होजाई में ‘पंचपदी अधिगम पद्धति’ पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ

रमेश मुंदड़ा

होजाई, 2 जुलाई। विद्याभारती, होजाई विभाग के तत्वावधान में दक्षिण विद्यानगर स्थित शंकरदेव विद्या निकेतन में गुरुवार से दो दिवसीय ‘पंचपदी अधिगम पद्धति’ विषयक कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। 2 एवं 3 जुलाई तक आयोजित इस कार्यशाला में होजाई विभाग के अंतर्गत संचालित 31 विद्यालयों के लगभग 350 प्रधानाचार्य, प्रधानाचार्याएं तथा शिक्षक-शिक्षिकाएं भाग ले रहे हैं।

उद्घाटन समारोह में रवींद्रनाथ ठाकुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. मंजीत सेकिया ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (एनईपी-2020) के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने में पंचपदी अधिगम पद्धति की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल-आधारित, विद्यार्थी-केंद्रित और अनुभवात्मक शिक्षण प्रणाली को अपनाने पर विशेष बल दिया।

कार्यशाला के प्रारंभिक सत्र को संबोधित करते हुए विद्याभारती, होजाई विभाग के विभाग निरीक्षक बिमल धरे ने कहा कि विद्याभारती की शिक्षा-दृष्टि तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के लक्ष्यों को साकार करने के लिए पंचपदी पाठ योजना एक प्रभावी शिक्षण पद्धति है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला के माध्यम से शिक्षकों को कक्षा शिक्षण को अधिक सृजनात्मक, सहभागितापूर्ण और परिणामोन्मुख बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इस अवसर पर शंकरदेव विद्या निकेतन, दक्षिण विद्यानगर की प्रबंध समिति के अध्यक्ष ने स्वागत भाषण देते हुए सभी अतिथियों, विषय विशेषज्ञों, प्रधानाचार्यों और शिक्षकों का अभिनंदन किया तथा कार्यशाला की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।

आयोजकों के अनुसार, इस दो दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य पंचपदी पाठ योजना के माध्यम से कक्षा शिक्षण की गुणवत्ता, प्रभावशीलता और आनंदमय वातावरण को बढ़ाना है। साथ ही शिक्षकों को ऐसा प्रशिक्षण प्रदान करना है, जिससे वे विद्यार्थियों में रचनात्मक चिंतन, आलोचनात्मक विश्लेषण, सहयोगात्मक अधिगम, प्रभावी संचार और समस्या समाधान जैसे 21वीं सदी के आवश्यक कौशल विकसित कर सकें।
आयोजकों के अनुसार, इस दो दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य पंचपदी पाठ योजना के माध्यम से कक्षा शिक्षण की गुणवत्ता, प्रभावशीलता और आनंदमय वातावरण को बढ़ाना है। साथ ही शिक्षकों को ऐसा प्रशिक्षण प्रदान करना है, जिससे वे विद्यार्थियों में रचनात्मक चिंतन, आलोचनात्मक विश्लेषण, सहयोगात्मक अधिगम, प्रभावी संचार और समस्या समाधान जैसे 21वीं सदी के आवश्यक कौशल विकसित कर सकें।

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