‘BJP की बढ़ती ताकत, विजय की चौंकाने वाली जीत’: अमेरिका से पाकिस्तान और UK से बांग्लादेश तक क्या बोला मीडिया?

थर्ड आई न्यूज

नई दिल्ली l चार राज्यों- पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और एक केंद्र शासित प्रदेश- पुदुचेरी के चुनावी नतीजों का एलान हो चुका है। जहां असम में भाजपा ने अपनी सरकार बचाए रखी तो वहीं पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के किले को भेदने में सफलता हासिल की। वहीं, तमिलनाडु में सत्तासीन द्रमुक और मुख्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक को दो साल पहले राजनीति में आए विजय और उनकी पार्टी- तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) से करारी हार मिली। इसी तरह केरल में भी सत्ता परिवर्तन हुआ और कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ ने लेफ्ट को हरा दिया। इसी के साथ अब देश में कहीं भी वाम दल की सरकार नहीं बची।

इन चुनाव नतीजों पर न सिर्फ पूरे देश की नजर, बल्कि विदेश में बैठे लोगों की नजर भी रही। विदेशी मीडिया ने भी इस चुनाव को जोर-शोर से कवर किया और चुनावी खबरों के साथ-साथ विश्लेषण पेश किए। आइये जानते हैं कि अलग-अलग देशों में मीडिया समूहों ने चुनावों पर क्या कुछ कहा…

अमेरिका में मीडिया ने चुनाव पर क्या कहा?
भारत के हालिया राज्य चुनावों, विशेषकर पश्चिम बंगाल के नतीजों को अमेरिकी मीडिया ने बहुत प्रमुखता से कवर किया है। अमेरिकी मीडिया ने इसे भारतीय राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा है। अमेरिकी मीडिया ने इन चुनावों को प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा की बढ़ती ताकत और भारत में क्षेत्रीय विपक्षी ताकतों के सिकुड़ते प्रभाव के रूप में रिपोर्ट किया है।

द न्यूयॉर्क टाइम्स :
इस अमेरिकी अखबार ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की सफलता को ऐतिहासिक करार दिया। अपनी रिपोर्ट में अखबार ने लिखा कि पीएम मोदी की हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को नया रूप देने के अपने दशकों लंबे अभियान में एक नया मुकाम हासिल किया है, क्योंकि इससे पहले वह इस राज्य में सत्ता के करीब कभी नहीं पहुंची थी।

अखबार ने इसे ममता बनर्जी के 15 साल के शासन के अंत और टीएमसी के पतन के रूप में प्रमुखता से छापा।

हालांकि, न्यूयॉर्क टाइम्स ने विवादों का भी जिक्र किया, जिसमें चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची से लाखों नामों (जिनमें कई मुस्लिम थे) को हटाए जाने की बात शामिल है।

इसके अलावा, तमिलनाडु को लेकर अखबार ने कहा कि राजनीति में नए आए अभिनेता जोसेफ विजय की जीत इन चुनावों के सबसे बड़े आश्चर्यों में से एक थी।

द वाशिंगटन पोस्ट :
वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्थिति को उनके तीसरे कार्यकाल के बीच में काफी मजबूती देने वाले होंगे। रिपोर्ट में बताया गया कि 2024 के आम चुनाव में सरकार बनाने के लिए क्षेत्रीय सहयोगियों पर निर्भर रहने के बाद, अब यह जीत मोदी को 2029 में रिकॉर्ड चौथे कार्यकाल के लिए मजबूत दावेदार बनाती है।

अखबार ने दक्षिण भारत, खासकर केरल के चुनाव पर भी ध्यान केंद्रित किया। उसने लिखा कि केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष ने सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट सरकार को हरा दिया, जिससे देश में वामपंथियों के आखिरी मजबूत गढ़ों में से एक का अंत हो गया।

एसोसिएटेड प्रेस एजेंसी :
अमेरिकी समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (एफी) ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सत्तारूढ़ हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी ने विपक्ष के गढ़ पश्चिम बंगाल पर सफलतापूर्वक जीत हासिल की। एजेंसी के मुताबिक, इस चुनाव नतीजे से राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने वाली ममता बनर्जी की ताकत और प्रभाव में कमी आएगी।

अन्य राज्यों के नतीजों पर एपी ने कहा कि तमिलनाडु में फिल्म स्टार जोसेफ विजय ने सत्तारूढ़ डीएमके को सत्ता से बेदखल कर दिया, केरल में कांग्रेस ने वामपंथियों को हराया और असम में भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में वापस लौटी।

सीएनबीसी :
सीएनबीसी ने भारत के चुनाव परिणामों का विश्लेषण मुख्य रूप से आर्थिक सुधारों और विदेशी निवेश के नजरिए से किया है। इसकी रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत ने प्रधानमंत्री मोदी की राजनीतिक पकड़ को ऐसे समय में फिर से मजबूत किया है जब उनकी लोकप्रियता घटती दिख रही थी। विशेषज्ञों ने सीएनबीसी को बताया कि यह जीत सरकार को पश्चिम एशिया के युद्ध के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट से निपटने और ईंधन की कीमतें बढ़ाने जैसे कड़े फैसले लेने के लिए राजनीतिक रूप से मजबूत करेगी।

सीएनबीसी के मुताबिक, इस जीत से मिले मजबूत जनादेश के बाद सरकार को अपनी कल्याणकारी योजनाओं और ईंधन सब्सिडी के भारी खर्चों को तर्कसंगत बनाने का मौका मिल सकता है। इस पोर्टल ने इसका भी जिक्र किया है कि राज्य चुनावों की इन जीतों से संसद के ऊपरी सदन (राज्यसभा) में भाजपा और उसके सहयोगियों को लगभग दो-तिहाई बहुमत मिल जाएगा, लेकिन कड़े आर्थिक सुधारों को पारित करने के लिए निचले सदन (लोकसभा) में अभी भी एक मजबूत जनादेश की कमी है।

  1. ब्रिटिश मीडिया ने चुनावों पर क्या विश्लेषण पेश किया?
    ब्रिटिश मीडिया ने भी भारत के पांच राज्यों (विशेषकर पश्चिम बंगाल) के चुनाव परिणामों को बहुत प्रमुखता से कवर किया। ब्रिटिश अखबारों और मीडिया पोर्टल्स ने इसे भारतीय राजनीति में एक बड़े बदलाव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक जीत के रूप में देखा है।

बीबीसी :
बीबीसी ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत को भारत के सबसे कठिन राजनीतिक युद्धक्षेत्रों में से एक में बड़ी सफलता बताया। अपनी रिपोर्ट में बीबीसी ने कहा कि यह जीत पीएम मोदी के 12 साल के कार्यकाल की सबसे अहम उपलब्धियों में से एक मानी जा सकती है। बीबीसी के मुताबिक, यह केवल तीन बार से सत्ता में रही सरकार (ममता बनर्जी) की हार नहीं है, बल्कि पूर्वी भारत में भाजपा के गहरे विस्तार को भी दर्शाता है।

द गार्डियन :
द गार्डियन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की अभूतपूर्व जीत का भारत के राजनीतिक परिदृश्य पर जबरदस्त असर पड़ेगा और यह पहले से ही कमजोर विपक्ष के लिए एक और बड़ा झटका है। अखबार ने लिखा कि यह जीत पूर्वी भारत में भाजपा के प्रभाव को बढ़ाती है और देश भर में मोदी की ताकत को मजबूत करती है।

द गार्डियन ने चुनाव से जुड़े विवादों का भी विस्तार से जिक्र किया। अखबार ने लिखा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची से लाखों मतदाताओं के नाम हटाए गए। अखबार ने कहा कि इनसे अल्पसंख्यक निशाना बने। अखबार ने आलोचकों के हवाले से इसे भाजपा के पक्ष में चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास बताया।

दक्षिण भारत के राज्यों को लेकर गार्डियन ने तमिलनाडु में अभिनेता जोसेफ विजय की जीत को एक बड़ा चुनावी झटका बताया और केरल में वामपंथियों पर कांग्रेस की जीत को भी चिह्नित किया।

फाइनेंशियल टाइम्स :
इस प्रमुख ब्रिटिश अखबार ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत को ऐतिहासिक और राज्य की राजनीति में टेक्टोनिक शिफ्ट (भूकंप जैसा बदलाव) करार दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस जीत से प्रधानमंत्री मोदी की राजनीतिक स्थिति ऐसे समय में काफी मजबूत हुई है, जब भारत अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से आर्थिक चुनौतियों जैसे- ऊर्जा संकट और महंगाई का सामना कर रहा है।

अखबार ने मतदाता सूची से एसआईआर के जरिए लाखों नाम हटाए जाने के विवाद का भी जिक्र किया। अखबार ने जिक्र किया है कि इसे चुनाव आयोग ने अवैध प्रवासियों को हटाने के लिए अहम कदम बताया था, जबकि विपक्ष ने इसे अपने खिलाफ लूट कहा।

इस अखबार ने यह भी रिपोर्ट किया कि असम में भाजपा की सत्ता में वापसी हुई है, केरल में कांग्रेस-नीत गठबंधन ने कम्युनिस्टों को हराया है, और तमिलनाडु में अभिनेता जोसेफ विजय की नई पार्टी ने सत्तारूढ़ दल को सत्ता से बेदखल कर दिया है।

संक्षेप में कहा जाए तो ब्रिटिश मीडिया ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत को पूर्वी भारत में पार्टी के ऐतिहासिक विस्तार के रूप में देखा है। साथ ही, तमिलनाडु में एक फिल्म स्टार की आश्चर्यजनक जीत और केरल में वामपंथ के पतन को भी ब्रिटिश मीडिया में प्रमुख स्थान मिला है।

मुस्लिम बहुल देशों ने कैसे की चुनावों की रिपोर्टिंग :
मुस्लिम बहुल देशों और उनके प्रमुख मीडिया संस्थानों ने भारत के चुनाव परिणामों की अलग-अलग पहलुओं से रिपोर्टिंग की है। इनमें मुख्य रूप से कतर का अल जजीरा, पाकिस्तान का द डॉन और बांग्लादेश के कुछ मीडिया संस्थानों की प्रतिक्रियाएं शामिल हैं।

  1. अल जजीरा
    कतर स्थित प्रमुख न्यूज नेटवर्क अल जजीरा ने पश्चिम बंगाल के नतीजों पर रिपोर्टिंग करते हुए भाजपा के उस आरोप का खास तौर पर जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि ममता बनर्जी की राजनीति अल्पसंख्यक तुष्टिकरण पर केंद्रित थी। इसके साथ ही नेटवर्क ने यह भी नोट किया कि इस आलोचना के बावजूद टीएमसी ने राज्य में 15 साल तक शासन किया, और इसी अवधि के दौरान भाजपा एक छोटी पार्टी से बढ़कर एक मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरी।
  2. द डॉन :
    पाकिस्तान के इस प्रमुख अखबार ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत को प्रधानमंत्री मोदी की राष्ट्रवादी पार्टी की तरफ से अपने प्रतिद्वंद्वी के लंबे समय से चले आ रहे गढ़ पर कब्जा करने के रूप में रिपोर्ट किया। अखबार ने लिखा है कि इस जीत से 2029 के आम चुनावों से पहले मोदी की स्थिति मजबूत होगी, जिससे उनकी सरकार को उच्च बेरोजगारी और लंबित अमेरिकी व्यापार समझौते जैसी आर्थिक और विदेश नीति संबंधी चुनौतियों से निपटने में काफी मदद मिलेगी।
  3. ढाका ट्रिब्यून :
    बांग्लादेश के इस समाचार पत्र ने अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए तमिलनाडु के बड़े चुनावी झटके पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया। रिपोर्ट में इस बात को प्रमुखता दी गई कि अनुभवी राजनेता और मुख्यमंत्री एमके. स्टालिन अपनी सीट हार गए और उनकी पार्टी द्रमुक, अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय की नई गठित पार्टी से काफी पीछे दूसरे स्थान पर रही।

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