुनावी माइक्रो मैनेजमेंट, बूथ स्तर की तैयारी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य राष्ट्रीय नेताओं की सभाओं की मॉनिटरिंग से लेकर विधानसभा स्तर तक संगठन को सक्रिय करने में राजस्थान भाजपा के कई दिग्गज नेताओं ने अहम जिम्मेदारी निभाई।

आमतौर पर कैमरे से दूर रहने वाले भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल ने पश्चिम बंगाल में पार्टी संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है I वे पश्चिम बंगाल चुनाव में संगठन प्रभारी और चुनाव प्रबंधन का काम देख रहे थे I

उनके सबसे अहम भूमिका भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव की मानी जा रही है। बंगाल चुनाव में पूरी रणनीति के केंद्रीय स्तंभ रहे यादव ने उम्मीदवार चयन, बूथ मैनेजमेंट और संगठनात्मक समन्वय पर लगातार फोकस रखा। भाजपा ने करीब 40 हजार बूथों पर “पन्ना प्रमुख” मॉडल लागू किया, जिसका असर कई सीटों पर साफ तौर पर देखने को मिला। पार्टी के भीतर उन्हें इस जीत का प्रमुख “आर्किटेक्ट” माना जा रहा है।

बूथ से विधानसभा तक मजबूत रणनीति :
भाजपा ने बंगाल में सिर्फ बड़े नेताओं की रैलियों पर निर्भर रहने के बजाय विधानसभा स्तर तक संगठन को मजबूत करने की रणनीति अपनाई। राजस्थान से जुड़े 16 नेताओं को अलग-अलग विधानसभाओं में “प्रवासी” बनाकर भेजा गया। इन नेताओं ने स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय, वोटर संपर्क, बूथ मैनेजमेंट और प्रचार अभियान की निगरानी की। इनमें राजेंद्र राठौड़, जितेंद्र गोठवाल, अतुल भंसाली, लादू लाल तेली, शंकर सिंह राजपुरोहित, डॉ. मनोज राजोरिया, अशोक सैनी, वासुदेव चावला, पवन दुग्गल, नीरज जैन, विष्णु चेतानी, कमलेश पुरोहित और देवकिशन मारू जैसे नेताओं को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई।

मोदी की सभाओं की कमान अरुण चतुर्वेदी के पास:
पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभाओं और बड़े कार्यक्रमों के समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उनकी टीम ने रैली प्रबंधन, कार्यकर्ता मोबिलाइजेशन और सभा स्थलों की व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से संभाला। वहीं सांसद सीपी जोशी को राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सभाओं का जिम्मा दिया गया। उन्होंने केंद्रीय नेताओं के कार्यक्रमों और संगठनात्मक समन्वय को सुव्यवस्थित रखा।

उत्तर बंगाल में भजनलाल शर्मा की सक्रियता :
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी बंगाल चुनाव में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने उत्तर बंगाल, खासतौर पर सिलीगुड़ी क्षेत्र में रोड शो और जनसभाएं कर भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में माहौल बनाया। पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी को भी अहम जिम्मेदारी दी गई, जिन्होंने संगठनात्मक रणनीति और चुनाव प्रबंधन में सक्रिय योगदान दिया।

माइक्रो मैनेजमेंट बना जीत का आधार :
भाजपा की रणनीति सिर्फ बड़े प्रचार तक सीमित नहीं रही। पार्टी ने बूथ स्तर तक जाकर माइक्रो मैनेजमेंट किया। “पन्ना प्रमुख” मॉडल के जरिए हर वोटर तक पहुंचने की कोशिश की गई। संगठन की इसी रणनीति ने कई सीटों पर भाजपा को बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

‘त्रिदेव’ और ‘पांच पांडव’ मॉडल :
भाजपा प्रवक्ता नीरज जैन के मुताबिक, बंगाल की जनता परिवर्तन चाहती थी और उसने नरेंद्र मोदी पर विश्वास जताया। उन्होंने बताया कि पार्टी ने पिछले चार साल से बूथ स्तर पर काम किया। हर बूथ पर ‘त्रिदेव’ और ‘पांच पांडव’ जैसे मॉडल लागू किए गए। साथ ही महिला सुरक्षा, सरकारी कर्मचारियों की नाराजगी, भत्तों में बढ़ोतरी न होना, बेरोजगारी और हिंसक राजनीति जैसे मुद्दों को भाजपा ने मजबूती से उठाया, जिसका चुनाव में फायदा मिला।

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