रवींद्रनाथ ठाकुर विश्वविद्यालय में हिंदी दिवस सप्ताह का भव्य समापन, वाल मैगज़ीन ‘ज्ञानदा’ और ई-पत्रिका ‘शब्दायान’ का हुआ विमोचन

थर्ड आई न्यूज

होजाई से रमेश मुन्दडा

रवींद्रनाथ ठाकुर विश्वविद्यालय, होजाई में 8 से 14 सितंबर तक आयोजित ‘हिंदी दिवस सप्ताह’ का भव्य समापन 14 सितंबर को विश्वविद्यालय के भारत तीर्थ भवन में हुआ। समारोह में हिंदी भाषा के महत्व, साहित्य और सांस्कृतिक विविधता को रेखांकित करने के साथ विश्वविद्यालय की वाल मैगज़ीन ‘ज्ञानदा’ तथा ई-पत्रिका ‘शब्दायान’ का विमोचन किया गया।

समारोह की शुरुआत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मानवेन्द्रदत्त चौधरी, विशिष्ट अतिथि गीतकार वीरकाण्डेय प्रसाद, परीक्षा नियंत्रक डॉ. शुभजीत चक्रवर्ती, छात्र कल्याण अधिष्ठाता (DSW) डॉ. सत्यजीत कुमार तथा हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार स्वामी के स्वागत एवं आसन ग्रहण से हुई। इसके बाद ईशा डेकाराजा एवं अन्य छात्राओं द्वारा दीप प्रज्वलन तथा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया।

हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार स्वामी ने स्वागत भाषण दिया, जबकि कार्यक्रम संयोजक डॉ. नागेश्वर यादव ने हिंदी दिवस सप्ताह के आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।

समारोह का मुख्य आकर्षण विश्वविद्यालय की वाल मैगज़ीन ‘ज्ञानदा’ और ई-पत्रिका ‘शब्दायान’ का विमोचन रहा। कुलपति प्रो. मानवेन्द्रदत्त चौधरी ने फीता काटकर वाल मैगज़ीन ‘ज्ञानदा’ का उद्घाटन किया। वहीं, मुख्य अतिथि वीरकाण्डेय प्रसाद ने ई-पत्रिका ‘शब्दायान’ का विमोचन किया। डॉ. मनोज कुमार स्वामी ने ई-पत्रिका की विषय-वस्तु एवं उद्देश्य की जानकारी दी।

कुलपति प्रो. मानवेन्द्रदत्त चौधरी ने हिंदी विभाग की सराहना करते हुए कहा कि परंपरा को सहेजते हुए वाल मैगज़ीन का प्रकाशन और दूसरी ओर तकनीक के साथ कदम मिलाते हुए ई-पत्रिका का प्रकाशन विभाग की दूरदर्शिता को दर्शाता है।

कार्यक्रम संयोजक डॉ. नागेश्वर यादव ने हिंदी को संप्रेषण की सहज भाषा बताते हुए कहा कि गैर-हिंदी विभागों के विद्यार्थियों की विभिन्न प्रतियोगिताओं में भागीदारी ही हिंदी सप्ताह की वास्तविक सफलता है।

DSW डॉ. सत्यजीत कुमार ने ‘पंचवटी’, ‘गोदान’ और ‘भिक्षुक’ जैसी साहित्यिक कृतियों का उल्लेख करते हुए 14 सितंबर 1949 को हिंदी को मिले संवैधानिक दर्जे के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। परीक्षा नियंत्रक डॉ. शुभजीत चक्रवर्ती ने कहा कि भारत में बड़ी संख्या में लोग हिंदी समझते और बोलते हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार असम की पहचान असमिया भाषा से है, उसी प्रकार हिंदी देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने वाली संपर्क भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

मुख्य अतिथि वीरकाण्डेय प्रसाद ने स्वतंत्रता आंदोलन में महात्मा गांधी के प्रयासों, त्रिभाषा सूत्र तथा हिंदी की अंतरराज्यीय संपर्क भाषा के रूप में भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए।

समारोह के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों का मन मोह लिया। स्नेहा ज्योति दास ने पूर्वोत्तर की संस्कृति, खुशबू कुमारी चौहान ने रवींद्र नृत्य, तारा प्रसाद ने दक्षिण भारतीय नृत्य तथा अनिशा रहमान और कल्याणी प्रसाद ने मैथिली झीझिया नृत्य प्रस्तुत किया।

हिंदी दिवस सप्ताह के दौरान आयोजित कविता लेखन, कहानी लेखन, निबंध लेखन, भाषण तथा रील निर्माण प्रतियोगिताओं के विजेताओं को समारोह में पुरस्कार प्रदान किए गए। अंत में सभापति के मंतव्य के पश्चात संतोष कुमार गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापित किया और समारोह का समापन हुआ।

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