Bihar Cabinet: छात्र राजनीति से सत्ता के शिखर तक, विजय सिन्हा बने बीजेपी का भरोसेमंद चेहरा

थर्ड आई न्यूज

लखीसराय I बिहार बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा एक बार फिर नई सरकार में बड़ी जिम्मेदारी संभालने की तैयारी में हैं। संगठन में मजबूत पकड़, सदन में आक्रामक शैली और प्रशासनिक अनुभव के कारण पार्टी नेतृत्व लगातार उन पर भरोसा जताता रहा है। विधायक से लेकर मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, विपक्ष के नेता, उपमुख्यमंत्री और अब सम्राट कैबिनेट में उनका शामिल होना बिहार की राजनीति में उनके मजबूत पैठ की पहचान है। लखीसराय से आने वाले विजय सिन्हा ने छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी और बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े I

छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर :
विजय सिन्हा लंबे समय तक भाजपा संगठन में सक्रिय रहे और जमीनी स्तर पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई। कार्यकर्ताओं के बीच उनकी सक्रियता ने उन्हें धीरे-धीरे पार्टी का भरोसेमंद चेहरा बना दिया। वर्ष 2005 में वह पहली बार लखीसराय विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने। इसके बाद 2010, 2015, 2020 और 2025 में भी लगातार जीत दर्ज कर उन्होंने अपनी राजनीतिक ताकत साबित की। लगातार चुनाव जीतने वाले नेताओं में उनका नाम प्रमुखता से लिया जाता है।

मंत्री से विधानसभा अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री तक :
29 जुलाई 2017 को नीतीश कुमार सरकार में विजय सिन्हा को श्रम संसाधन विभाग की जिम्मेदारी दी गई। मंत्री रहते हुए उन्होंने रोजगार, कौशल विकास और श्रमिक योजनाओं पर काम किया। वर्ष 2020 विधानसभा चुनाव के बाद उन्हें बिहार विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया, जहां उन्होंने सदन में अनुशासन को लेकर सख्त रवैया अपनाया। महागठबंधन सरकार बनने के बाद भाजपा ने उन्हें विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाया। कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मुद्दों पर उन्होंने सरकार को लगातार घेरा। 28 जनवरी 2024 को एनडीए सरकार बनने के बाद उन्होंने बिहार के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही उन्हें पथ निर्माण विभाग और बाद में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।

विवाद, संपत्ति और संगठन में मजबूत पकड़ :
विजय सिन्हा का नाम कई राजनीतिक विवादों में भी चर्चा में रहा। भूमि माफिया को लेकर दिए गए उनके बयान पर राजस्व अधिकारियों के संगठन ने आपत्ति जताई थी। वहीं 2025 के चुनाव के दौरान उनके काफिले पर हमले और राजनीतिक टकराव की घटनाएं भी सुर्खियों में रहीं। हालांकि उनके खिलाफ कोई गंभीर आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। चुनावी हलफनामे के अनुसार उनकी कुल संपत्ति करीब 11.62 करोड़ रुपये है। उनकी पत्नी सुशीला देवी के नाम भी बड़ी चल संपत्ति दर्ज है। भूमिहार समाज में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है और संगठन व सरकार दोनों में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण उन्हें बीजेपी का मजबूत और भरोसेमंद चेहरा माना जाता है।

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