CAA को लेकर असम में बवाल — गैर मुस्लिम ‘अवैध प्रवासियों’ को नागरिकता देने के खिलाफ राज्यव्यापी प्रदर्शन

थर्ड आई न्यूज

गुवाहाटी, 8 अगस्त 2025 |
असम में ‘अवैध प्रवासी’ या आम बोलचाल में कहे जाने वाले ‘बांग्लादेशी आप्रवासी’ का मुद्दा पिछले 45 वर्षों से राजनीति के केंद्र में रहा है। अब यह मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। 2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) कानून बनने और 2024 में इसके नियम लागू होने के बाद, हाल ही में राज्य सरकार के फैसले ने तीखी प्रतिक्रियाएं जन्म दी हैं।

राज्य सरकार ने हाल ही में 31 दिसंबर 2014 से पहले आए गैर मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता देने का निर्णय लिया है। इसके तहत, गैर मुस्लिम अवैध प्रवासियों के खिलाफ विदेशी न्यायाधिकरण (Foreigners Tribunal) में चल रहे मामलों को वापस लेने की घोषणा की गई है।

इस कदम के खिलाफ शुक्रवार को पूरे राज्य में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए, जिनका नेतृत्व ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) ने किया। इनके साथ सत्र मुक्ति संग्राम समिति (SMSS) और अन्य संगठनों ने भी सड़कों पर उतरकर सरकार के निर्णय को “विदेशियों को वैध करने की साजिश” करार दिया। प्रदर्शनकारियों ने इस आदेश की प्रतियां जलाकर इसे तत्काल रद्द करने और असम को CAA के दायरे से पूरी तरह बाहर रखने की मांग की।

चिरांग, बोंगाईगांव और डिब्रूगढ़ में एएएसयू का विरोध :
चिरांग जिले के बिजनी में AASU की क्षेत्रीय इकाई के अध्यक्ष बिस्वजीत रॉय के नेतृत्व में हिंदू बांग्लादेशियों को नागरिकता देने के सरकारी आदेश की प्रतियां प्रतीकात्मक रूप से जलाई गईं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह फैसला असम की मूल निवासी पहचान को कमजोर करता है।

बोंगाईगांव में भी जिला छात्र संघ ने इस “जल्दबाजी में लिए गए फैसले” का विरोध किया। नाराज प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए सवाल उठाया कि जब अन्य राज्य हिंदू विदेशियों को स्वीकार नहीं करते, तो असम पर यह बोझ क्यों डाला जा रहा है।

डिब्रूगढ़ में सैकड़ों छात्र कार्यकर्ता राष्ट्रीय राजमार्ग 37 पर एकत्र हुए और आदेश की प्रतियां जलाईं। उनका आरोप था कि यह फैसला उस अदालत के आदेश का उल्लंघन है, जिसमें अवैध हिंदू बांग्लादेशियों के नागरिकता दावे को खारिज करने को कहा गया था।

जोरहाट और गोलाघाट में KMSS व SMSS का आक्रोश :
जोरहाट में कृषक मुक्ती संग्राम समिति (KMSS) और जिला छात्र संघ ने संयुक्त रूप से नागरिकता आदेश के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा का पुतला जलाया और सरकारी आदेश की प्रतियां जलाईं।

गोलाघाट के मोरोंगी राजस्व परिपत्र क्षेत्र में SMSS ने भी उग्र प्रदर्शन करते हुए आदेश की प्रतियां और मुख्यमंत्री का पुतला जलाया। प्रदर्शन का नेतृत्व SMSS केंद्रीय समिति के अध्यक्ष पिंटू गोगोई ने किया।

मोरीगांव में गूंजे ‘असम समझौता बचाओ’ के नारे :
मोरीगांव में जिला छात्र संघ ने गैर मुस्लिम अवैध प्रवासियों के खिलाफ मामलों की वापसी को लेकर तीखी नाराजगी जताई। केंद्रीय चौक पर एकत्र प्रदर्शनकारियों ने आदेश की प्रतियां जलाईं और दोहराया कि नागरिकता किसी भी हाल में धार्मिक आधार पर नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल 1971 के असम समझौते के तहत मान्यता प्राप्त प्रवासियों को ही नागरिकता मिलनी चाहिए।

इन प्रदर्शनों ने साफ कर दिया है कि राज्य सरकार की इस नागरिकता नीति के खिलाफ असम के स्वदेशी संगठनों में गहरा असंतोष है। उनका मानना है कि यह नीति असम की जनसांख्यिकीय और सांस्कृतिक पहचान के लिए गंभीर खतरा है।

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