हिमंत विश्व शर्मा से मुलाकात के बाद बढ़ीं अटकलें, सुष्मिता देव ने की टीएमसी छोड़ने की पुष्टि

थर्ड आई न्यूज

गुवाहाटी, 10 जून। पूर्व सिलचर सांसद और राज्यसभा सदस्य सुष्मिता देव ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़ने की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। राज्यसभा से इस्तीफा देने के एक दिन बाद उनके इस बयान ने असम की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। खासकर, नई दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा से उनकी मुलाकात के बाद उनके भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं।

मीडिया से बातचीत के दौरान सुष्मिता देव ने कहा, “मैंने तृणमूल कांग्रेस छोड़ दी है। मैंने टीएमसी क्यों छोड़ी, यह एक लंबी कहानी है। मैं ऐसी स्थिति में नहीं रहना चाहती जहां मैं एक साथ दो नावों पर सवार रहूं। मैं ममता दीदी के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करूंगी।”

यह पहली बार है जब सुष्मिता देव ने सार्वजनिक रूप से टीएमसी से अलग होने की पुष्टि की है। हालांकि, उन्होंने पार्टी छोड़ने के पीछे के कारणों का खुलासा नहीं किया और न ही टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी पर कोई टिप्पणी की।

इस घटनाक्रम के बीच सबसे अधिक चर्चा उनकी नई दिल्ली में मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा से हुई मुलाकात को लेकर हो रही है। राज्यसभा से इस्तीफा सौंपने के तुरंत बाद दोनों नेताओं की मुलाकात की खबरों ने राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें तेज कर दी हैं कि सुष्मिता देव जल्द ही भाजपा का दामन थाम सकती हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

सुष्मिता देव का राजनीतिक सफर भी काफी महत्वपूर्ण रहा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता स्वर्गीय संतोष मोहन देव की पुत्री सुष्मिता देव ने 2014 से 2019 तक कांग्रेस सांसद के रूप में असम की बराक घाटी स्थित सिलचर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद उन्होंने 2021 में कांग्रेस छोड़कर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा था। उस समय टीएमसी पश्चिम बंगाल से बाहर अपने राजनीतिक विस्तार का प्रयास कर रही थी।

टीएमसी में शामिल होने के बाद सुष्मिता देव पार्टी के प्रमुख राष्ट्रीय चेहरों में शामिल हो गईं। उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया और बाद में राज्यसभा भेजा गया, जहां उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर पार्टी का पक्ष प्रभावी ढंग से रखा।

उनका इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब टीएमसी आंतरिक चुनौतियों का सामना कर रही है। हाल ही में पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने भी राज्यसभा की सदस्यता और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपने इस्तीफे में टीएमसी पर भ्रष्टाचार, प्रशासनिक विफलताओं और पश्चिम बंगाल से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों की अनदेखी करने के आरोप लगाए थे।

लगातार हो रहे इन इस्तीफों ने तृणमूल कांग्रेस की आंतरिक एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं और विपक्षी दलों को राजनीतिक हमला करने का अवसर प्रदान किया है।

असम की राजनीति के दृष्टिकोण से सुष्मिता देव का यह कदम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बराक घाटी की प्रभावशाली नेताओं में शुमार सुष्मिता देव का अगला राजनीतिक कदम सभी की निगाहों में रहेगा। यदि वह भाजपा में शामिल होती हैं, तो यह पिछले पांच वर्षों में उनका दूसरा बड़ा राजनीतिक परिवर्तन होगा और इससे दक्षिणी असम में भाजपा की राजनीतिक पकड़ और मजबूत हो सकती है।

हालांकि, सुष्मिता देव ने टीएमसी से अलग होने की पुष्टि कर दी है, लेकिन उन्होंने अभी तक अपने भविष्य की राजनीतिक योजनाओं का खुलासा नहीं किया है। ऐसे में उनके अगले कदम को लेकर राजनीतिक अटकलों का दौर जारी है।

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