गुवाहाटी में रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं का सर्वे होगा शुरू, स्थानीय एवं स्वदेशी व्यापारियों को प्राथमिकता देने की तैयारी
थर्ड आई न्यूज
गुवाहाटी, 16 जून। असम सरकार द्वारा गुवाहाटी के फुटपाथों पर व्यवसाय करने वाले रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं का दो महीने का व्यापक सर्वेक्षण आगामी 16 अगस्त से शुरू किया जाएगा। राज्य सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य शहर में सड़क विक्रेताओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करना और स्थानीय तथा स्वदेशी समुदायों के लिए व्यवस्थित आर्थिक अवसर सुनिश्चित करना है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ प्रवक्ता ब्रजेन महंत ने रविवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि फुटपाथ मूल रूप से पैदल यात्रियों के लिए बनाए गए हैं, लेकिन समय के साथ इन पर बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों एवं अन्य क्षेत्रों से आए विक्रेताओं का कब्जा बढ़ा है, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं व्यवसाय के अवसर सीमित हुए हैं।
उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि कितने स्थानीय एवं स्वदेशी लोग रोजगार के अवसरों से वंचित रह गए हैं तथा यह सुनिश्चित करना है कि उन्हें निर्धारित वेंडिंग जोन, फुटपाथों अथवा फ्लाईओवर के नीचे विकसित किए जाने वाले व्यवस्थित बाजारों में प्राथमिकता मिल सके।
महंत ने आरोप लगाया कि अनियंत्रित सड़क व्यवसाय के कारण शहर में दो प्रमुख नागरिक समस्याएं उत्पन्न हुई हैं—जलभराव और यातायात जाम। उनके अनुसार, कुछ विक्रेताओं द्वारा कचरे को कूड़ेदानों के बजाय नालियों में फेंकने से जल निकासी व्यवस्था प्रभावित होती है, जबकि अनियोजित ढंग से लगाए गए स्टॉल यातायात बाधित करते हैं।
सरकारी अनुमान के अनुसार, वर्तमान में गुवाहाटी के फुटपाथों पर लगभग एक लाख लोग विभिन्न प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियों में संलग्न हैं, जिनमें से कई के पास वैध अनुमति नहीं है।
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने 13 जून को एक संवाद कार्यक्रम के दौरान इस सर्वेक्षण को “जनगणना शैली का डेटा संग्रह अभियान” बताया था। उन्होंने कहा कि इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि असमिया समुदाय के लोग संभावित रूप से कितने रोजगार अवसरों से वंचित हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सर्वेक्षण के दौरान विक्रेताओं की मूल निवास संबंधी जानकारी भी एकत्र की जाएगी। इसमें धुबरी, गोआलपाड़ा, नलबाड़ी, कामरूप और बरपेटा जैसे जिलों से आए लोगों के अलावा बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे अन्य राज्यों से आए विक्रेताओं का भी विवरण शामिल होगा।
सरकार का मानना है कि इस सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़े भविष्य की नीतियों के निर्माण में सहायक होंगे। इसके आधार पर सड़क विक्रेताओं के नियमन, पुनर्वास और निर्धारित वेंडिंग जोन के विकास संबंधी निर्णय लिए जा सकते हैं। साथ ही, सरकार ने संकेत दिया है कि सर्वेक्षण पूरा होने के बाद स्वदेशी एवं स्थानीय विक्रेताओं को प्राथमिकता के आधार पर निर्धारित व्यापारिक स्थान उपलब्ध कराने पर विचार किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि इस सर्वेक्षण को लेकर विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक स्तरों पर बहस भी शुरू हो गई है। समर्थकों का मानना है कि इससे स्थानीय युवाओं और स्वदेशी समुदायों के लिए आर्थिक अवसर बढ़ेंगे, जबकि आलोचकों का कहना है कि किसी भी कार्रवाई के दौरान वैध विक्रेताओं के अधिकारों और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसी उद्देश्य से सरकार ने इसे सर्वेक्षण और आंकड़ा-संग्रह की प्रक्रिया बताते हुए कहा है कि अंतिम निर्णय प्राप्त तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर लिए जाएंगे।नई जानकारी: मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने स्पष्ट किया है कि यह सर्वेक्षण केवल आंकड़े जुटाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके आधार पर गुवाहाटी में वैज्ञानिक ढंग से वेंडिंग जोन विकसित करने और सड़क विक्रेताओं के लिए दीर्घकालिक नीति तैयार करने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे। लगभग एक लाख फुटपाथ विक्रेताओं का डेटा एकत्र कर शहरी नियोजन एवं आजीविका संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने स्पष्ट किया है कि यह सर्वेक्षण केवल आंकड़े जुटाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके आधार पर गुवाहाटी में वैज्ञानिक ढंग से वेंडिंग जोन विकसित करने और सड़क विक्रेताओं के लिए दीर्घकालिक नीति तैयार करने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे। लगभग एक लाख फुटपाथ विक्रेताओं का डेटा एकत्र कर शहरी नियोजन एवं आजीविका संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।

