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बालेन युग का आगाज: हर मिनट के भाषण पर मिले 2 लाख वोट, ऐसे नेपाल के ‘नायक’ बने बालेन शाह

थर्ड आई न्यूज

काठमांडू I नेपाल की सियासत में नया सूरज उग आया है। नाम है बालेन शाह। इसे महज एक चुनावी परिणाम कहना गलत होगा, यह एक राजनीतिक सुनामी है जिसने दशकों पुराने किलों को ढहा दिया है। एक हाथ में ‘घंटी’ और आंखों पर काला चश्मा लगाए एक रैपर-इंजीनियर अब नेपाल की तकदीर लिखने जा रहा है।

26 मिनट के भाषण से ही बन गए प्रधानमंत्री :
बालेन शाह की इस जीत का सबसे दिलचस्प पहलू उनका ‘टाइम मैनेजमेंट’ रहा। जहां मंझे हुए नेता घंटों तक एक-दूसरे पर कीचड़ उछालते रहे, वहीं बालेन ने पूरे चुनाव अभियान के दौरान 5 जनसभाओं में कुल मिलाकर मात्र 26 मिनट तक भाषण दिया। गणित बिठाएं तो उनके भाषण के हर एक मिनट में पार्टी की झोली में करीब 2 लाख वोट डाले गए। नेपाल की 275 सीटों वाली प्रतिनिधि सभा (HoR) में उनकी पार्टी राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने 182 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। इस तरह बालेन शाह नेपाल के पीएम बन गए हैं।

चुनाव प्रचार में जनता से ‘चाय-पानी’ पूछते रहे शाह :
बता दें कि बालेन शाह के चुनाव प्रचार का तरीका बड़े राजनेताओं जैसा नहीं था। जनकपुर में उन्होंने अपनी मातृभाषा मैथिली में बात की, तो सुदूर पश्चिम में डोटेली बोली में संदेश दिया। वे मंच पर जाकर लंबे-चौड़े वादे नहीं करते थे, बल्कि जनता से सीधा संवाद करते रहे। पूरे चुनाव प्रचार के दौरान बालेन शाह की सबसे खास बात यह रही कि वे जनता से पूछते थे कि चाय पी ली आपने? आज कौन सी सब्जी खाई? सब्जी अपनी क्यारी की थी या बॉर्डर पार से आई थी?

यही वो सवाल थे जिन्होंने आम नेपाली नागरिक के दिल को छुआ। उन्होंने यह साबित कर दिया कि राजनीति ‘स्विट्जरलैंड’ बनाने के बड़े-बड़े ख्वाब दिखाने का नाम नहीं, बल्कि अपने देश की बडिमालिका और खप्तड की खूबसूरती को सहेजने का नाम है।

न वोट मांगा, न विरोध किया :
बालेन ने कभी वोट की भीख नहीं मांगी। उन्होंने साफ कहा, “मैं वोट मांगने नहीं, काम मांगने आया हूं। अगर हमारी पार्टी हार भी गई, तब भी हम जनता के लिए काम करते रहेंगे।” जनकपुर की रैली में उनका यह बयान सबसे ज्यादा चर्चा में रहा कि मुझे मधेसी का बेटा समझकर वोट मत देना, मुझे एक अच्छा उम्मीदवार समझकर वोट देना।

चेतावनी की घंटी :
बालेन जब भी मंच पर आते, उनके हाथ में एक छोटी घंटी होती थी। उनके कार्यकर्ता बताते हैं कि भाषण से पहले घंटी बजाना विपक्षी दलों के लिए एक चेतावनी थी कि अब पुरानी और सुस्त राजनीति के दिन लद चुके हैं। अब बालेन नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले चुके हैं।

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