क्या सुधरेंगे रिश्ते: तारिक रहमान को बांग्लादेश चुनाव में प्रचंड बहुमत, BNP की जीत भारत के नजरिए से कितनी खास?
थर्ड आई न्यूज
नई दिल्ली I पड़ोसी देश बांग्लादेश में हुए आम चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी को प्रचंड बहुमत हासिल हुआ है। शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद पहली बार हुए चुनाव में 300 सदस्यीय संसद में 200 से अधिक सीटें बीएनपी के खाते में गई है। ऐसे में अब तारिक रहमान प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार हैं I
इस चुनाव के नतीजे सिर्फ बांग्लादेश के लिए नहीं बल्कि भारत के लिहाज से भी बेहद अहम है। ऐसे में जानिए भारत के लिए बांग्लादेश में तारिक रहमान की पार्टी की जीत के क्या मायने हैं?
भारत के लिए कितने अहम नतीजे :
चुनाव के अंतिम परिणाम आ चुके हैं। बीएनपी जहां सत्ता के शीर्ष पर पहुंच चुकी है, तो कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी को करारी हार मिली है। बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान अब बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री होंगे। ऐसे में शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद अब भारत के लिए अगली सरकार से चर्चा की रणनीति काफी अहम होने वाली है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान और उनकी पार्टी को चुनाव में हुई शानदारी जीत के लिए शुभकामनाएं दी है। चुनाव में आवामी लीग पर लगे प्रतिबंध के बाद नई दिल्ली लगातार चुनाव गतिविधियों और नतीजों पर नजर बनाए हुई थी। क्योंकि इस चुनाव में बांग्लादेश में भारत विरोधी माहौल को खूब हवा दी गई। ऐसे में बीएनपी की जीत भारत के लिए एक तरह से राहत की खबर है।
पीएम मोदी ने दी बधाई, रिश्तों पर दिया जोर :
पीएम मोदी ने एक्स पोस्ट में लिखा,’बांग्लादेश के संसदीय चुनावों में बीएनपी को निर्णायक जीत दिलाने पर मैं तारिक रहमान को हार्दिक बधाई देता हूं। यह जीत बांग्लादेश की जनता के आपके नेतृत्व पर विश्वास को दर्शाती है। भारत लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के प्रति अपना समर्थन जारी रखेगा। मैं आपके साथ मिलकर हमारे बहुआयामी संबंधों को मजबूत करने और हमारे साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर हूं।’
बीएनपी की जीत भारत के लिए राहत की खबर :
बीएनपी की जीत भारत के लिए राहत भरी खबर है। ऐसा इसलिए क्योंकि कट्टपंथी दल जमात-ए-इस्लामी ने चाहे अपने चुनावी घोषणा पत्र में कितने भी भारत के साथ मधुर संबंधों पर जोर दिया हो, लेकिन भारत में अक्सर उसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रभाव में माना जाता है। वहीं ऐतिहासिक रूप से बीएनपी के साथ भारत के रिश्ते सहज ना रहे हो, लेकिन मौजूदा हालातों के मद्देनजर भारत उसे लोकतांत्रिक विकल्प के तौर पर देख रहा है।
तारिक रहमान की प्रचंड जीत के मायने :
भारत के लिए तारिक रहमान की जीत बांग्लादेश के साथ संबंधों का नया दौर शुरू करेगा।
सुरक्षा सहयोग, विदेश नीति और आर्थिक साझेदारी का आने वाला रास्ता तय होगा।
बांग्लादेश में हावी होते कट्टरपंथ पर बीएनपी का तौर-तरीका उसकी छवि तय करेगा।
बीएनपी के सत्ता संभालने के बाद चीन और पाकिस्तान के साथ संबंधों पर नजर रहेगी।
शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग और अल्पसंख्यक सुरक्षा जैसे मुद्दे शुरुआती चुनौतियां
बीएनपी की सरकारों पर भारत-विरोधी उग्रवादियों को शरण देने का आरोप लगता रहा है।
दरअसल, 1971 में बांग्लादेश की आजादी के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में उतार-चढ़ाव देखे गए हैं। हालांकि, 21वीं सदी के अधिकतर हिस्से में भारत-बांग्लादेश परस्पर सहयोगी रहे हैं। शेख हसीना के नेतृत्व में (2009-2024) के बीच बांग्लादेश सरकार ने भारत के पूर्वोत्तर में फैले उग्रवाद को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई। खासकर उल्फा और एनडीएफबी जैसे संगठन, जो कभी बांग्लादेश से सप्लाई होने वाले हथियारों के जरिए भारत में आतंकी घटनाओं को अंजाम देते थे, उनकी गतिविधियों को रोकने में खासी सफलता हासिल हुई। बांग्लादेश की तरफ से इस तरह के कूटनीतिक सहयोग में किसी तरह का बदलाव भारत के उत्तर में स्थित क्षेत्र के लिए सुरक्षा का मुद्दा बन सकता है।
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) :
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की नींव देश के प्रधानमंत्री रहे जिया-उर-रहमान ने की थी। बाद में उनकी पत्नी खालिदा जिया ने पार्टी के अलावा प्रधानमंत्री के रूप में कई वर्षों तक देश का भी नेतृत्व किया।
यह पार्टी 1979, 1991, 1996, 2001 में सत्ता हासिल करने में भी सफल हुई है।
बांग्लादेश में शेख हसीना के दौर में बीएनपी प्रमुख विपक्षी दल रहा।
बीएनपी ने 2024 के आम चुनाव का बहिष्कार किया था। इस पार्टी ने तब शेख हसीना पर भारत को ज्यादा करीब रखने का आरोप लगाया था और राष्ट्रवाद को मुद्दा बनाया था।
30 दिसंबर 2025 को खालिदा जिया का निधन हो गया। इसके बाद से ही उनके बेटे तारिक रहमान पार्टी की कमान संभाल रहे हैं।
नया नेतृत्व, नए रिश्ते: बांग्लादेश में BNP की जीत से नए नेतृत्व के साथ भारत के द्विपक्षीय रिश्तों को फिर से तय करने का मौका मिलेगा।
स्थिर राजनीतिक माहौल: लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता के बाद स्थिर सरकार बनने से भारत‑बांग्लादेश संबंधों में भरोसे का माहौल बनेगा।
सीमापार सहयोग को बढ़ावा: बिजली, सड़क, रेलवे, व्यापार जैसे मुद्दों पर सहयोग दोनों देशों के फायदे में आगे बढ़ सकता है।
शानदार जनादेश: BNP ने संसदीय बहुमत हासिल किया है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि जनता ने बदलाव का समर्थन किया है।
भारत‑पड़ोसी नीति का मजबूत मोर्चा: भारत अपनी ‘पड़ोस पहले’ नीति के तहत लोकतांत्रिक, प्रगतिशील बांग्लादेश को समर्थन देगा।
सुरक्षा सहयोग बेहतर हो सकता है: सीमा सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी साझेदारी और सूचना साझेदारी जैसे क्षेत्र में नया भरोसा बन सकता है।
आर्थिक साझेदारी को बल: ऊर्जा, निवेश और इंफ्रा प्रोजेक्ट में बढ़ती भागीदारी से भारत‑बांग्लादेश व्यापार में बढ़ोतरी हो सकती है।
क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान: दक्षिण एशिया में राजनीतिक संतुलन और समर्थन से क्षेत्रीय स्थिरता मजबूत होगी।
नए अवसर, शिक्षा और
सांस्कृतिक आदान‑प्रदान: छात्रों, कलाकारों और नौजवानों के लिए द्विपक्षीय आदान‑प्रदान के अवसर बढ़ सकते हैं।
भरोसे का संदेश: इस जीत ने दिखाया कि बांग्लादेश के लोग अपने लोकप्रिय नेताओं में विश्वास रखते हैं और भारत लोकतंत्र, विकास और सहयोग को सम्मान देता रहेगा।

