West Bengal: सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी पर हमला, चोर-चोर के लगे नारे; सांसद बोले- ऐसे हमलों से नहीं डरेंगे
थर्ड आई न्यूज
कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी को शनिवार को सोनारपुर दौरे के दौरान स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। इस दौरान कुछ लोगों ने कथित तौर पर उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की। वह चुनाव बाद हुई हिंसा के एक पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे।
चोर-चोर के नारे लगे :
अभिषेक बनर्जी पर कुछ अज्ञात लोगों ने पत्थर, जूते और अंडे फेंके। आरोप है कि कुछ लोगों ने उन पर लात-घूंसे चलाने की भी कोशिश की। इस दौरान भीड़ ने उनके खिलाफ ‘चोर-चोर’ के नारे लगाए। यह पहली बार है जब एक ऐसे राजनेता के खिलाफ सार्वजनिक नाराजगी खुलकर सामने आई, जिन्हें एक महीने पहले तक पश्चिम बंगाल की सियासत की ताकत का केंद्र माना जा रहा था।
विधानसभा चुनाव के बाद पहला सार्वजनिक कार्यक्रम :
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के 25 दिन बाद यह अभिषेक बनर्जी का पहला सार्वजनिक कार्यक्रम था। वह सोनारपुर नगरपालिका के वार्ड नंबर 9 स्थित विवेकानंदनगर इलाके में चुनाव बाद हिंसा के कथित पीड़ित संजू कर्मकार के परिवार से मिलने पहुंचे थे। उनके इस दौरे की घोषणा शुक्रवार रात को की गई थी।
बंगाल में सत्ता परिवर्तन से पहले तक अभिषेक बनर्जी को जेड-प्लस सुरक्षा मिली हुई थी। बनर्जी जैसे ही अपनी गाड़ी से बाहर निकले, लोगों ने उनका स्वागत ‘चोर-चोर’ के नारों से उनका स्वागत किया। एक स्थानीय महिला ने कहा, वह यहां क्यों आए हैं? शायद पैसे लेने आए हैं। जब डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या हुई थी, तब वह पानीहाटी क्यों नहीं गए?
अभिषेक बनर्जी सुरक्षाकर्मियों के साथ कर्मकार परिवार के घर में दाखिल हुए। भीड़ के आक्रामक होने पर सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें पुलिस का हेलमेट पहनाकर घर के अंदर पहुंचाया। इस दौरान उनकी शर्ट भी फट गई थी।
अभिषेक बनर्जी ने क्या कहा?
टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा, यह सब भाजपा प्रायोजित है। देखिए इन्होंने क्या किया है। यही इनकी लोकतंत्र की मिसाल है। अभी एक महीना भी नहीं हुआ है और पुलिस कहीं नजर नहीं आ रही है।
अभिषेक बनर्जी ने मीडिया से कहा, वे मुझे मारना चाहते हैं। मैं यहां से नहीं जाऊंगा और न ही इस परिवार को छोड़ूंगा, जब तक प्रशासन कार्रवाई नहीं करता। आप देख सकते हैं कि यहां कोई अधिकारी मौजूद नहीं है। पूरी घटना वीडियो में रिकॉर्ड हुई है। मैं इस मामले को राज्यपाल और हाईकोर्ट के संज्ञान में लाऊंगा। उन्होंने अपने साथ मौजूद लोगों को अधिकारियों को फोन करने, व्हाट्सएप संदेश भेजने और जवाब न मिलने पर उसके स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखने के निर्देश दिए।
टीएमसी सांसद ने कहा, अगर मेरे साथ तैनात दो सुरक्षा अधिकारी यह घटना अपने वरिष्ठ अधिकारियों को बता रहे हैं, फिर भी कोई बल मौके पर नहीं पहुंच रहा है, तो साफ है कि उच्च अधिकारी इस पूरी घटना को जारी रखना चाहते हैं और राज्य सरकार की ओर से इसे रोकने की कोई कोशिश नहीं हो रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि जैसे यहां एक मौत हुई है, वैसे ही 2-4 और मौतें हों, तभी उन्हें चैन मिलेगा। उन्हें जो करना है करने दो। हमारे पास सब कुछ रिकॉर्ड है। हम अदालत जाएंगे। मैं इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाऊंगा।
उन्होंने आगे कहा, उन्होंने ईंट फेंकी, अंडे फेंके और पत्थरबाजी की। मुझे बताइए यह क्या है। आसपास खड़े सभी लोग, इलाके के लोग… वे अभी भी हमसे मिल रहे हैं और प्यार व सम्मान से हमारा स्वागत कर रहे हैं। जाकर पूछिए कि यहां हंगामा कौन कर रहा है। हमारे पास पूरे वीडियो सबूत हैं। पास में एक सामुदायिक भवन है, जहां सुबह 11 बजे से गुंडों को रखा गया था, ताकि वे पत्थरबाजी कर सकें। देखिए मेरे चश्मे की हालत क्या हो गई है। उन्होंने ईंट से मेरी आंख पर वार किया, जिससे मैं आंख नहीं खोल पा रहा हूं। उन्होंने मेरी पीठ, छाती, हाथ और पैर पर मुक्के मारे। मैं हेलमेट पहने था, नहीं तो मेरे सिर के दो टुकड़े हो जाते। वे मेरे शरीर को गिरा सकते हैं। लेकिन मेरा हौसला मजबूत है। जुनून और उत्साह अभी भी है और यह सिर झुकेगा नहीं।
टीएमसी ने सरकार पर साधा निशाना :
इस घटना के बाद टीएमसी ने भी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट में लिखा, अपनी बात पर कायम रहते हुए अभिषेक बनर्जी ने दुखी परिवार को छोड़ने से इनकार किया। भाजपा समर्थिक बदमाशों के खौफनाक हमले के बाद भी हमारे राष्ट्रीय महासचिव ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसके बजाय वह एक ऐसे परिवार के साथ खड़े रहे, जो कथित तौर पर भाजपा-समर्थित गुंडों के द्वारा किए गए अकल्पनीय वाली से दुखी था।
करुणा से चलने वाली राजनीति और नफरत से चलने वाली राजनीति में यही अंतर है। शुभेंदु अधिकारी, आज की घटना ने एक बार फिर आपकी राजनीति को सामने ला दिया है, जो डराने-धमकाने, हिंसा और बदले की भावना पर आधारित है।

