नागालैंड में 500 प्रतिशत अधिक वर्षा से कुछ घंटों में डूबा अपर असम, बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर : मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा
थर्ड आई न्यूज
गुवाहाटी, 24 जुलाई। असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा है कि अपर असम में बाढ़ की स्थिति अभी भी अत्यंत गंभीर बनी हुई है। उन्होंने आशंका जताई कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि सबसे अधिक प्रभावित लगभग 20 से 25 प्रतिशत क्षेत्रों तक अभी भी राहत और बचाव दल नहीं पहुंच पाए हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि असम और पड़ोसी राज्य नागालैंड में हुई अभूतपूर्व वर्षा के कारण अचानक आई बाढ़ ने शिवसागर और चराइदेव जिलों में भारी तबाही मचाई। उन्होंने कहा कि ये ऐसे जिले हैं, जो सामान्यतः बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नहीं आते, लेकिन इस बार कुछ ही घंटों में हालात भयावह हो गए।
शर्मा के अनुसार, 18 और 19 जुलाई के दौरान नागालैंड के मोन, मोकोकचुंग और वोखा जिलों तथा असम के चराइदेव जिले में सामान्य से 435 से 493 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि लगभग 500 प्रतिशत अधिक वर्षा के कारण पूरे इलाके में अचानक जलभराव हो गया और बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक चराइदेव जिले में 10 तथा शिवसागर जिले में 21 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इस प्रकार दोनों जिलों में मृतकों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है। इसके अलावा 7 लोग अभी भी लापता हैं। उन्होंने आशंका जताई कि संचार व्यवस्था बाधित होने और कई गांवों के संपर्क से कटे होने के कारण मृतकों और लापता लोगों की वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है।
उन्होंने बताया कि दोनों जिलों में लगभग सात लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं और कई इलाके अब भी जलमग्न हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) तथा राज्य की विभिन्न एजेंसियां दिन-रात राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। राज्य सरकार के दो मंत्री प्रभावित क्षेत्रों में लगातार कैंप कर रहे हैं, जबकि राजस्व मंत्री केशव महंत को भी राहत कार्यों की निगरानी के लिए तैनात किया गया है।
हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि चराइदेव जिले का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा अभी भी सड़कें बह जाने और संपर्क व्यवस्था बाधित होने के कारण राहत दलों की पहुंच से बाहर है।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उनसे बातचीत कर आश्वस्त किया है कि 25 जुलाई को केंद्र सरकार की एक अंतर-मंत्रालयी टीम असम पहुंचकर बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करेगी।
शर्मा ने कहा कि यह सामान्य बाढ़ जैसी स्थिति नहीं थी, जिसमें नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ता है। इस बार 18 जुलाई को दोपहर लगभग 3 बजे बारिश शुरू हुई और शाम 7 बजे तक व्यापक तबाही मच गई। कुछ ही घंटों में पूरे इलाके में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई।
क्लाउडबर्स्ट (बादल फटने) जैसी स्थिति के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका वैज्ञानिक आकलन विशेषज्ञ करेंगे, लेकिन प्रशासनिक दृष्टि से सामान्य से लगभग 500 प्रतिशत अधिक वर्षा का प्रभाव बादल फटने जैसी ही स्थिति उत्पन्न करने वाला था।
ड्रोन के माध्यम से राहत सामग्री पहुंचाने के संबंध में उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में यह तकनीक बहुत प्रभावी साबित नहीं हो रही है, क्योंकि जलमग्न क्षेत्रों में सटीक स्थान पर राहत सामग्री पहुंचाना कठिन है। ऐसे में पारंपरिक तरीकों से राहत पहुंचाना अधिक कारगर साबित हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है। प्रभावित परिवारों की संख्या 1.60 लाख से घटकर लगभग 40 हजार रह गई है। हालांकि जहां ट्रांसफॉर्मर अभी भी पानी में डूबे हुए हैं, वहां लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बिजली आपूर्ति फिलहाल बंद रखी गई है।
उन्होंने कहा कि राहत एवं पुनर्वास कार्यों के लिए फिलहाल राज्य सरकार के पास पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं, लेकिन केंद्र से कितनी अतिरिक्त वित्तीय सहायता की आवश्यकता होगी, इसका स्पष्ट आकलन केंद्रीय टीम की रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। बाढ़ से प्रभावित हुए हैं और कई इलाके अब भी जलमग्न हैं।

