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दावोस में असम की बड़ी छलांग: पहली ही भागीदारी में ₹1 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव हासिल

थर्ड आई न्यूज

दावोस। असम ने विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक में पहली बार भाग लेते हुए ₹1 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव हासिल कर एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने बुधवार को इसे राज्य की वैश्विक आर्थिक भागीदारी के लिए एक बड़ा मील का पत्थर बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दावोस में असम की उपस्थिति बेहद उत्साहजनक रही और इससे राज्य को खासकर पूर्वोत्तर भारत के एक उभरते निवेश गंतव्य के रूप में पहचान मिली है। उन्होंने बताया कि वैश्विक मंच पर शामिल होने के कुछ ही घंटों के भीतर ये निवेश प्रतिबद्धताएँ प्राप्त हो गईं।

मुख्यमंत्री ने असम की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य पिछले पाँच वर्षों से लगातार 13 प्रतिशत की दर से विकास कर रहा है और आने वाले वर्षों में भी यही रफ्तार बनी रहने की संभावना है। उन्होंने कहा, “हम एक छोटी अर्थव्यवस्था हैं, लेकिन तेज़ी से बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री असम और पूरे पूर्वोत्तर के विकास के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।”

उन्होंने बताया कि असम में बायो-गैस फैक्ट्री और ग्रीनफील्ड केमिकल कॉम्प्लेक्स की नींव रखी जा चुकी है, जबकि टाटा सेमीकंडक्टर की असम इकाई में अगले दो से तीन महीनों में चिप निर्माण शुरू होने की उम्मीद है। इससे राज्य का औद्योगिक आधार और मजबूत होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दावोस शिखर सम्मेलन के दौरान कई वैश्विक कंपनियों के साथ बैठकें हुईं और असम की संभावनाओं को लेकर गहरी रुचि दिखाई गई। उन्होंने जोर दिया कि अगले तीन से चार वर्षों तक निरंतर संपर्क और संवाद से इन निवेश प्रस्तावों को ठोस परियोजनाओं में बदला जाएगा।

उन्होंने बताया कि असम का निवेश फोकस ऊर्जा, हरित ऊर्जा, सोलर स्टोरेज, हाइड्रोकार्बन, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उच्च-मूल्य क्षेत्रों पर है, जो राज्य की प्राकृतिक और भौगोलिक विशेषताओं के अनुरूप हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले असम को चाय और एक सींग वाले गैंडे के लिए जाना जाता था, लेकिन अब राज्य को एक संभावनाशील निवेश गंतव्य के रूप में पहचाना जा रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि ₹1 लाख करोड़ के ये निवेश प्रस्ताव असम की दीर्घकालिक आर्थिक प्रगति की मजबूत नींव साबित होंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि पहले के दौर में असम का इस तरह वैश्विक मंच पर आना असंभव सा था, लेकिन प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व और पूर्वोत्तर के प्रति विशेष प्रतिबद्धता ने यह संभव बनाया है।

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