अखिल गोगोई का BJP-RSS पर हमला, ‘मिया खेदा़ आंदोलन’ को बताया राजनीतिक चाल, श्रृंखल चालिहा को कहा अशिक्षित, असम में राष्ट्रपति शासन की मांग की
थर्ड आई न्यूज
गुवाहाटी, 8 अगस्त 2025 |
राइजोर दल के अध्यक्ष एवं शिवसागर के विधायक अखिल गोगोई ने शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में असम में चल रहे तथाकथित ‘मिया खेदा आंदोलन’ पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा, आरएसएस और असम सरकार ने ‘विदेशियों को निकालने’ के नाम पर इस आंदोलन को संगठित और प्रायोजित किया है, जो असल मुद्दे से भटकाने वाला सांप्रदायिक अभियान है।
गोगोई ने कहा, “यह तथाकथित मिया खेदा आंदोलन केवल एक राजनीतिक नारा है, जिसका उद्देश्य 2026 विधानसभा चुनाव से पहले समाज में ध्रुवीकरण करना है।” उन्होंने लोगों से अपील की कि इस आंदोलन को वास्तविक अवैध प्रवासियों के खिलाफ असली जन आंदोलन में बदलें, न कि इसे सांप्रदायिक रंग में रंगने दें।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर बेदखल किए जा रहे लोग वास्तव में विदेशी हैं, तो सरकार उन्हें मुआवजा क्यों दे रही है? गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2016 के उस वादे की याद दिलाई जिसमें कहा गया था कि किसी भी अवैध प्रवासी को मतदाता पहचान पत्र नहीं मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) कोई ठोस परिणाम नहीं दे सका है।
गोगोई ने मांग की कि असम को आदिवासी राज्य घोषित किया जाए और मुख्यमंत्री तथा उपमुख्यमंत्री के पद मूलनिवासी समुदायों के लिए आरक्षित हों।
‘मिया’ मुद्दे पर बोलते हुए गोगोई ने स्पष्ट किया कि वह मिया प्रेमी नहीं बल्कि मानवता के रक्षक हैं। उन्होंने कहा, “मेरी चिंता आम भारतीय मजदूर के लिए है, चाहे वह किसी भी धर्म या समुदाय का हो। संकट की घड़ी में मदद के लिए मुझे किसी की अनुमति की जरूरत नहीं होती।” उन्होंने खुद को “स्वभाव से कोमल, पर न्याय और अधिकारों के लिए अडिग योद्धा” बताया।
गोगोई ने श्रृंखल चालिहा पर भी निशाना साधते हुए उन्हें “अशिक्षित और मुद्दे की जटिलताओं से अनजान” बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि भाजपा सरकार, आरएसएस या चालिहा जैसे व्यक्ति किसी भी समय सांप्रदायिक हिंसा भड़का सकते हैं।
इस स्थिति को देखते हुए गोगोई ने असम में भाजपा सरकार को बर्खास्त करने और राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की, ताकि राज्य में स्थिरता बहाल हो सके।

