‘लव जिहाद’ पर आरएसएस प्रमुख के बयान पर विपक्ष का हमला, देबब्रत सैकिया बोले – संविधान विरोधी और विभाजनकारी
थर्ड आई न्यूज
गुवाहाटी I असम विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता देबब्रत सैकिया ने ‘लव जिहाद’ को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सैकिया ने इस टिप्पणी को विभाजनकारी और असंवैधानिक बताते हुए कड़ी आलोचना की।
देबब्रत सैकिया ने कहा, “उन्होंने अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ लड़ाई नहीं लड़ी, इसलिए उनके आदर्श स्वाभाविक रूप से अलग होंगे। संविधान के ख़िलाफ़ कोई भी बात नहीं कही जानी चाहिए। आज भाजपा और आरएसएस एक ही हैं। वे जो चाहें कहते हैं, गालियाँ देते हैं, अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करते हैं और केवल एक विशेष धर्म को बढ़ावा देते हैं। यह सब असंवैधानिक है। इसलिए हमें ऐसे बयानों को अधिक महत्व नहीं देना चाहिए। हम संविधान का पालन करते हैं और संविधान सर्वोच्च है। कानून को अपना काम करने देना चाहिए।”
गौरतलब है कि मोहन भागवत ने शनिवार को भोपाल में आयोजित ‘स्त्री शक्ति संवाद’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था कि ‘लव जिहाद’ को रोकने के प्रयास परिवारों से ही शुरू होने चाहिए।
इस बयान पर कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी आपत्ति जताई। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने ‘लव जिहाद’ की अवधारणा को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इस तरह के दावे साम्प्रदायिक भावनाओं को भड़काने के लिए किए जाते हैं। उन्होंने कहा, “भारत में कोई लव जिहाद नहीं है। आरएसएस प्रमुख और भाजपा नेता देश के हिंदू भाइयों की भावनाओं को भड़काना चाहते हैं। अगर लव जिहाद का मतलब हिंदू और मुस्लिम का आपस में विवाह है, तो फिर भाजपा के मुस्लिम नेताओं ने भी लव जिहाद किया है। उनके खिलाफ आपने क्या कार्रवाई की?”
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने भी भागवत के बयान को भ्रामक बताया। उन्होंने कहा, “हमारा देश संविधान से चलता है। सहमति से कोई भी व्यक्ति किसी से भी प्रेम और विवाह कर सकता है। इसे साम्प्रदायिक रंग देना गलत है। मोहन भागवत का बयान लोगों को गुमराह करने और नफरत फैलाने की कोशिश है।”
इस बीच, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने ‘लव जिहाद’ के दावों के समर्थन में ठोस सबूत पेश करने की मांग की। उन्होंने कहा, “अगर कोई वयस्क अपने निर्णय स्वयं ले रहा है, तो हमारी पसंद-नापसंद का कोई मतलब नहीं है। अगर लव जिहाद हो रहा है, तो संसद में इसके आंकड़े क्यों नहीं पेश किए जाते? जिन राज्यों में आपकी सरकार है, वहां के रिकॉर्ड सामने रखें और बताएं कि लव जिहाद आखिर है क्या। देश के युवाओं को रोजगार चाहिए और आप उन्हें दूसरी दिशा में ले जा रहे हैं।”
इस बयानबाजी के बाद ‘लव जिहाद’ का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।


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