Bihar Cabinet :अंत तक जुड़े-कटे नाम, मंत्रियों के नाम से जातीय समीकरण साधा; नितिन नवीन की बिरादरी गुम
थर्ड आई न्यूज
पटना I बिहार की राजनीति बगैर जाति के नहीं होती है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री के रूप में भारतीय जनता पार्टी ने सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाया। अब जब मंत्रिमंडल विस्तार भी हुआ तो जाति का खेल खूब चला। जाति देखकर ही नामों को जोड़ा गया। एक ही जाति के कई हो जाते, इसलिए मंगल पांडेय जैसे चर्चित नाम काटे भी गए। खास बात यह भी रही कि नीतीश कुमार सरकार में मंत्री रहे नितिन नवीन के भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद कायस्थों की खाली हुई सीट छिन गई है। 243 विधानसभा वाले बिहार में 35-36 मंत्रियों की ही जगह है। बनने को राबड़ी देवी सरकार में संख्या बहुत बढ़ाई भी गई थी, लेकिन नियम 36 से आगे बढ़ने का नहीं है। इस शपथ ग्रहण के साथ मुख्यमंत्री सहित भाजपा के 16, दोनों उप मुख्यमंत्रियों सहित जदयू के 15 मंत्री हैं। इसके अलावा चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के दो, जीतन राम मांझी की हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के एक और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा के एक मंत्री बने हैं।
निशांत का आना, मंगल पांडेय का जाना- चर्चित खबर
जनता दल यूनाईटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार शुरू से परिवारवाद के खिलाफ रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने के पहले उनकी पार्टी ने बेटे निशांत कुमार को सदस्यता दिलाई और आज उनके सामने ही बेटा मंत्री के रूप में शपथ लेता भी दिखा। यह बिहार की राजनीति में सालभर पहले तक किसी ने नहीं सोचा था। इस लिहाज से सबसे ज्यादा चर्चित यही खबर थी। इसके बाद दूसरी चर्चित खबर भाजपा के दिग्गज नेता मंगल पांडेय का सूची से बाहर होना है। दरअसल, नीतीश मिश्रा के अलावा मिथिलेश तिवारी के नाम पर मुहर लगते ही मंगल पांडेय का नाम कट गया। मंगल पांडेय पश्चिम बंगाल के भाजपा प्रभारी हैं और अभी बड़ी जीत के कारण अपनी कुर्सी पक्की भी मान रहे थे। लेकिन, अंत जातीय गणित में नुकसान हो गया।
नितिन नवीन की जाति से कोई मंत्री नहीं बनना भी मुद्दा :
बिहार के मंत्रिमंडल विस्तार के समय से ही दो बातें चल रही थीं। एक तो यह कि पटना से नितिन नवीन अब मंत्री नहीं हैं तो संजीव चौरसिया को मौका दिया जाएगा। संजीव चौरसिया इंतजार ही करते रह गए और अब किसी तरह की संभावना बचती भी नहीं है। रामकृपाल यादव दानापुन से चुनकर आए हैं, वह मंत्री बने हैं। लेकिन, राजधानी पटना यानी शहरी क्षेत्र से सरकार में अब कोई नहीं है। दूसरा मुद्दा भी नितिन नवीन से जुड़ा है। नितिन नवीन की कायस्थ जाति से अब मंत्रिमंडल में कोई सदस्य नहीं है। भाजपा इस जाति के वोटरों पर एकाधिकार समझती है और पश्चिम बंगाल चुनाव के ठीक पहले नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाते समय भी इस एंगल को ध्यान में रखा गया था। लेकिन, अब बिहार के निर्माण की आधारशिला रखने वाली इस जाति से मौजूदा सरकार में कोई एक भी मंत्री की कुर्सी पर नहीं है। सोशल मीडिया पर नितिन नवीन से जुड़े इन दोनों मुद्दों पर लोग भड़ास निकाल रहे हैं।
भाजपा के मंत्रियों की जाति
1.राम कृपाल यादव – OBC
2.केदार गुप्ता – कानू/ EBC
3.नीतीश मिश्रा – ब्राह्मण
- मिथिलेश तिवारी – ब्राह्मण
- रमा निषाद – EBC / मल्लाह
- विजय कुमार सिन्हा – भूमिहार
- दिलीप जायसवाल – EBC
- प्रमोद चंद्रवंशी – EBC
- लखेन्द्र पासवान – दलित
- संजय टाइगर- राजपूत
- इंजीनियर कुमार शैलेन्द्र- भूमिहार
- नंद किशोर राम- दलित
- रामचंद्र प्रसाद – वैश्य/ OBC
- अरुण शंकर प्रसाद – सूढ़ी/ EBC
- श्रेयसी सिंह- राजपूत
जदयू के मंत्रियों की जाति
- निशांत कुमार- कुर्मी/ OBC
- श्रवण कुमार – कुर्मी/ OBC
- अशोक चौधरी- दलित
- लेसी सिंह- राजपूत
- मदन सहनी- मल्लाह/ EBC
- सुनील कुमार- दलित
- जमा खान- अल्पसंख्यक
- भगवान सिंह कुशवाहा- कोइरी/ OBC
- शीला मंडल- धानुक / EBC
- दामोदर राउत – धानुक/ EBC
- बुलो मंडल- गंगोता/ EBC
- रत्नेश सदा- दलित
- श्वेता गुप्ता- बनिया
लोजपा (आर) के मंत्री की जाति
- संजय पासवान- दलित
- संजय सिंह – राजपूत
हम-से के मंत्री की जाति
- संतोष मांझी- दलित
रालोमो के मंत्री की जाति
- दीपक प्रकाश – कुशवाहा

