‘ममता बनर्जी बनीं गांधारी’: टीएमसी के बागी गुट ने दिया एक महीने का अल्टीमेटम, कहा- अभिषेक का साथ छोड़ें
थर्ड आई न्यूज
नई दिल्ली I तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ विधायक मदन मित्रा ने मंगलवार को पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को एक महीने का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि वह अभिषेक बनर्जी का साथ छोड़कर फिर से जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच लौटें। वहीं, उन्होंने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से अपनी ‘गलतियां’ स्वीकार करने की भी अपील की।
ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी के बागी गुट की ओर से मेयो रोड पर आयोजित 21 जुलाई शहीद दिवस रैली में बोलते हुए मदन मित्रा ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दोनों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों ने कार्यकर्ताओं को किनारे कर दिया और संगठन को टूटने की स्थिति में पहुंचा दिया।
मदन मित्रा ने ममता बनर्जी को दिया क्या अल्टीमेटम?
मदन मित्रा ने कहा, “मैं ममता बनर्जी को एक महीने का समय दे रहा हूं। अभिषेक का हाथ छोड़िए और तृणमूल के कार्यकर्ताओं का हाथ थामिए। टीएमसी अभिषेक की पार्टी नहीं है, यह कार्यकर्ताओं की पार्टी है। आखिर सब कुछ अभिषेक के इर्द-गिर्द ही क्यों घूमे?” मदन मित्रा ने कहा, “पार्टी के तीन हिस्सों में बंटने के लिए कौन जिम्मेदार है? आपको न तो अभिषेक ने मुख्यमंत्री बनाया और न ही उन फिल्मी सितारों ने, जिन्हें आप इतना महत्व देती हैं। आपको लाखों तृणमूल कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री बनाया, जिन्होंने आपके लिए मेहनत की।”
कामरहाटी से विधायक मित्रा ने कहा कि अगर ममता बनर्जी अभिषेक का समर्थन छोड़कर कार्यकर्ताओं के बीच लौटती हैं तो पार्टी उन्हें खुले दिल से स्वीकार करेगी। महाभारत के पात्र गांधारी का जिक्र करते हुए मदन मित्रा ने कहा कि ममता बनर्जी अब गांधारी की भूमिका निभा रही हैं। उनका कहना था कि वह पार्टी के भीतर हो रही घटनाओं से परिचित हैं, लेकिन चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने कहा, “अगर उनमें हिम्मत है तो इस मंच पर आएं और माफी मांगें। उन्हें सिर्फ एक बार यह स्वीकार करना होगा कि उन्होंने गांधारी जैसा व्यवहार किया। इसके बाद कोई उन पर अंडा तक नहीं फेंकेगा।”
इस रैली में टीएमसी विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा, “हम शहीदों को ‘मुआवजा’ देने का दावा करने का अहंकार नहीं रखते। ईडी द्वारा खातों को फ्रीज करने के संबंध में हमारा मुद्दा यह है कि अकेले वार्षिक ब्याज ही एक हजार करोड़ रुपये से अधिक है, तो यह ब्याज किसके लिए है? क्या यह हमारे चाची-भतीजे की जेब में जाएगा, या जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं तक पहुंचना चाहिए?”
21 जुलाई के शहीदों को 10 हजार प्रतिमाह देने का एलान :
उन्होंने कहा, “हमने अपने सभी दस्तावेज चुनाव आयोग को सौंप दिए हैं और जरूरत पड़ने पर हम अन्य सभी दस्तावेज भी उपलब्ध कराएंगे। हमें उम्मीद है कि चुनाव आयोग हमें मान्यता देगा। पूरी संगठनात्मक संरचना और निर्वाचित प्रतिनिधि हमारे साथ हैं। जहां तक अरूप रॉय के नेतृत्व में गठित राष्ट्रीय समिति का सवाल है, अगर हमें पार्टी के खातों के संचालन का अधिकार मिलता है, तो हम हर तीन महीने में सभी खर्चों का विवरण सार्वजनिक करेंगे। इसके अलावा, हमारा पहला निर्णय यह सुनिश्चित करना होगा कि पार्टी 21 जुलाई के शहीदों के परिवारों को प्रति माह 10,000 रुपये दें।”

