ब्रिक्स समिट LIVE: ब्रिक्स के साझा घोषणापत्र में पहलगाम हमले की निंदा, कहा- आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस नीति
थर्ड आई न्यूज
भारत की मेजबानी में हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अब सभी विदेशी राष्ट्राध्यक्षों का आगमन हो चुका है। सारे विदेशी राष्ट्राध्यक्ष बैठक में शामिल होने के लिए भारत मंडपम पहुंचने के साथ ही पीएम मोदी बैठक का संबोधन खत्म हो चुका है।
ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणापत्र: गाजा में युद्धविराम से लेकर पश्चिम एशिया तनाव का जिक्र
ब्रिक्स देशों ने आपसी सम्मान और समझ, संप्रभु समानता, एकजुटता, लोकतंत्र, खुलेपन, समावेशिता, सहयोग और आम सहमति की ब्रिक्स भावना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। ब्रिक्स देशों ने कहा कि ब्रिक्स के दो दशकों के अनुभव के आधार पर विस्तारित ब्रिक्स में राजनीतिक एवं सुरक्षा, आर्थिक एवं वित्तीय तथा सांस्कृतिक एवं लोगों के बीच संपर्क के तीन स्तंभों के तहत सहयोग को और मजबूत किया जाएगा।
नई दिल्ली घोषणा में कहा गया कि शांति, अधिक प्रतिनिधित्व वाली और निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, मजबूत एवं सुधारित बहुपक्षीय प्रणाली, सतत विकास और समावेशी वृद्धि को बढ़ावा देकर लोगों के हित में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत किया जाएगा। ब्रिक्स देशों ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आउटरीच/ब्रिक्स प्लस संवाद सत्र की मेजबानी के लिए भारत की सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग और एकजुटता को मजबूत करने के प्रयासों को नई गति मिली है।
गाजा में युद्धविराम बनाए रखने की अपील :
ब्रिक्स देशों ने सभी पक्षों से गाजा में युद्धविराम बनाए रखने और मानवीय सहायता की पूर्ण एवं निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने का आग्रह किया। अक्टूबर 2025 के युद्धविराम समझौते के बावजूद जारी हिंसा पर उन्होंने गहरी चिंता जताई। ब्रिक्स ने गाजा से फलस्तीनियों को जबरन विस्थापित करने की नीतियों का भी विरोध किया। समूह ने इस्राइल-फलस्तीन संघर्ष के शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान तथा फलस्तीनी लोगों के वैध अधिकारों के समर्थन की पुष्टि की। इनमें आत्मनिर्णय और वापसी का अधिकार भी शामिल है।
ब्रिक्स ने फलस्तीन को संयुक्त राष्ट्र की पूर्ण सदस्यता दिए जाने के समर्थन को दोहराया। साथ ही दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन किया, जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त 1967 की सीमाओं के भीतर गाजा और पश्चिमी तट समेत एक स्वतंत्र एवं संप्रभु फलस्तीनी राज्य हो और पूर्वी यरुशलम उसकी राजधानी हो।
लेबनान की संप्रभुता के उल्लंघन पर चिंता :
नई दिल्ली घोषणा में ब्रिक्स देशों ने युद्धविराम के लगातार उल्लंघन और लेबनान की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की निंदा की। समूह ने इस्राइल से लेबनान की सरकार के साथ हुए समझौते की शर्तों का सम्मान करने और लेबनान के उन सभी क्षेत्रों से अपनी कब्जे वाली सेनाएं वापस बुलाने का आह्वान किया, जहां वे अभी भी मौजूद हैं।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर जताई चिंता :
ब्रिक्स देशों ने खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई और स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए अधिकतम संयम बरतने का आह्वान किया। समूह ने आम नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर जोर दिया। साथ ही क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता हासिल करने के लिए संवाद और कूटनीति के अधिक इस्तेमाल की अपील की। ब्रिक्स ने वैश्विक व्यापार, आपूर्ति शृंखलाओं और ऊर्जा की सुचारू आवाजाही बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया।
परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमलों को लेकर गंभीर चिंता :
ब्रिक्स ने नागरिक बुनियादी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के सुरक्षा उपायों के तहत आने वाली शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर जानबूझकर किए गए हमलों को लेकर गंभीर चिंता जताई। समूह ने कहा कि सशस्त्र संघर्ष के दौरान भी परमाणु सुरक्षा, संरक्षा और आईएईए के सुरक्षा उपायों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
ब्रिक्स देशों के नेताओं के साथ पीएम मोदी ने किया पौधारोपण :
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत ब्रिक्स में शामिल 10 देशों के वैश्विक नेताओं ने भारत मंडपम में पौधारोपण किया। इससे पहले पीएम मोदी ने ब्रिक्स सदस्य देशों के नेताओं के साथ ग्रुप फोटो खिंचवाई।
ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणापत्र – आपसी सम्मान, संप्रभु समानता और सहयोग की भावना के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई :
ब्रिक्स देशों ने आपसी सम्मान और समझ, संप्रभु समानता, एकजुटता, लोकतंत्र, खुलेपन, समावेशिता, सहयोग और आम सहमति की ब्रिक्स भावना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। नई दिल्ली घोषणापत्र में कहा गया कि ब्रिक्स के दो दशकों के अनुभव के आधार पर विस्तारित ब्रिक्स में सहयोग को और मजबूत किया जाएगा। इसके लिए राजनीतिक और सुरक्षा, आर्थिक और वित्तीय तथा सांस्कृतिक एवं लोगों के बीच संपर्क के तीन स्तंभों के तहत सहयोग बढ़ाया जाएगा।
घोषणापत्र में कहा गया कि शांति, अधिक प्रतिनिधित्व वाली और निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, मजबूत एवं सुधारित बहुपक्षीय प्रणाली, सतत विकास और समावेशी वृद्धि को बढ़ावा देकर लोगों के हित में रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया जाएगा। ब्रिक्स देशों ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान आउटरीच/ब्रिक्स प्लस संवाद सत्र की मेजबानी के लिए भारत की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस पहल से अंतरराष्ट्रीय सहयोग और एकजुटता को मजबूत करने के प्रयासों को नई गति मिली है।
आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा, पहलगाम हमले का भी जिक्र :
ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की कड़ी निंदा की है। नई दिल्ली घोषणापत्र में कहा गया कि आतंकवाद के पीछे कोई भी मकसद हो, वह कहीं भी हुआ हो या उसके पीछे कोई भी व्यक्ति हो, उसकी निंदा की जानी चाहिए। ब्रिक्स के साझा बयान में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की भी निंदा की गई, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे।
ब्रिक्स देशों ने सीमा पार आतंकवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने के खिलाफ लड़ाई के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही कहा कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
घोषणापत्र में आतंकवाद के प्रति ‘शून्य सहनशीलता’ की नीति अपनाने, इसमें शामिल लोगों को जवाबदेह ठहराने और संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित सभी आतंकवादियों तथा आतंकवादी संगठनों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने का आह्वान किया गया। ब्रिक्स देशों ने संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के तहत अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन को जल्द अंतिम रूप देने और उसे अपनाने की भी अपील की।
ब्रिक्स का साझा घोषणापत्र जारी, पीएम मोदी ने क्या कहा?
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान सभी देशों ने साझा घोषणापत्र पर सहमति जताई। साझा घोषणापत्र जारी करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि दोस्तों, आज की हमारी बैठक बहुत सार्थक और रचनात्मक रही है। हमारे विचारों की विविधता के साथ-साथ ब्रिक्स सहयोग के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता भी स्पष्ट रूप से सामने आई है। आज की चर्चा से स्पष्ट है कि बदलते हुए विश्व का संचालन पुराने संस्थानों से नहीं किया जा सकता। रिप्रजेंटेशन, रिस्पॉन्सिवनेस और रूल मेकिंग… तीनों में सुधार आवश्यक है। हमने इस बात पर भी बल दिया कि भविष्य की तकनीक और उनके नियमों के निर्माण में वैश्विक दक्षिण की बराबर भागीदारी होनी चाहिए। निर्णयों और उनके परिणामों के बीच जो दूरी बनी हुई है, उसे पार्टनरशिप और कलेक्टिव एक्शन से कम करना होगा। आज स्वीकार किया गया नई दिल्ली घोषणापत्र हमारे साझा संकल्प को स्पष्ट दिशा देता है। अब हमारी जिम्मेदारी है कि अब इन संकल्पों को ठोस परिणामों में बदलें।
कजाखस्तान के राष्ट्रपति टोकायेव पहुंचे दिल्ली :
कजाखस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट केमेलुली टोकायेव 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली पहुंचे।
शी जिनपिंग बोले- पश्चिम एशिया में शांति कायम करने में चीन उचित भूमिका निभाने को तैयार :
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि चीन पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम करने में अपनी उचित भूमिका निभाने के लिए अन्य ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, शी ने कहा कि युद्ध के कारण पूरे क्षेत्र के लोगों को गंभीर नुकसान हुआ है और यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि चीन इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम करने के लिए ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों के साथ सहयोग करने को तैयार है।
आज जारी होगा ब्रिक्स का संयुक्त बयान :
ब्रिक्स देशों ने सुबह 4 बजे तक चली लंबी बातचीत के बाद एक संयुक्त बयान पर सहमति बना ली है। बातचीत के दौरान कई विवादित मुद्दों पर मतभेद भी सामने आए। भारत ने सदस्य देशों के बीच अलग-अलग विचारों को एक करने और सहमति बनाने के लिए लगातार बातचीत की। यह कामयाबी इसलिए भी खास है क्योंकि ईरान, सऊदी अरब और UAE सभी एक ही मंच का हिस्सा हैं, जबकि कई क्षेत्रीय और भू-राजनीतिक मुद्दों पर उनके बीच गहरे मतभेद और अलग-अलग विचार हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों और बढ़ते तनाव के बीच, ईरान, सऊदी अरब और UAE जैसे देशों के बीच सहमति बनाना एक बहुत मुश्किल कूटनीतिक चुनौती थी। भारत की कूटनीतिक कुशलता ने यह सुनिश्चित किया कि इन मतभेदों से ब्रिक्स की प्रक्रिया न रुके; सदस्य देशों के बीच भू-राजनीतिक विचारों में भारी अंतर के बावजूद, भारत ने एक संयुक्त बयान पर सहमति बनाने का रास्ता साफ किया।
‘ग्लोबल साउथ को रूल मेकर बनाने पर ध्यान केंद्रित करना होगा’ :
पीएम मोदी ने आगे कहा कि वैश्विक संस्थानों में तभी लोगों का विश्वास बनेगा, जब हम कलेक्टिव रिस्पॉन्स पर ध्यान देंगे। सीफेयर का वैश्विक व्यापार में बड़ा योगदान है। लेकिन अक्सर उन्हें मुश्किल आती है। मेरा प्रस्ताव है कि क्या हम आपात मैरीटाइम व्यवस्था बना सकते हैं। भविष्य में रूल मेकिंग के लिए वैश्विक भागीदारी सुनिश्चित करना अहम है। एआई, क्रिटिकल तकनीक, आदि भविष्य की नीति और नियम तय कर रहे हैं। हमें ग्लोबल साउथ को रूल मेकर बनाने पर ध्यान केंद्रित करना होगा। सुखद संयोग से आज यूएन डे फॉर साउथ कोऑपरेशन है। इस दिन पर हमारी ओर से ऐसा निर्णय लिया जाना अहम है। भारत इस मामले में लीड लेने के लिए तैयार है। इस ब्रिक्स समिट का संदेश स्पष्ट होना चाहिए। यदि भविष्य हमारा है, तो इसका निर्णय लेने का अधिकार भी हमारा होना चाहिए।
‘यूएनएससी में सुधार अब टाला नहीं जा सकता’ :
सभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘मैं प्रस्ताव रखता हूं कि हम मिलकर ग्लोबल गवर्नेंस रिफॉर्म के 10 प्रपोजल तैयार करें जिसे हम अगली समिट तक एक ब्रिक्स रिफॉर्म रोडमैप का रूप कर सकते हैं। इस रोडमैप को बनाने में हमें तीन मुख्य पहलुओं- रिप्रेजेटेंशन, रिस्पॉन्सिवनेस और रूल मेकिंग का ध्यान रखना होगा। पहला- रिप्रेजेंटेशन में यूएनएससी में सुधार अब टाला नहीं जा सकता। टैक्स बेस्ड नेगोशिएशन से हमें इस जोड़ना होगा। वित्तीय संस्थानों में वोटिंग पावर, इकोनॉमिक नीति आज की असलियत के आधार पर होनी चाहिए। जो देश ग्लोबल इकोनॉमिक को गति देते हैं उन्हें उचित भूमिका मिलनी चाहिए।’
‘ग्लोबल रिफॉर्म की दिशा भी तय करनी होगी’ :
ब्रिक्स को मजबूत करते हुए हमें ग्लोबल रिफॉर्म की दिशा भी तय करनी होगी। ग्लोबल गवर्नेंस का वर्तमान स्ट्रक्चर एक पिरामिड जैसा दिखाई देताहै। इसके ऊपरी भाग में पावर और जिसीजन मेकिंग केंद्रित है। और नीचे वह देश स्थित हैं, जो इन फैसलों से प्रभावित तो होते हैं, लेकिन अपने आकार की वजह से फैसलों में शामिल नहीं हो पाते।
‘हम एक-दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हैं’ :
ब्रिक्स ने पिछले 20 साल में वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। हम एक-दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हैं और कंसेन्सस से आगे बढ़ते हैं। हम सबको साथ लेकर आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं। समय है कि हम ब्रिक्स में अपनी एकता और सहमति को वैश्विक मंच में ठोस परिणामों में बदलें। अगले 20 साल के लिए हमें एंबिशियस एजेंडे पर काम करना होगा। इसकी शुरुआत हमें खुद के वर्किंग सिस्टम से करनी होगी। ब्रिक्स की अध्यक्षता हर वर्ष बदलती है, लेकिन इसकी वजह से हमारा संस्थागत बढ़ोतरी नहीं रुकनी चाहिए।
ब्रिक्स के 350 से अधिक बैठकों का आयोजन :
ब्रिक्स में राष्ट्राध्यक्षों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘रेजिलियंस, इनोवेशन और कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी हमारी प्राथमिकता रही है। इसके जरिए हमने ब्रिक्स सहयोग को सामान्य जन से जोड़ने पर विशेष बल दिया है। इसी सोच के साथ 350 से अधिक बैठकों का आयोजन किया गया। लगभग 30 शहरों में आपकी टीम्स का स्वागत करने का हमें मौका मिला। ब्रिक्स की अध्यक्षता के समर्थन के लिए मैं आपका हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं। इस साल की ब्रिक्स समिट एक ऐतिहासिक पड़ाव पर है। हम ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ मना रहे हैं।’
जिनपिंग, पुतिन समेत सभी राष्ट्राध्यक्षों का किया स्वागत :
भारत मंडपम में बैठक के लिए पीएम मोदी ने पहुंचने के बाद बैठक में शामिल होने के लिए आए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रुस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन समेत सभी राष्ट्राध्यक्षों का स्वागत किया। इस दौरान प्रधानमंत्री की सभी राष्ट्राध्यक्षों के साथ कमेस्ट्री देखने के लिए मिली।
भारत मंडपम पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी :
ब्रिक्स समिट समारोह की बैठक के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर भारत मंडपम पहुंच चुके हैं। इसके साथ ही बैठक में शामिल होने के लिए आने वाले विदेशी राष्ट्राध्यक्षों का वह स्वागत कर रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, समारोह के साझा बयान पर सहमति बन गई है और यह शाम 4 बजे जारी किया जा सकता है।

