त्योहारों से पहले चीनी में तेज उछाल, एथनॉल के साथ कम बारिश और स्टॉकिंग ने बढ़ाया दबाव, गुवाहाटी में भी दामों में लगी आग

थर्ड आई न्यूज़

नई दिल्ली/गुवाहाटी, 19 अगस्त। त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले देश में चीनी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। महाराष्ट्र के प्रमुख चीनी बाजार कोल्हापुर में अगस्त की शुरुआत से थोक भाव करीब 20 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। गुवाहाटी के थोक बाज़ार में चीनी 6100 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से बिक रही है । यह क़ीमत पिछले महीने के भावों से बीस फ़ीसदी से भी अधिक है। कई स्थानीय व्यापारियों पर मुनाफ़ाख़ोरी के भी आरोप लग रहे हैं।

बाजार में इस तेजी के लिए केंद्र सरकार की एथनॉल नीति को भी जिम्मेदार माना जा रहा है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अकेले एथनॉल नीति को कीमतों में बढ़ोतरी का कारण मानना सही नहीं होगा। मांग में बढ़ोतरी, व्यापारियों और थोक खरीदारों की स्टॉकिंग, प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में कमजोर बारिश तथा भविष्य में उत्पादन घटने की आशंका भी इसके महत्वपूर्ण कारण हैं।

चीनी बाजार पर सबसे तात्कालिक दबाव आगामी त्योहारों का है। अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दुर्गा पूजा,दशहरा और दीपावली सहित विभिन्न त्योहारों के कारण मिठाइयों और अन्य खाद्य उत्पादों में चीनी की खपत बढ़ जाती है। संभावित कमी और आगे भाव बढ़ने की आशंका में बड़े खरीदार भी पहले से माल का स्टॉक कर रहे हैं। मिलों की ओर से भी बाजार में चीनी की निकासी अपेक्षाकृत धीरे किए जाने की बात सामने आई है। इससे उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है।

दूसरा बड़ा कारण अगले चीनी सीजन को लेकर बनी चिंता है। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में कम बारिश ने गन्ने की आगामी फसल को लेकर आशंका पैदा कर दी है। उत्पादन घटने की संभावना को बाजार ने अभी से कीमतों में शामिल करना शुरू कर दिया है।

एथनॉल नीति की भूमिका भी महत्वपूर्ण :
चीनी की तेजी में सरकार की एथनॉल नीति की भूमिका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। मौजूदा सीजन में करीब 30 लाख टन चीनी के बराबर गन्ना अथवा चीनी सामग्री एथनॉल उत्पादन की ओर मोड़ी गई है। यह कुल चीनी उत्पादन का करीब 10 प्रतिशत है। एथनॉल का उत्पादन C-Heavy molasses जैसे अंतिम उप-उत्पाद के अलावा B-Heavy molasses और सीधे गन्ने के रस से भी किया जा सकता है। गन्ने के रस अथवा B-Heavy molasses को एथनॉल के लिए इस्तेमाल करने पर उस गन्ने से बाजार में आने वाली चीनी की मात्रा कम हो जाती है।

बढ़ती कीमतों के बीच सरकार अब अगले सीजन में गन्ने के रस और B-Heavy molasses से बनने वाले एथनॉल की मात्रा सीमित करने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। ऐसा होने पर अधिक गन्ना चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध हो सकेगा। एथनॉल मिश्रण के लक्ष्य को बनाए रखने के लिए मक्का और चावल जैसे अनाज से बनने वाले एथनॉल की हिस्सेदारी बढ़ाई जा सकती है।

आयात शुल्क में राहत पर भी विचार :
कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने अभी चीनी आयात पर छूट का अंतिम फैसला नहीं किया है, लेकिन सीमित मात्रा में शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक अक्टूबर के अंत तक चीनी मिलों को करीब 10 लाख टन चीनी शुल्क-मुक्त आयात करने की अनुमति देने का प्रस्ताव विचाराधीन है। थोक व्यापारियों के लिए स्टॉक सीमा कड़ी करने और मिलों के मासिक बिक्री कोटे में बदलाव जैसे उपाय भी सरकार के सामने हैं।

इसलिए मौजूदा तेजी को किसी एक नीति का परिणाम बताने के बजाय कई परिस्थितियों के मिले-जुले प्रभाव के रूप में देखना अधिक उचित होगा। एथनॉल के लिए गन्ने का डायवर्जन, महाराष्ट्र और कर्नाटक में कमजोर बारिश, आगामी उत्पादन को लेकर चिंता, त्योहारों के कारण बढ़ती मांग और संभावित कमी को देखते हुए की जा रही स्टॉकिंग ने मिलकर चीनी बाजार पर दबाव बनाया है।

सरकार के लिए चुनौती अब एथनॉल मिश्रण के लक्ष्य और घरेलू चीनी उपलब्धता के बीच संतुलन बनाने की है। आने वाले सप्ताहों में एथनॉल के लिए गन्ने के उपयोग और चीनी आयात पर लिया जाने वाला फैसला बाजार की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *