32 वर्षों से संस्कृति की अलख जगा रही ‘होली-टोली’ गुवाहाटी की अनूठी परंपरा
थर्ड आई न्यूज़
गुवाहाटी। फागुन मास के पावन अवसर पर गुवाहाटी की सांस्कृतिक संस्था होली-टोली पिछले 32 वर्षों से भारतीय लोक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का सराहनीय कार्य कर रही है। यह संस्था घर-घर जाकर पारंपरिक होली गीतों, चंग, ढोलक और बांसुरी की मधुर धुनों के माध्यम से सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का संदेश देती आ रही है।
सन 1994 में प्रारंभ हुई यह पहल आज एक सशक्त सांस्कृतिक परंपरा का रूप ले चुकी है। संस्था के सदस्य फागण मास के दौरान विभिन्न संस्थानों और परिवारों के बीच पहुंचकर रसिया, लोकगीत और भक्ति-संगीत की प्रस्तुतियां देते हैं। इससे नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने और उसे आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिल रही है।
संस्था का उद्देश्य आधुनिकता के दौर में विलुप्त होती लोक परंपराओं को पुनर्जीवित करना और युवाओं में सांस्कृतिक चेतना का प्रसार करना है। वरिष्ठ सदस्यों के मार्गदर्शन में युवाओं की सक्रिय भागीदारी इस सांस्कृतिक अभियान को निरंतर मजबूती प्रदान कर रही है।
इस वर्ष भी होली-टोली के सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतिदिन रात्रि 10 बजे से श्री रामजीदास धानुका चेरिटेबल ट्रस्ट (जी.एस.टी. भवन के सामने, केदार रोड, गुवाहाटी) परिसर में आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष उपस्थित होकर पारंपरिक होली गीतों का आनंद ले रहे हैं तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सहभागी बन रहे हैं।
संस्था का मानना है कि “संस्कृति ही समाज की आत्मा है” और जब तक लोकगीतों की गूंज घर-घर सुनाई देती रहेगी, तब तक हमारी परंपराएं जीवंत बनी रहेंगी।
यह जानकारी होली-टोली, गुवाहाटी की ओर से शंकर बिड़ला द्वारा जारी की गई।


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