महंगाई से रसोई बेहाल, आवश्यक वस्तुओं के बढ़ते दामों पर सरकार ने बुलाई आपात बैठक, कामरूप चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स को भेजा बुलावा
थर्ड आई न्यूज़
गुवाहाटी, 19 अगस्त। असम में खाने-पीने की वस्तुओं, फल-सब्जियों और अन्य आवश्यक सामान की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। रोजमर्रा की जरूरतों पर लगातार बढ़ते खर्च से घर का बजट संभालना मुश्किल होता जा रहा है। बाजार में महंगाई को लेकर बढ़ती बेचैनी के बीच राज्य सरकार भी हरकत में आई है। खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने आवश्यक वस्तुओं के स्टॉक और कीमतों की स्थिति की समीक्षा के लिए गुरुवार, 20 अगस्त को उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है।
खाद्य, सार्वजनिक वितरण, उपभोक्ता मामले एवं विधिक माप विज्ञान आयुक्त हेमंत भुइयां ने बुधवार को इस संबंध में कामरूप चैंबर ऑफ कॉमर्स और असम चैंबर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारियों को औपचारिक पत्र भेजा। बैठक 20 अगस्त को सुबह 11 बजे दिसपुर स्थित विभागीय मंत्री के कॉन्फ्रेंस हॉल में होगी। व्यापारिक संगठनों से आवश्यक वस्तुओं के स्टॉक और मौजूदा कीमतों से संबंधित सभी जरूरी दस्तावेज लेकर बैठक में आने को कहा गया है।
सरकार की यह पहल ऐसे समय हुई है, जब बाजार में खाद्य वस्तुओं के दाम आम उपभोक्ता की चिंता का बड़ा कारण बनते जा रहे हैं। केंद्र सरकार का उपभोक्ता मामले विभाग चावल, गेहूं, आटा, विभिन्न दालों, चीनी, खाद्य तेल, दूध, आलू, प्याज, टमाटर और नमक सहित 22 आवश्यक वस्तुओं की कीमतों की नियमित निगरानी करता है।

गुवाहाटी में सबसे ज्यादा चर्चा इन दिनों चीनी की कीमतों को लेकर है। स्थानीय बाजार से मिली जानकारी के अनुसार खुदरा बाजार में चीनी 63 से 64 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जबकि थोक बाजार में भाव करीब 6,100 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। पिछले कुछ समय में चीनी के भाव में आई तेज बढ़ोतरी का सीधा असर घरों के साथ मिठाई, बेकरी, होटल और खानपान कारोबार पर भी पड़ने की आशंका है।
चीनी की तेजी के पीछे किसी एक कारण को जिम्मेदार मानना उचित नहीं होगा। त्योहारी सीजन नजदीक आने से मांग बढ़ रही है और व्यापारिक स्तर पर स्टॉक तैयार करने की गतिविधियां भी भाव पर दबाव डाल सकती हैं। गन्ने का कुछ हिस्सा चीनी के स्थान पर एथनॉल उत्पादन की ओर जाने से उपलब्धता पर असर पड़ता है। मौसम और उत्पादन संबंधी आशंकाएं भी बाजार की धारणा को प्रभावित करती हैं। इसलिए मौजूदा तेजी को अकेले सरकार की एथनॉल नीति से जोड़कर देखना तस्वीर का एक हिस्सा भर होगा।
सब्जियों और रसोई में रोज इस्तेमाल होने वाली कई वस्तुओं में भी तेजी दिखाई दे रही है। अगस्त के दौरान उपलब्ध गुवाहाटी बाजार आंकड़ों में अदरक, लहसुन, बीन्स, हरी मिर्च और कुछ अन्य सब्जियों के भाव ऊंचे दर्ज किए गए हैं। अलग-अलग बाजारों में कीमतों में काफी अंतर भी दिखाई देता है। बारिश, आवक, परिवहन और स्थानीय उपलब्धता के अनुसार इनके भाव तेजी से बदल रहे हैं।
देश के दूसरे हिस्सों में भी रसोई की कुछ वस्तुओं पर मौसम का असर दिखाई दे रहा है। हाल की रिपोर्टों में धनिया, अदरक, लहसुन और प्याज जैसी वस्तुओं की आपूर्ति पर अनियमित बारिश का प्रभाव सामने आया है। चावल और चीनी पर भी कीमतों का दबाव दर्ज किया गया है।
असम के लिए स्थिति इसलिए अधिक संवेदनशील है क्योंकि हाल की विनाशकारी बाढ़ ने ऊपरी असम के कई जिलों में जनजीवन, कृषि और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। बाढ़ से 26 हजार से अधिक परिवारों को नुकसान पहुंचने का आकलन सामने आ चुका है। ऐसे में परिवहन, स्थानीय उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था में व्यवधान का असर बाजार तक पहुंचना स्वाभाविक है।
महंगाई को लेकर जन असंतोष नया भी नहीं है। इसी वर्ष आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों को लेकर ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन ने भी सार्वजनिक रूप से चिंता जताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी थी।
अब निगाहें गुरुवार की बैठक पर टिकी हैं। खास तौर पर यह देखा जाएगा कि सरकार और व्यापारिक संगठनों के पास आवश्यक वस्तुओं के मौजूदा स्टॉक की क्या तस्वीर है, कीमतों में तेजी के वास्तविक कारण क्या बताए जाते हैं और बाजार में कृत्रिम कमी अथवा जमाखोरी रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। लगातार महंगी होती रसोई के बीच आम उपभोक्ता को सबसे अधिक इंतजार इस बात का है कि सरकारी बैठक का असर बाजार के भाव पर कब और कितना दिखाई देता है।

