आर्य नगर प्रकरण : मोरल पुलिसिंग, सामुदायिक पूर्वाग्रह और उत्तेजक सोशल मीडिया कंटेंट पर रोक जरूरी — मारवाड़ी सम्मेलन
थर्ड आई न्यूज़
गुवाहाटी । पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी सम्मेलन ने आर्य नगर में रविवार को हुई घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के इस दौर में कुछ लोग अपने व्यूज, फॉलोअर्स और लोकप्रियता बढ़ाने की होड़ में कई बार जिम्मेदार नागरिक होने की सीमाओं को लांघ जाते हैं। ऐसी प्रवृत्तियां सामाजिक सौहार्द और शांति व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं।
सम्मेलन का मानना है कि आर्य नगर प्रकरण से जुड़े व्यक्ति द्वारा पिछले कुछ समय से लगातार ऐसे वीडियो और रील्स सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे थे, जिनसे समाज में तनाव और टकराव की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका बन रही थी। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर दुराग्रहपूर्ण, उत्तेजक अथवा समाज के विभिन्न वर्गों के बीच अविश्वास पैदा करने वाले कंटेंट का प्रसार किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता। सम्मेलन ने सरकारी तंत्र से अपेक्षा की है कि ऐसे मामलों में समय रहते अधिक सतर्कता और सक्रियता दिखाई जाए, ताकि संभावित तनाव को प्रारंभिक स्तर पर ही रोका जा सके।
सम्मेलन ने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति के संज्ञान में कोई अवैध गतिविधि आती है, तो उसकी सूचना तत्काल पुलिस अथवा संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों को दी जानी चाहिए। कानून अपने हाथ में लेने या तथाकथित “मोरल पुलिसिंग” के माध्यम से स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास कई बार परिस्थितियों को और अधिक जटिल बना देता है। कानून का पालन और उसका प्रवर्तन संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है तथा नागरिकों का दायित्व उन्हें आवश्यक सहयोग प्रदान करना है।
पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी सम्मेलन ने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की है कि घटना से जुड़े आरोपी अथवा अपराधी की जाति, समुदाय या सामाजिक पहचान का बार-बार उल्लेख किया जा रहा है। सम्मेलन का मानना है कि किसी अपराध का मूल्यांकन अपराधी की जाति या समुदाय के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। अपराध, अपराध होता है और उसके लिए जिम्मेदारी व्यक्ति विशेष की होती है। किसी एक व्यक्ति के कृत्य के आधार पर पूरे समुदाय को कटघरे में खड़ा करना या उसके प्रति पूर्वाग्रह पैदा करना सामाजिक समरसता के लिए घातक है।
सम्मेलन ने उन समाचारों और आरोपों को भी गंभीरता से लिया है जिनमें कहा गया है कि घटना के दौरान भीड़ में मौजूद कुछ लोगों द्वारा “असमिया गो बैक” जैसे नारे लगाए गए। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और पूर्णतः अस्वीकार्य है। असम सभी समुदायों की साझा कर्मभूमि है और किसी भी समुदाय के प्रति घृणा, वैमनस्य या विभाजनकारी भावना को प्रोत्साहित करने वाले कृत्यों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। सम्मेलन ने मांग की है कि यदि ऐसे नारे लगाए गए हों तो पुलिस प्रशासन निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करे।
पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी सम्मेलन ने सभी पक्षों से संयम, शांति और सद्भाव बनाए रखने की अपील की है। सम्मेलन ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे अफवाहों, भड़काऊ संदेशों और अपुष्ट सूचनाओं से दूर रहें तथा किसी भी प्रकार की उत्तेजना में आने के बजाय कानून व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें। सम्मेलन को विश्वास है कि असम की बहुलतावादी और सौहार्दपूर्ण सामाजिक परंपरा को सभी समुदाय मिलकर आगे भी मजबूत बनाए रखेंगे।

