श्री श्यामचंद्र कृपालु
विनोद रिंगानिया श्री श्यामचन्द्र कृपालु मन, हरण भवभय दारुणम्।नव कंज लोचन कंज मुख, कर कंज पद कंजारुणम्॥ इन पंक्तियों का वाचन करने के पश्चात सी.एम. बाबू ने प्रश्नवाचक दृष्टि से रामसेवक जी की ओर देखा। यह श्याम बाबा पर लिखी कविता है न?जी सर, उन्हीं पर।बहुत सुंदर है। लेकिन आपने काफी कठिन शब्दों का प्रयोग…

