आर्य नगर विवाद को नलबाड़ी एनकाउंटर और गोआलपाड़ा बीफ विवाद से ध्यान भटकाने के लिए उछाला गया : मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा
थर्ड आई न्यूज
गुवाहाटी, 13 जून। असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने दावा किया है कि गुवाहाटी के आर्य नगर की हालिया घटना को राज्य में हुई दो अन्य प्रमुख घटनाओं—नलबाड़ी एनकाउंटर मामले और गोआलपाड़ा बीफ-टिफिन विवाद—से जनता का ध्यान भटकाने के उद्देश्य से अत्यधिक प्रचारित किया गया।
कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्य नगर की घटना को उस समय प्रमुखता से उछाला गया, जब नलबाड़ी और गोआलपाड़ा से जुड़े मामलों को लेकर राज्यभर में व्यापक चर्चा चल रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि आर्य नगर प्रकरण को एक विशेष नैरेटिव के तहत प्रस्तुत किया गया, जिससे अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे चर्चा के केंद्र से हट जाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शुरुआत में आर्य नगर की घटना को असमिया और बिहारी समुदायों के बीच टकराव के रूप में प्रस्तुत किया गया था, लेकिन बाद की जांच में मामला कथित तौर पर उगाही (एक्सटॉर्शन) से जुड़े विवाद की ओर संकेत करता दिखाई दिया।
उन्होंने नलबाड़ी मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि यह घटना 1 जून को हुए पुलिस एनकाउंटर से जुड़ी है, जिसमें आशिक अली उर्फ रोज अली की मौत हुई थी। पुलिस के अनुसार, रोज अली पर एक 18 वर्षीय युवती पर हमला करने तथा उसके 19 वर्षीय चचेरे भाई एवं स्थानीय छात्र नेता मधुरज्य बर्मन की हत्या करने का आरोप था। पुलिस का दावा है कि हत्या में प्रयुक्त हथियार की बरामदगी के लिए ले जाते समय आरोपी ने एक पुलिसकर्मी की सर्विस राइफल छीनकर गोलीबारी की, जिसके जवाब में हुई कार्रवाई में उसकी मौत हो गई। इस घटना को लेकर पूरे असम में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक बहस छिड़ गई थी।
वहीं, गोआलपाड़ा बीफ-टिफिन विवाद का जिक्र करते को मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकारी विद्यालय में टिफिन बॉक्स में गोमांस लाए जाने के आरोप के बाद एक नाबालिग छात्र को हिरासत में लिया गया था तथा उसकी मां को भी गिरफ्तार किया गया था। इस घटना के बाद पुलिस कार्रवाई, जन विरोध प्रदर्शन और सांप्रदायिक सौहार्द को लेकर बहस तेज हो गई थी। साथ ही कुछ विद्यार्थियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना भी जताई गई थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्य नगर मामले को लेकर सार्वजनिक विमर्श में अत्यधिक जोर दिया गया, जबकि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों ने इसे केवल जातीय टकराव का मामला मानने पर सवाल खड़े किए हैं।पर उनका कहना था कि इस प्रकरण के कारण नलबाड़ी और गोआलपाड़ा से जुड़े गंभीर मुद्दों पर होने वाली चर्चाएं प्रभावित हुईं।
उल्लेखनीय है कि आर्य नगर की घटना उस समय सुर्खियों में आई थी, जब कथित अवैध मादक पदार्थ गतिविधियों के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान झड़पें हुई थीं। इस घटना में एक पुलिस अधिकारी और कुछ मीडियाकर्मी सहित कई लोग घायल हुए थे। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और पोस्टों में इसे असमिया-बिहारी समुदायों के बीच तनाव से जोड़कर प्रस्तुत किया गया था, हालांकि मामले की जांच अभी जारी है।
मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि आर्य नगर विवाद को अन्य मामलों से ध्यान हटाने के लिए जानबूझकर उछाले जाने का उनका यह बयान एक राजनीतिक आकलन है। इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि असम के बाहर देश के विभिन्न हिस्सों में राज्य के 25 लाख से अधिक युवा काम कर रहे हैं। आर्य नगर जैसी घटनाओं से उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है। उन्होंने कहा कि इस तरह के विवाद को बढ़ावा देने के बजाय यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि असम के अधिक से अधिक युवा प्रशासनिक सेवाओं में जाकर अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करें। उन्होंने कहा कि राज्य के अधिकतर प्रशासनिक अधिकारी एवं सेना के शीर्ष अधिकारी हिंदी भाषी क्षेत्र के लोग हैं। आर्य नगर जैसी घटनाओं के बाद उन लोगों से बात करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग फेक फेसबुक अकाउंट खोलकर इस तरह की घटनाओं के समय दुष्प्रचार करना आरंभ कर देते हैं। ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है।

