देर आयद, दुरुस्त आयद : क्रिकेट सट्टेबाजी के बड़े नेटवर्क पर ईडी का शिकंजा, बाजोरिया ब्रदर्स व विकास अग्रवाल की निशानदेही पर कई अन्य भी राडार पर
थर्ड आई न्यूज़
गुवाहाटी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गुवाहाटी, तिनसुकिया और नई दिल्ली में कथित आईपीएल सट्टेबाजी तथा उससे जुड़े धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) नेटवर्क के खिलाफ की गई कार्रवाई को देर से उठाया गया लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वर्षों से चल रहे इस कारोबार पर आखिरकार केंद्रीय एजेंसी की सीधी कार्रवाई ने यह संकेत दिया है कि अब केवल छोटे-मोटे मामलों तक सीमित रहने के बजाय पूरे नेटवर्क की आर्थिक जड़ों तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा।
ईडी की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार यह कार्रवाई गुवाहाटी के दीपेश बाजोरिया, रोनक बाजोरिया, राजेश जैन, विकास अग्रवाल, सुप्रित बिस्वास तथा तिनसुकिया के विकास बेड़िया , नितिन बेड़िया और दुर्गा प्रसाद बेड़िया समेत अन्य लोगों से जुड़े परिसरों पर की गई। जांच एजेंसी ने बताया कि यह कार्रवाई आईपीएल क्रिकेट सट्टेबाजी के एक बड़े संगठित नेटवर्क और उससे अर्जित धन के निवेश एवं लेयरिंग की जांच के सिलसिले में की गई है।
छापेमारी के दौरान लगभग 13 लाख रुपये नकद, एक मर्सिडीज-बेंज कार, एक एमजी हेक्टर वाहन, एक फॉर्च्यूनर तथा बड़ी मात्रा में मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं। इसके अलावा कई बैंक खातों को भी जांच के दायरे में लिया गया है।
सामाजिक हलकों का कहना है कि यह कार्रवाई स्वागत योग्य जरूर है, लेकिन यह सवाल भी उठता है कि इतने वर्षों तक यह कारोबार आखिर फलता-फूलता कैसे रहा। क्रिकेट सट्टेबाजी अब केवल आईपीएल तक सीमित नहीं रह गई है। दुनिया में कहीं भी कोई क्रिकेट टूर्नामेंट चल रहा हो, उस पर ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से बड़े पैमाने पर दांव लगाए जाते हैं। मोबाइल फोन और डिजिटल भुगतान व्यवस्था ने इस अवैध कारोबार को पहले से कहीं अधिक व्यापक बना दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रवृत्ति का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव युवा पीढ़ी पर पड़ रहा है। आसान पैसे के लालच में बड़ी संख्या में युवा जुए और सट्टेबाजी की लत के शिकार हो रहे हैं। अनेक परिवार आर्थिक संकट, कर्ज और सामाजिक विघटन का सामना कर रहे हैं, जबकि सट्टेबाजी सिंडिकेट लगातार अपना दायरा बढ़ाते जा रहे हैं।
जानकारों का यह भी कहना है कि जिन लोगों के यहां हालिया छापेमारी हुई है, वे केवल क्रिकेट बेटिंग तक सीमित नहीं हैं। जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि कथित तौर पर इनका संबंध अन्य प्रकार के जुए और सट्टेबाजी गतिविधियों से भी रहा है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से इन नामों की चर्चा विभिन्न अवैध सट्टा गतिविधियों से जुड़ी रही है।
सूत्रों के अनुसार ईडी को छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में डिजिटल डाटा, संपर्क सूत्र और वित्तीय लेन-देन से संबंधित जानकारी हाथ लगी है। माना जा रहा है कि इन जानकारियों के आधार पर जांच का दायरा और विस्तृत होगा। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण से इस नेटवर्क से जुड़े कई अन्य प्रभावशाली चेहरे भी सामने आ सकते हैं। सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी मछलियां भी ईडी के जाल में फंस सकती हैं।
फिलहाल इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि जांच अपनी तार्किक परिणति तक पहुंची तो पूर्वोत्तर में वर्षों से सक्रिय सट्टेबाजी नेटवर्क के कई चौंकाने वाले पहलू उजागर हो सकते हैं। समाज की अपेक्षा है कि यह अभियान केवल छापेमारी तक सीमित न रहे, बल्कि अवैध सट्टेबाजी के पूरे तंत्र को ध्वस्त करने की दिशा में निर्णायक कदम साबित हो। क्योंकि जब तक इस कारोबार की आर्थिक रीढ़ नहीं तोड़ी जाएगी, तब तक युवा पीढ़ी को इसकी गिरफ्त से बचा पाना आसान नहीं होगा।

