श्रीराम कथा श्रवण करने उमड़ा आस्था का सैलाब
थर्ड आई न्यूज़
गुवाहाटी, 9 जून। फैंसी बाजार के सांगानेरिया धर्मशाला में श्री राम कथा सत्संग समिति के तत्वावधान में चल रहे संगीतमयी श्रीराम कथा के चतुर्थ दिन व्यासपीठ पर विराजमान श्रद्धेय योगी निवृतिनाथ महाराज ने प्रवचन को आगे बढ़ते हुए महराज ने रामायण की निम्न पंक्तियों को आधार बनाकर बताया –
जासु नाम सुमिरत एक बारा।
उतरहिं नर भव सिंधु अपारा॥
यानी भगवान का नाम इतना पवित्र और शक्तिशाली है कि यदि कोई व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ उसका एक बार भी स्मरण करे, तो वह संसार के दुःखों, मोह, भय और जन्म-मरण के चक्र रूपी अथाह समुद्र को पार करने की सामर्थ्य प्राप्त कर सकता है।
यह चौपाई केवल शब्दों के उच्चारण की बात नहीं करती, बल्कि उस स्मरण में निहित श्रद्धा, समर्पण और ईश्वर-विश्वास की ओर संकेत करती है। “भव सिंधु” का अर्थ है संसार का वह विशाल समुद्र जिसमें मनुष्य काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसी लहरों से घिरा रहता है। भगवान के नाम का स्मरण उसे इन बंधनों से मुक्त होने का मार्ग दिखाता है।
राम कथा प्रतिदिन सांय 3.30 बजे से 6.30 बजे तक होती है । श्री राम कथा सत्संग समिति के सदस्यों ने धर्मपरायण लोगो से राम कथा में शामिल होने का आग्रह किया है ।

