डाक्टर चौथमल

विनोद रिंगानिया शर्मा जल्दी-जल्दी डग भरते हुए सीएम बाबू के दफ्तर में घुस गया। उसके दिमाग के अंदर आज एक धांसू आइडिया आ रखा है और इसी आइडिया ने उसके पूरी बदन में स्फूर्ति ला दी है। सीएम बाबू अपनी कुर्सी पर बैठे थे, हमेशा की तरह। एक अखबार पर आंखें गड़ाए हुए थे। शर्मा…

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डाक्टर चौथमल

विनोद रिंगानिया शर्मा जल्दी-जल्दी डग भरते हुए सीएम बाबू के दफ्तर में घुस गया। उसके दिमाग के अंदर आज एक धांसू आइडिया आ रखा है और इसी आइडिया ने उसके पूरी बदन में स्फूर्ति ला दी है। सीएम बाबू अपनी कुर्सी पर बैठे थे, हमेशा की तरह। एक अखबार पर आंखें गड़ाए हुए थे। शर्मा…

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श्री श्यामचंद्र कृपालु

विनोद रिंगानिया श्री श्यामचन्द्र कृपालु मन, हरण भवभय दारुणम्।नव कंज लोचन कंज मुख, कर कंज पद कंजारुणम्॥ इन पंक्तियों का वाचन करने के पश्चात सी.एम. बाबू ने प्रश्नवाचक दृष्टि से रामसेवक जी की ओर देखा। यह श्याम बाबा पर लिखी कविता है न?जी सर, उन्हीं पर।बहुत सुंदर है। लेकिन आपने काफी कठिन शब्दों का प्रयोग…

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