कोलकाता में अष्टलक्ष्मी परशुराम फाउंडेशन – 160 से अधिक मेधावी प्रतिभाओं का सम्मान, एक दशक में एक हज़ार बच्चों को आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर और इंजीनियर बनाने का लक्ष्य : रतन शर्मा

थर्ड आई न्यूज़

कोलकाता, 12 जुलाई। अष्टलक्ष्मी परशुराम फाउंडेशन के तत्वावधान में रविवार को कोलकाता के मंगलम माहेश्वरी भवन में भव्य ब्रह्मोत्सव का आयोजन किया गया। समारोह में ब्राह्मण समाज के 160 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान किया गया। सम्मानस्वरूप प्रतिभाओं को ₹11,000 तथा ₹5,100 के चेक, प्रशस्ति-पत्र और मेडल प्रदान किए गए। इसके साथ ही समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली अनेक विभूतियों को अष्टलक्ष्मी वैभव कलश से सम्मानित किया गया।

पूज्य महंत स्वामी अवधेशाचार्य जी महाराज (लोहर्गल धाम, झुंझुनूं) के पावन सान्निध्य में आयोजित समारोह में अष्टलक्ष्मी परशुराम फाउंडेशन के मुख्य संरक्षक रतन शर्मा, राजस्थान सरकार के पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवा, पूर्व विधायक अभिनेष महर्षि, पश्चिम बंगाल के भाजपा विधायक डॉ. राजेश सुरोलिया, वरिष्ठ समाजसेवी दिनेश जोशी, सर्व ब्राह्मण समाज के प्रमुख सुरेश मिश्रा सहित कोलकाता की अनेक प्रमुख हस्तियां उपस्थित थीं।

सभा को संबोधित करते हुए प्रसिद्ध उद्योगपति एवं फाउंडेशन के मुख्य संरक्षक रतन शर्मा ने कहा कि संगठन का लक्ष्य आगामी दस वर्षों में समाज के एक हजार से अधिक बच्चों को आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर और इंजीनियर बनने के लिए तैयार करना है। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन ऐसे मेधावी विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें हरसंभव शैक्षणिक और मार्गदर्शन संबंधी सहयोग उपलब्ध कराएगा। इस कार्य में समाज की प्रतिष्ठित विभूतियों, विशेषकर पूर्व आईपीएस अधिकारी एवं वर्तमान विधायक डॉ. राजेश सुरोलिया जैसे व्यक्तित्वों के अनुभव और मार्गदर्शन का लाभ लिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि फाउंडेशन अगले तीन वर्षों में देशभर में 36 बड़े आयोजन करेगा, जिनमें 18 राजस्थान तथा 18 अन्य राज्यों में आयोजित किए जाएंगे। इस अवसर पर उन्होंने फाउंडेशन के लिए पांच करोड़ रुपये देने की घोषणा करते हुए कहा कि आज एक छोटे प्रयास के रूप में शुरू हुआ यह अभियान भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समाज की सेवा का माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि अष्टलक्ष्मी वैभव कलश समृद्धि और शुभता का प्रतीक है तथा उनका संकल्प इसे समाज के प्रत्येक घर तक पहुंचाने का है। उन्होंने कोलकाता के समाज का सफल आयोजन के लिए आभार भी व्यक्त किया।

भाजपा विधायक डॉ. राजेश सुरोलिया ने फाउंडेशन की पहल को समाजोत्थान की दिशा में एक अत्यंत सराहनीय प्रयास बताते हुए कहा कि वे इसके उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में हरसंभव सहयोग देंगे। उन्होंने कहा कि समाज में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। कोई खेलों में उत्कृष्ट है, कोई चित्रकला में, तो कोई संगीत, साहित्य अथवा अन्य विधाओं में अपनी अलग पहचान बना रहा है। आवश्यकता इस बात की है कि ऐसी प्रतिभाओं को खोजकर उन्हें उचित मंच और प्रोत्साहन दिया जाए। उन्होंने कहा कि समाज को केवल आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की ही नहीं, बल्कि प्रत्येक क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने वाली प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा, “जीवन केवल सफल ही नहीं, बल्कि सार्थक भी होना चाहिए। यही जीवन का वास्तविक उद्देश्य है।”

पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवा ने कहा कि वर्तमान समय में समाज के सामने सबसे बड़ी चुनौती नैतिक मूल्यों और संस्कारों के संरक्षण की है। उन्होंने कहा कि बच्चों के संस्कार निर्माण पर गंभीरता से काम करने तथा भारतीय गुरुकुल परंपरा की मूल भावना को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि रतन शर्मा द्वारा शुरू किए गए इस अभियान को समाज का व्यापक सहयोग मिलेगा।

पूर्व विधायक अभिनेष महर्षि ने रतन शर्मा की पहल की सराहना करते हुए कहा कि समाज में ऐसे दूरदर्शी और समर्पित व्यक्तित्व विरले ही मिलते हैं। वहीं सर्व ब्राह्मण समाज के संस्थापक सुरेश मिश्रा ने कहा कि समाज के उत्थान के लिए जितने अधिक संगठन सकारात्मक दिशा में कार्य करेंगे, समाज उतना ही मजबूत होगा।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए अष्टलक्ष्मी परशुराम फाउंडेशन के राष्ट्रीय संयोजक चंद्र प्रकाश शर्मा ने कहा कि यह आयोजन केवल छात्रवृत्ति वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, संस्कार, नेतृत्व निर्माण और सामाजिक उत्तरदायित्व को समर्पित एक प्रेरणादायी अभियान है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को प्रोत्साहित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला तैयार करना है।

समारोह में गुवाहाटी, जयपुर, सिलिगुड़ी सहित देश के विभिन्न भागों से अनेक समाजसेवी एवं विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। इनमें गुवाहाटी के वरिष्ठ समाजसेवी निर्मल तिवाड़ी, लोकगायक बद्री व्यास, जयपुर के समाजसेवी राजकुमार शर्मा, तथा अष्टलक्ष्मी परशुराम फाउंडेशन के अनूप शर्मा और राजकुमार तिवाड़ी प्रमुख रूप से शामिल थे।

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