T20 WC 2026: ICC के चाबुक से पस्त पड़े नकवी के तेवर, भारत से मैच खेलने को हुआ राजी; अपनी बात से कैसे पलटा PAK?
थर्ड आई न्यूज
नई दिल्ली I लौट के बुद्धु घर को आए….! पाकिस्तान सरकार के हालिया घटनाक्रमों पर यह कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है। भारत के खिलाफ 15 फरवरी को खेले जाने वाले ग्रुप मैच के बहिष्कार का एलान करने वाली शहबाज सरकार आखिरकार सोमवार (9 फरवरी) को बैकफुट पर आ गई। पाकिस्तान सरकार ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) को निर्देश दिया कि उनकी राष्ट्रीय टीम कोलंबो में रविवार को भारत के खिलाफ मुकाबला खेलेगी। टी20 विश्व कप 2026 का आयोजन सफलतापूर्वक न हो सके, इसके लिए पहले बांग्लादेश ने भरपूर कोशिश की और उसके बाद पाकिस्तान ने पूरा जोर लगाया। लेकिन दोनों ही अपने मंसूबों में नाकाम रहे। हम यहां आपको पूरे विवाद के विषय में बता रहे हैं। आइये जानते हैं..
बांग्लादेश विवाद की शुरुआत कहां से हुई?
बांग्लादेश विवाद की शुरुआत मुस्तफिजुर रहमान से हुई। दरअसल, आईपीएल 2026 के लिए 16 दिसंबर को अबु धाबी में मिनी नीलामी हुई थी। तीन बार की चैंपियन कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) ने नीलामी में बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को 9.20 करोड़ रुपये में खरीदा, जबकि उनका आधार मूल्य दो करोड़ रुपये था। मुस्तफिजुर को नीलामी में मोटी रकम मिली। मुस्तफिजुर एकमात्र बांग्लादेशी खिलाड़ी नहीं थे जो आईपीएल नीलामी में उतरे थे। इस बार बांग्लादेश के कुल सात खिलाड़ी थे जो ऑक्शन टेबल पर उतरे। इन खिलाड़ियों में रिशाद हुसैन, तस्कीन अहमद, तंजीम हसन साकिब, नाहिद राणा, रकीबुल हसन, मोहम्मद शोरिफुल इस्लाम और मुस्तफिजुर रहमान शामिल थे। इनमें से केवल मुस्तफिजुर को ही खरीदार मिला था। मुस्तफिजुर को लेने के लिए केकेआर और चेन्नई सुपर किंग्स (केकेआर) के बीच होड़ देखने मिली थी और अंत में केकेआर मोटी कीमत पर इस बांग्लादेशी खिलाड़ी को लेने में सफल रहा था।
शाहरुख खान आए निशाने पर, कैसे हुई बीसीसीआई की एंट्री?
नीलामी में जैसे ही केकेआर ने मुस्तफिजुर को खरीदा उसके बाद से ही सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने केकेआर, विशेषकर फ्रेंचाइजी के मालिक शाहरुख खान को घेरना शुरू कर दिया गया था।
इस मामले को लेकर सबसे ज्यादा अगर किसी की आलोचना हुई तो वह शाहरुख ही थे। कथावाचक से लेकर राजनेताओं ने शाहरुख की आलोचना की थी।
मामला बढ़ने पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को सामने आना पड़ा था।
बीसीसीआई ने तीन जनवरी 2026 को केकेआर को निर्देश दिया कि वह मुस्तफिजुर को टीम से बाहर करे जिसके बाद फ्रेंचाइजी ने आधिकारिक रूप से मुस्तफिजुर को रिलीज कर दिया।
बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने कहा था, हाल ही में देश भर में चल रहे घटनाक्रमों के मद्देनजर, बीसीसीआई ने केकेआर फ्रेंचाइजी को निर्देश दिया है कि वे अपने एक खिलाड़ी, बांग्लादेश के मुस्तफिजुर रहमान को टीम से रिलीज कर दें।
बीसीसीआई ने यह भी कहा था कि यदि केकेआर किसी रिप्लेसमेंट की मांग करता है, तो बीसीसीआई उसे इसकी अनुमति देगा।
बांग्लादेशी खिलाड़ी का विरोध करने की वजह :
मुस्तफिजुर रहमान पहले भी आईपीएल का हिस्सा रहे हैं और कई फ्रेंचाइजी के लिए खेल चुके हैं। लेकिन इस बार ही उनके खेलने पर बवाल हुआ।
दरअसल, इसकी पूरी जड़ बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा की घटनाएं हैं।
हाल के महीनों में बांग्लादेश से आई इन खबरों ने भारत में चिंता बढ़ाई थी।
इस कारण ही भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय संबंधों में कुछ दिनों में टकरार देखने मिली।
सबसे पहले कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता संगीत सोम ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। इन्होंने शाहरुख खान को घेरा था।
बौखलाए बांग्लादेश ने सुरक्षा को बनाया बहाना :
मुस्तफिजुर को आईपीएल से बाहर करने के बाद बांग्लादेश बुरी तरह बौखला गया और उसने उकसाने वाले बयान देने शुरू कर दिए। बीसीबी ने भारत में सुरक्षा का हवाला देकर टी20 विश्व कप के मैच भारत में नहीं खेलने की मांग की। बीसीबी की मांग के बीच बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के खेल सलाहकार आसिफ नजरुल ने आग में घी डालने का काम किया। नजरुल ने लगातार भारत विरोधी बयान दिए और क्रिकेट बोर्ड को आईसीसी से बांग्लादेश टीम के मैच भारत के बजाए श्रीलंका में कराने के लिए कहा। इतना ही नहीं, बांग्लादेश ने देश में आईपीएल के प्रसारण पर भी रोक लगा दी।
आईसीसी की एंट्री और बांग्लादेश की जिद :
फिर इस मामले पर जय शाह की अध्यक्षता वाली आईसीसी की एंट्री हुई। आईसीसी ने सबसे पहले बीसीबी से बात की। बीसीबी ने चूंकि सुरक्षा का हवाला दिया था तो आईसीसी ने इसकी समीक्षा की। लेकिन उसे भारत में सुरक्षा में कहीं कमी नजर नहीं आई। आईसीसी ने बीसीबी को इससे अवगत कराया, लेकिन बांग्लादेश अपनी जिद पर ही अड़ा रहा और उसने लगातार भारत में नहीं खेलने की बात दोहराई। बीसीबी ने आईसीसी के सामने यह भी विकल्प रखा कि बांग्लादेश को ग्रुप सी से हटाकर ग्रुप बी में शामिल किया जाए और आयरलैंड को ग्रुप सी में भेजा जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि ग्रुप बी के मैच श्रीलंका में होने हैं। इन सबके बीच आईसीसी का दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ढाका में बीसीबी अधिकारियों से मिला और मामले को सुलझाने की कोशिश की। लेकिन बांग्लादेश अपने हठ पर कायम रहा।
बांग्लादेश को भारी पड़ी जिद :
21 जनवरी को आईसीसी बोर्ड की बैठक हुई जिसमें बांग्लादेश की मांग बहुमत के आधार पर खारिज कर दी गई।
आईसीसी ने बांग्लादेश को अल्टीमेटम दे दिया था कि या तो वह तय कार्यक्रम के अनुसार भारत में खेले या उसकी जगह स्कॉटलैंड की टीम में शामिल किया जाएगा।
आईसीसी के अल्टीमेटम के बाद बीसीबी और खिलाड़ियों की अंतरिम सरकार के खेल सलाहकार आसिफ नजरुल के साथ बैठक हुई।
बैठक के बाद बीसीबी ने फिर पुराना राग अलापते हुए कहा कि उसकी टीम भारत नहीं जाएगी।
आईसीसी पहले ही स्पष्ट कर चुका था कि तय कार्यक्रम में बदलाव नहीं होगा और उसने बीसीबी को सूचित कर दिया कि बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड की टीम विश्व कप खेलेगी।
बांग्लादेश विवाद में बेवजह कूदा पाकिस्तान :
जब बांग्लादेश ने आईसीसी से अपने मुकाबले भारत से स्थानांतरित कर श्रीलंका में कराने की मांग की थी तब पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) इस पूरे मामले में अचानक कूद पड़ा था।
उसने आईसीसी को ईमेल लिखकर कहा था कि वह बांग्लादेश की मांग का समर्थन करता है, जिसमें भारत में मैच खेलने पर सुरक्षा और राजनीतिक स्थिति को लेकर चिंता जताई गई है।
पीसीबी ने आईसीसी बोर्ड के अन्य सदस्यों को भी ईमेल की कॉपी भेजी। पीसीबी ने साथ ही बांग्लादेश के मैचों की मेजबानी करने की पेशकश भी की थी।
नकवी ने दी बहिष्कार की धमकी :
आईसीसी के बीसीबी पर फैसले के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने हाय-तौबा मचाना शुरू कर दिया।
पीसीबी के अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने आईसीसी पर बांग्लादेश मामले में पक्षपात का आरोप लगाया और संकेत दिया कि उनकी टीम भी विश्व कप का बहिष्कार कर सकती है।
इसके बाद मोहसिन नकवी की पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात हुई। इस दौरान नकवी ने शरीफ को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।
1 फरवरी को पाकिस्तान की सरकार ने सोशल मीडिया पर टी20 विश्व कप के लिए टीम भेजने का फैसला किया।
पाकिस्तान की सरकार ने यह भी फैसला लिया कि भारत के खिलाफ खेले जाने वाले 15 फरवरी के मुकाबले में पाकिस्तान की टीम नहीं खेलेगी।
आईसीसी, पीसीबी और बीसीबी की बैठक लाहौर में हुई :
पाकिस्तान टीम टी20 विश्व कप के लिए कोलंबो पहुंची और पहला मुकाबला भी खेली।
रविवार को बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम, पीसीबी प्रमुख मोहसिन नकवी और आईसीसी के उपाध्यक्ष इमरान ख्वाजा की लाहौर में बैठक हुई।
पीटीआई के मुताबिक, रविवार को आईसीसी के उपाध्यक्ष इमरान ख्वाजा के साथ मुलाकात के दौरान नकवी ने कुछ मांगें रखी थीं।
इसमें भारत-पाकिस्तान द्विपक्षीय क्रिकेट को फिर से शुरू करने की मांग शामिल थी।
बांग्लादेश के साथ एक त्रिकोणीय सीरीज शामिल थी, ताकि पीसीबी की विश्व कप से बाहर होने के बाद हुए नुकसान की भरपाई हो सके।
हालांकि, भारत-पाकिस्तान द्विपक्षीय क्रिकेट आईसीसी के दायरे में नहीं आता, लेकिन त्रिकोणीय की मांग को तुरंत खारिज कर दिया गया।
भारत ने अब एक दशक से ज्यादा समय से कोई भी त्रिकोणीय टूर्नामेंट नहीं खेला है।
हालांकि, आईसीसी अगले पुरुषों के अंडर-19 विश्व कप की मेजबानी बांग्लादेश को देने पर विचार कर सकता है।
सूत्र ने बताया कि ख्वाजा के साथ बातचीत के दौरान, नकवी ने कई शिकायतें उठाईं।
सूत्र ने कहा, ‘उन्होंने ख्वाजा से सवाल किया कि अगर पाकिस्तानी टीम ने किसी भारतीय बोर्ड अधिकारी से प्रेजेंटेशन में एशिया कप ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया होता तो क्या आईसीसी चुप रहता?’
मालूम हो कि, एशिया कप ट्रॉफी दुबई में एशियाई क्रिकेट परिषद (एसीसी) के मुख्यालय में बंद है। दरअसल, एसीसी प्रमुख नकवी ने यह साफ कर दिया था कि सिर्फ वही पूरे मीडिया की मौजूदगी में प्रेजेंटेशन की औपचारिकताएं पूरी करेंगे।
पलटू पाकिस्तान ने लिया यू-टर्न, भारत के खिलाफ खेलेगा ग्रुप मैच :
सोमवार की रात पाकिस्तान सरकार ने भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबले का एलान किया और यू-टर्न लिया।
पाकिस्तान सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के प्रमुख मोहसिन नकवी ने हालिया घटनाक्रम पर विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान पीसीबी, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठकों के नतीजों पर भी चर्चा हुई।
सरकार ने बताया कि बीसीबी की ओर से पीसीबी को भेजे गए औपचारिक अनुरोधों की समीक्षा की गई, जिन्हें श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और अन्य सदस्य देशों का समर्थन प्राप्त था। इन देशों ने मौजूदा गतिरोध को समाप्त करने के लिए पाकिस्तान से नेतृत्वकारी भूमिका निभाने का आग्रह किया था।
पाकिस्तान सरकार ने बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम के बयान का भी उल्लेख किया और कहा कि ‘भाईचारे की भावना के तहत व्यक्त की गई कृतज्ञता को गर्मजोशी से स्वीकार किया गया है।’ बयान में दोहराया गया कि पाकिस्तान बांग्लादेश के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के बीच टेलीफोन पर बातचीत भी हुई। दोनों नेताओं ने याद किया कि चुनौतीपूर्ण समय में पाकिस्तान और श्रीलंका हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़े रहे हैं। श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने मौजूदा विवाद को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने पर गंभीरता से विचार करने का अनुरोध किया।
इन सभी बहुपक्षीय चर्चाओं और मित्र देशों के आग्रहों को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान सरकार ने अंततः पाकिस्तान राष्ट्रीय क्रिकेट टीम को निर्देश दिया कि वह 15 फरवरी 2026 को होने वाले आईसीसी मेंस टी20 विश्व कप के अपने निर्धारित मुकाबले में हिस्सा ले।
बांग्लादेश पर कोई कार्रवाई नहीं करेगा आईसीसी :
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) कोई कार्रवाई नहीं करेगा।
आईसीसी ने सोमवार को स्पष्ट किया कि भारत में टी20 विश्व कप मैच खेलने से इनकार करने के मामले में बीसीबी पर किसी भी तरह का जुर्माना या दंड नहीं लगाया जाएगा।
खेल की वैश्विक संस्था ने यह फैसला बीसीबी और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के साथ बैठक के बाद लिया।
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने भी बांग्लादेश के समर्थन में 15 फरवरी को भारत के खिलाफ होने वाले मैच का बहिष्कार करने की घोषणा की थी।
आईसीसी ने कहा, ‘यह सहमति बनी है कि मौजूदा मामले में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड पर किसी भी प्रकार का वित्तीय, खेल संबंधी या प्रशासनिक दंड नहीं लगाया जाएगा।’
आईसीसी ने यह भी कहा कि बीसीबी के पास विवाद समाधान समिति (Dispute Resolution Committee-DRC) से संपर्क करने का अधिकार बना रहेगा। यह अधिकार मौजूदा आईसीसी नियमों के तहत सुरक्षित रहेगा।
आईसीसी की तरफ से बताया गया है कि बांग्लादेश 2028-31 के बीच किसी एक आईसीसी टूर्नामेंट की मेजबानी करेगा।
खेल की वैश्विक संस्था ने कहा, ‘यह सहमति बनी है कि बांग्लादेश 2031 पुरुष क्रिकेट विश्व कप से पहले एक आईसीसी टूर्नामेंट की मेजबानी करेगा, जो सामान्य आईसीसी मेजबानी प्रक्रियाओं और आवश्यकताओं के अधीन होगा।’


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